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कौशांबी : लकड़ी के गट्ठर के सहारे गंगा में 40 किलोमीटर तक बहती रही वृद्धा, मल्लाहों बाहर निकाला

Sun, 09 Oct 2022 07:52 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी
अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 09 Oct 2022 07:52 PM IST
सार

फतेहपुर जिले के सनापुर गांव की शांति देवी पैर फिसलने के बाद गंगा में डूब गई। गंगा में रहे एक लकड़ी का गट्ठर उनका सहारा बन गया। वह लकड़ी के गट्ठर के सहारे 40 किलोमीटर तक तैरते हुए कौशांबी पहुंच गईं।

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With the help of a bundle of wood, the old woman flowed in the Ganges for 40 km, took out the sailors
फतेहपुर से गंगा में बहते हुए कौशांबी पहुंची वृद्धा। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

कहते हैं डूबते को तिनके का सहारा ही बहुत है। यह कहावत 70 साल की शांती निषाद पर सटीक साबित हो रही है। घरवालों से गुस्सा होकर जान देने के लिए उसने गंगा में छलांग तो लगा दी, लेकिन जब दम घुटने लगा तो एक लकड़ी के गट्ठर का सहारा मिल गया। इसी गट्ठर के सहारे वृद्घा 40 किलोमीटर दूर तक बहती हुई चली आई। रविवार दोपहर कड़ाधाम के कंथुवा गांव के समीप मल्लाहों ने शांती को सकुशल बाहर निकाल लिया।

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कड़ाधाम कोतवाली के कंथुवा गांव निवासी पप्पू निषाद व रवि निषाद रविवार दोपहर गंगा नदी किनारे शिकार के लिए गए थे। इस दौरान उनकी नजर एक लकड़ी व जलकुंभी से लिपटकर बहती हुई आती महिला पर गई। दोनों ने फौरन महिला को बचाने के लिए नदी में छलांग लगा दी। महिला को बाहर निकाला गया तो उसकी सांसे चल रही थी। जानकारी मिलते ही घाट पर तमाम लोगों की भीड़ जुट गई। इस बीच वहां पहुंचे कंथुवा के ही राम प्रसाद निषाद ने बताया कि महिला उनके साले की सास है। बताया कि इनका नाम शांती देवी है और वह फतेहपुर जिले के हथगाम कोतवाली के समोपुर की रहने वाली हैं।

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राम प्रसाद ने शांती देवी को इलाज के लिए एंबुलेंस से सीएचसी इस्माइलपुर में भर्ती कराया। शांती के बेटे रामसजीवन को भी खबर दी गई। सूचना पर पहुंचे राम सजीवन ने बताया शनिवार रात 10 बजे मां गुस्से में आकर कहीं चली गई थी। इसके बाद सुबह उनके कंथुवा में मिलने की जानकारी मिली। समोपुर से कंथुवा की दूरी करीब 40 किलोमीटर है। ऐसे में एक बुजुर्ग महिला लकड़ी के गट्ठर के सहारे रात भर पानी में तैरती रही और सकुशल है, लोग इसे कुदरत का करिश्मा ही मान रहे हैं। समाजसेवी रणविजय निषाद बताते हैं जाको राखे साइयां मार सके न कोय...।

बचपन से ही तैराकी में शांती को थी महारत
शांती निषाद के सकुशल बरामद होने के बाद सीएचसी इस्माइलपुर पहुंचे उनके बेटे राम सजीवन बताते हैं कि अक्सर ननिहाल में चर्चा होती कि उसकी मां कई-कई किलो मीटर गंगा में तैयारी करती थी। गंगा किनारे रहने के कारण मुख्य पेशा मछलियों का भी था। इस वजह से परिवार के ज्यादातर सदस्यों को तैराकी आती है। पर, इस उम्र में 40 किलोमीटर सकुशल तैर आना ताज्जुब की बात है।

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