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Kaushambi News: जीएसटी की दरों में कमी से थोक कारोबारी चिंता में
Thu, 18 Sep 2025 12:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Thu, 18 Sep 2025 12:31 AM IST
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केंद्र सरकार ने आम उपभोक्ताओं को राहत देते हुए कई खाद्य सामग्रियों पर जीएसटी की दर घटा दी है। पहले 18 प्रतिशत जीएसटी वाले उत्पादों पर अब केवल पांच प्रतिशत कर देना होगा। नई दरें 22 सितंबर से लागू होंगी। इससे बिस्किट, नमकीन, मैगी समेत रोजमर्रा की खपत वाली वस्तुएं सस्ती हो जाएंगी।
हैं। उनकी सबसे बड़ी चिंता पुराने स्टॉक को लेकर है। 18 प्रतिशत जीएसटी चुकाकर खरीदे गए माल की बिक्री नई दर पर होने से उन्हें घाटा लगने का डर है। कारोबारी मानते हैं कि बाजार में प्रतिस्पर्धा की वजह से उन्हें पुराने स्टॉक पर भी कीमत घटाकर बेचनी पड़ेगी। व्या
पार मंडल जिलाध्यक्ष अंशुल केसरवानी ने कहा कि दरों में 13 प्रतिशत की कमी से व्यापारियों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। केंद्र सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करते हुए समाधान निकालना चाहिए।
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व्यापारी अनुराग केसरवानी ने कहा कि कारोबारी पहले ही मंदी से जूझ रहे हैं। ऐसे में स्टॉक पर पड़ने वाला सीधा घाटा उन्हें और कमजोर करेगा। व्यापारियों की मांग है कि पुराने स्टॉक पर इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा दी जाए या फिर सरकार अंतर की भरपाई के लिए कोई ठोस कदम उठाए। फिलहाल उपभोक्ताओं के लिए सस्ती हुई खाद्य सामग्री खुशखबरी की बात है। वहीं कारोबारी अपने नुकसान की भरपाई के रास्ते तलाशने की चिंता में है।
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हैं। उनकी सबसे बड़ी चिंता पुराने स्टॉक को लेकर है। 18 प्रतिशत जीएसटी चुकाकर खरीदे गए माल की बिक्री नई दर पर होने से उन्हें घाटा लगने का डर है। कारोबारी मानते हैं कि बाजार में प्रतिस्पर्धा की वजह से उन्हें पुराने स्टॉक पर भी कीमत घटाकर बेचनी पड़ेगी। व्या
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पार मंडल जिलाध्यक्ष अंशुल केसरवानी ने कहा कि दरों में 13 प्रतिशत की कमी से व्यापारियों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। केंद्र सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करते हुए समाधान निकालना चाहिए।
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व्यापारी अनुराग केसरवानी ने कहा कि कारोबारी पहले ही मंदी से जूझ रहे हैं। ऐसे में स्टॉक पर पड़ने वाला सीधा घाटा उन्हें और कमजोर करेगा। व्यापारियों की मांग है कि पुराने स्टॉक पर इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा दी जाए या फिर सरकार अंतर की भरपाई के लिए कोई ठोस कदम उठाए। फिलहाल उपभोक्ताओं के लिए सस्ती हुई खाद्य सामग्री खुशखबरी की बात है। वहीं कारोबारी अपने नुकसान की भरपाई के रास्ते तलाशने की चिंता में है।