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गंगा तराई में बूंद-बूंद पानी को जंग
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 22 Apr 2016 11:40 PM IST
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कड़ा में पानी की किल्लत के चलते गांव क बाहर से ठेले से पानी भर कर आता युवक।
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विकास खंड कड़ा में गंगा की तराई में बसे गांवों में बूंद-बूंद पानी के लिए हाहाकार मचा है। मानसूनी बरसात कम होने के चलते तराई की स्थिति और भयावह होती जा रही है। 15 हजार से अधिक आबादी वाली ग्राम सभा कड़ा में लगे 25 हैंडपम्पों में 15 खराब हैं। चल रहे दस हैंडपम्पों में महज दो का पानी पीने योग्य है। यह हाल गंगा की तराई में बसे कजियाना, ताज मल्लाहन, छोटा टीला, बड़ा टीला आदि दर्जनों गांवों का है। मजबूरन लोगों को गंगा के प्रदूषित पानी से प्यास बुझानी पड़ रही है। ब्लॉक और जिला प्रशासन तराई के गांवों में पेयजल की गम्भीर समस्या जूझ रहे ग्रामीणों के प्रति तनिक भी संजीदा नहीं दिख रहा है।
गंगा की तराई में बसे गांव कड़ा की आबादी 15 हजार से अधिक है। यहां के ग्रामीणों को पेयजल मुहैया कराने के लिए कुल 25 हैंडपम्प लगवाए गए हैं। पेयजल का दूसरा साधन जलनिगम द्वारा बनवाई गई टंकी की सप्लाई का पानी है। डार्क जोन वाले इस गांव में लगे 25 हैंडपम्पों में गर्मी की शुरुआत होते ही 15 ने पानी देना छोड़ दिया है। चल रहे दस हैंडपम्पों में महज दो का पानी पीने योग्य है। ऐसे में ग्रामीणों को पूरी तरह से पेयजल के लिए आपूर्ति के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है जो पूरी तरह से बिजली पर निर्भर है। ग्रामीणों की माने तो 24 घंटे में एक बार ही आपूर्ति का पानी मिल पाता है। ऐसे में गांव के लोगों के सामने पेयजल संकट खड़ा हो गया है। पेयजल की आपूर्ति ठीक से न होने और हैंडपम्पों के खराब होने के चलते लोगों को मजबूरन गंगा का प्रदूषित पानी पीना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान कड़ा ने कई बार बीडीओ और जिला स्तरीय अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया। लेकिन अफसरों ने ग्रामीणों की गम्भीर समस्या के प्रति कोई संजीदगी नहीं दिखाई। कमोवेश यही हाल गंगा की तराई में बसे ताज मल्लाहन, छोटा टीला, बड़ा टीला, लेहदरी खतीफ आदि कई गांवों का है।
विकास खंड कड़ा के कजियाना, पुरानी बाजार, पशु अस्पताल आदि मोहल्ले में रहने वाले लोगों के साथ लेहदरी खतीफ, मल्लाहन का पुरवा, ताज मल्लाहन, छोटा टीला, बड़ा टीला समेत गंगा की तराई में बसे कई गांवों के लोगों को पेयजल के रूप में गंगा का प्रदूषित पानी पीना पड़ रहा है।
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विकास खंड कड़ा के गंगा की तराई में बसे लेहदरी खतीफ गांव की आबादी डेढ़ हजार की है। यहां के ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए कुछ छह हैंडपम्प लगवाए गए हैं। अप्रैल माह के शुरुआत में छह में तीन हैंडपम्पों ने पानी देना बंद कर दिया। चल रहे तीन हैंडपम्पों में दो अन्य भी रह-रहकर पानी छोड़ दे रहे हैं। महज एक हैंडपम्प के भरोसे 15 सौ की आबादी की पेयजल व्यवस्था चल रही है। ऐसे में मजबूरन ग्रामीणों को गंगाजल से प्यास बुझानी पड़ रही है। यही हाल इलाके के ताज मल्लाहन गांव का भी है।
ग्राम सभा कड़ा में पेयजल की आपूर्ति पानी की टंकी से की जाती है। लेकिन अब यह भी पर्याप्त पानी की आपूर्ति नहीं करती। ग्रामीणों का कहना है कि टंकी के पानी की आपूर्ति पूरी तरह से बिजली पर निर्भर है। जब बिजली आती है तो 24 घंटे में एक बार एक से दो घंटे आपूर्ति की जाती है। कभी-कभी रात के दस से 11 बजे के बीच भी आपूर्ति हो जाती है। इससे लोगों का पेयजल संकट दूर नहीं हो रहा है।
क्या कहते हैं बीडीओ
विकास खंड कड़ा पहले से डार्क जोन में है। ऐसे में इस साल सूखा पड़ने के कारण स्थिति और गम्भीर हो गई है। तेजी से नीचे खिसके भूगर्भ जल स्तर के चलते क्षेत्र में पचास फीसदी हैंडपम्पों ने पानी देना बंद कर दिया है। इनका रीबोर कराने के लिए सूची बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजा गया है। यांत्रिक खराबी से ठप हैंडपम्पों की मरम्मत कराने का निर्देश सभी ग्राम प्रधानों को दिए जा चुके हैं।
सुनील तिवारी बीडीओ कड़ा
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गंगा की तराई में बसे गांव कड़ा की आबादी 15 हजार से अधिक है। यहां के ग्रामीणों को पेयजल मुहैया कराने के लिए कुल 25 हैंडपम्प लगवाए गए हैं। पेयजल का दूसरा साधन जलनिगम द्वारा बनवाई गई टंकी की सप्लाई का पानी है। डार्क जोन वाले इस गांव में लगे 25 हैंडपम्पों में गर्मी की शुरुआत होते ही 15 ने पानी देना छोड़ दिया है। चल रहे दस हैंडपम्पों में महज दो का पानी पीने योग्य है। ऐसे में ग्रामीणों को पूरी तरह से पेयजल के लिए आपूर्ति के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है जो पूरी तरह से बिजली पर निर्भर है। ग्रामीणों की माने तो 24 घंटे में एक बार ही आपूर्ति का पानी मिल पाता है। ऐसे में गांव के लोगों के सामने पेयजल संकट खड़ा हो गया है। पेयजल की आपूर्ति ठीक से न होने और हैंडपम्पों के खराब होने के चलते लोगों को मजबूरन गंगा का प्रदूषित पानी पीना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान कड़ा ने कई बार बीडीओ और जिला स्तरीय अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया। लेकिन अफसरों ने ग्रामीणों की गम्भीर समस्या के प्रति कोई संजीदगी नहीं दिखाई। कमोवेश यही हाल गंगा की तराई में बसे ताज मल्लाहन, छोटा टीला, बड़ा टीला, लेहदरी खतीफ आदि कई गांवों का है।
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विकास खंड कड़ा के कजियाना, पुरानी बाजार, पशु अस्पताल आदि मोहल्ले में रहने वाले लोगों के साथ लेहदरी खतीफ, मल्लाहन का पुरवा, ताज मल्लाहन, छोटा टीला, बड़ा टीला समेत गंगा की तराई में बसे कई गांवों के लोगों को पेयजल के रूप में गंगा का प्रदूषित पानी पीना पड़ रहा है।
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विकास खंड कड़ा के गंगा की तराई में बसे लेहदरी खतीफ गांव की आबादी डेढ़ हजार की है। यहां के ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए कुछ छह हैंडपम्प लगवाए गए हैं। अप्रैल माह के शुरुआत में छह में तीन हैंडपम्पों ने पानी देना बंद कर दिया। चल रहे तीन हैंडपम्पों में दो अन्य भी रह-रहकर पानी छोड़ दे रहे हैं। महज एक हैंडपम्प के भरोसे 15 सौ की आबादी की पेयजल व्यवस्था चल रही है। ऐसे में मजबूरन ग्रामीणों को गंगाजल से प्यास बुझानी पड़ रही है। यही हाल इलाके के ताज मल्लाहन गांव का भी है।
ग्राम सभा कड़ा में पेयजल की आपूर्ति पानी की टंकी से की जाती है। लेकिन अब यह भी पर्याप्त पानी की आपूर्ति नहीं करती। ग्रामीणों का कहना है कि टंकी के पानी की आपूर्ति पूरी तरह से बिजली पर निर्भर है। जब बिजली आती है तो 24 घंटे में एक बार एक से दो घंटे आपूर्ति की जाती है। कभी-कभी रात के दस से 11 बजे के बीच भी आपूर्ति हो जाती है। इससे लोगों का पेयजल संकट दूर नहीं हो रहा है।
क्या कहते हैं बीडीओ
विकास खंड कड़ा पहले से डार्क जोन में है। ऐसे में इस साल सूखा पड़ने के कारण स्थिति और गम्भीर हो गई है। तेजी से नीचे खिसके भूगर्भ जल स्तर के चलते क्षेत्र में पचास फीसदी हैंडपम्पों ने पानी देना बंद कर दिया है। इनका रीबोर कराने के लिए सूची बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजा गया है। यांत्रिक खराबी से ठप हैंडपम्पों की मरम्मत कराने का निर्देश सभी ग्राम प्रधानों को दिए जा चुके हैं।
सुनील तिवारी बीडीओ कड़ा