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उफनाई यमुना: जीर्ण आंखों में खौफ, गांव में सन्नाटा

Fri, 20 Sep 2019 01:56 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 20 Sep 2019 01:56 AM IST
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water logging by yamuna
water logging by yamuna - फोटो : KAUSHAMBI
उफनाई यमुना: आंखों में खौफ, गांवों में सन्नाटा
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लगातार बढ़ रहे जल स्तर के कारण रतजगा कर रहे हैं तराई के निवासी
टकहरिया बाबा देवस्थान पर यमुना की लहरें टक्कर मार रहीं
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। टकहरिया बाबा देवस्थान पर यमुना की लहरें टक्कर मार रही हैं। देव स्थान के चबूतरे पर 80 बरस की बुजुर्ग ननकुलिया देवी अपनी आंखों की कमजोर हो चुकी रोशनी से लहरों को निहारती है। सड़क पर भरे पानी में किसी खतरे से बेपरवाह बच्चे कागज की कश्ती (नाव) चलाने की कोशिश कर रहे हैं। पूरा गांव एक अजीब से सन्नाटे में लिपटा था।
यह मंजर गुरुवार को सदर तहसील के बाढ़ प्रभावित बड़ा गढ़वा गांव का था। गुरुवार को अमर उजाला टीम गांव पहुंची तो बाढ़ का दंश झेल रहे ग्रामीणों ने प्रशासनिक बदइंजामी की कहानी बयां की। गांव के रवि, दुर्गा प्रसाद, शारधा, राजेश सहित दर्जन लोगों के घर गांव के निचले हिस्से में हैं। पीड़ित ग्रामीणों का कहना था कि तीन दिन से बाढ़ का पानी लगातार गांव की तरफ बढ़ता आ रहा था। इस कारण वे सो नहीं पा रहे थे। बुधवार की रात करीब आठ बजे पानी जब एकदम से घर के करीब आ गया तो आनन-फानन लोग अपने जरूरी समान समेटने लगे। गांव के बाहर दिगंबर जैन अतिशय स्थल की ओर वह लोग समान पहुंचाने लगे। रात साढ़े दस बजे तक उनके घरों में घुटने तक पानी भर चुका था। इस कारण घर गिरने का भी खतरा है। ऐसे में दरवाजा बंद कर सभी लोग आश्रय स्थल पर आ गए। दोपहर दो बजे तक इन परिवारों के बच्चे मुकेश, शिवम, आकाश सहित करीब दो दर्जन मासूम भूख से बिलबिला रहे थे। गांव से ही कुछ लोगो ंने बच्चों के लिए रोटी का इंतजाम किया लेकिन वह नाकाफी था। आश्रय स्थल पर दो बोरी गेहूं व चावल था, लेकिन विधायक सदर लाल बहादुर के इंतजार में राजस्व कर्मियों ने विरतरण नहीं किया। विधायक के पहुंचने पर राशन बांटा गया।
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बड़ा गढ़वा गांव के पास पहुंचा बाढ़ का पानी
मंझनपुर (ब्यूरो)। बड़ा गढ़वा गांव के रामचरन, नत्थू, सरजू, राजू निषाद के कच्चे घरों में पानी की लहरें टक्कर मार रही है। यमुना अगर दो फिट भी बढ़ी तो इन लोगों के घर में पानी प्रवेश कर जाएगा। इसके बाद भी यह सारे लोग अपने परिवार के साथ घरो में डटे हैं। मकान गिरने के खतरे के बाबत पूछने पर लोगों ने बताया यह तो साहब नियति हैं। तेहरार में रहय का है तो कब तक डेराई।
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राहत शिविर के आठ परिवारों को मिला राशन
बारा (ब्यूरो)। सदर तहसली के बड़ा गढ़वा गांव की जगरानी, केवला, दुर्गा, रवि सहित आठ परिवारों के यहां बाढ़ का पानी आ गया है। सभी को रात में ही आश्रय स्थल पर पहुंचाया गया। गुरुवार को दोपहर बाद पहुंचे सदर विधायक लाल बहादुर ने सभी परिवारों को 10 किलो गेहूं व पांच किलो चावल का वितरण कराया। इस मौके पर तहसीलदार रामजी, सप्लाई इंस्पेक्टर मदन किशोर, लेखपाल सतीश त्रिपाठी, प्रधान सुनील तिवारी, अशोक मिश्र, योगेंद्र तिवरी, संतोष त्रिपाठी आदि लोग मौजूद रहे।
कटैया, मल्हीपुर, डिहवा और पिपहटा गांव बने टापू
आंखों में दहशत और बच्चों की अल्हड़ मस्ती के बीच बीत रहा दिन
पल-पल बढ़ रहे नदीं के जल स्तर से खिंची चिंता की लकीर
अमर उजाला ब्यूरो
चायल। यमुना की बाढ़ ने चायल तहसील के चार गांवों को टापू में तब्दील कर रखा है। गांवों के चारों तरफ पानी ही पानी है। लोग इसके बाद भी अपने घर खाली नहीं कर रहे हैं। सारा दिन नदी के पानी की तरफ बड़े-बुजुर्ग टकटकी लगाकर पानी के बढ़ते स्तर को देखते हैं। बच्चे बाढ़ से बेपरवाह होकर पानी में खेलते हैं। पिछले पांच दिनों से ग्रामीणों की यही दिनचर्या बनी है।
चायल तहसील के मल्हीपुर, कटैया, डिहवा और पिपरहटा गांव पानी के घिरे हुए हैं। ग्रामीण टापू बन चुके गांव में रह रहे हैं। दैनिक जरूरत का समान आदि लेने के लिए लोग नाव के सहारे बाहर आते हैं। लगातार जल स्तर में बढ़ोत्तरी ग्रामीणों को हैरत में डाले हुए है। जहां भी चार लोग एकत्र होते हैं, बस यही चर्चा कि कहीं 1978 वाली बाढ़ न आ जाए। इन गांवों के बच्चे पानी में मस्ती करते हैं तो बुजुर्ग उनकी रखवाली के लिए मुस्तैद रहते हैं।
बाढ़ देखने के लिए पहुंच रहे लोग, खींच रहे सेल्फी
मंझनपुर (ब्यूरो)। यमुना का रौद्ररूप देखने के लिए जिले के तमाम स्थानों से लोग बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंच रहे हैं। पानी की लहरों के सामने लोग सेल्फी खींचते हैं। बाढ़ प्रभावित गांवों में रहने वाले लोगों के रिश्तेदार भी अपनों का हाल जानने के लिए पहुंच रहें है।
पानी में डूबी फसल से भर रहा मवशियों का पेट
पश्चिमशरीरा (ब्यूरो)। सदर तहसील के बाढ़ प्रभावित गांवों में अब ग्रामीण पानी में डूबी फसल से मवेशियों का पेट भर रहे हैं। कमर तक पानी में घुसकर लोग फसल का ऊपरी हिस्सा काट रहे है। जहां पानी ज्यादा गहरा है वहां नाव का सहारा लिया जा रहा है। क्षेत्र के पभोषा, बड़हरी, डेढ़ावल, कटरी, नौबस्ता आदि गांवों के चारो तरफ पानी भर चुका है। पानी की रफ्तार यही रही तो गांव के अंदर एक या दो दिन में पानी प्रवेश कर जाएगा।
नाव से स्कूल जाते हैं बच्चे
पश्चिमशरीरा (ब्यूरो)। बड़हरी गांव का प्राथमिक स्कूल सिंघवल गांव में बना है। दोनों गांव के बीच से भदनिया नदी बहती है। यमुना में बाढ़ के कारण इस नदी का पानी भी उफान पर है। नतीजतन गांव के बच्चे स्कूल जाने और आने के लिए नाव का सहार लेते हैं।
बाढ़ आने पर रिफ्यूजी बन जाते हैं गढ़वा के बाशिंदे
पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है लोगों की जमीन
मजबूरन तराई में घर बनाकर रहने को विवश हैं लोग
अमर उजाला बयूरो
बारा। सदर तहसील के गढ़वा गांव के लोग बाढ़ आने की स्थित में रिफ्यूजी बनकर रह जाते हैं। लोगों की जमीन किला क्षेत्र में है लेकिन खेती के सिवा किसी को निर्माण करने की इजाजत नहीं है। मजबूरन गांव के लोग गांव के निचले हिस्से में घर बनाकर रहने को मजबूर हैं।
बड़ा गढ़वा गांव का ज्यादातर हिस्सा घोषिताराम विहार, अशोक स्तंभ आदि क्षेत्र में आता है। इस कारण पुरातत्व विभाग ने इलाके की जमीन को अपने संरक्षण ले रखा है। यहां रहने वाले लोग जमीन पर खेती तो कर सकते हैं लेकिन बौद्ध विरासत क्षेत्र में कोई निर्माण नहीं कर सकते। गांव के देवराज, दुर्गा, अदालती, राजू, मन्नीलाल, रामबाबू, मतोले, सतुआ आदि का कहना है कि उन लोगों की मजबूरी है कि गांव के निचले स्थान पर रहना। ऐसे में जब भी बाढ़ आती है तो उन्हं अपना बोरिया विस्तर समेटकर शरणार्थी कैंप की शरण लेना पड़ता है।

एक दिन में डेढ़ से दो फिट बड़ रहा यमुना का पानी
मंझनपुर (ब्यूरो)। बड़ा गढ़वा गांव के रामचरन, संतोष, नत्थू सहित दर्जन भर ऐसे परिवार हैं, जिन्होंने गृहस्थी का सारा समान बाक्स और बोरे में भर लिया है। राम चरन का कहना है कि वर्ष 2013 में यमुना का पानी आधे गांव में घुस आया था। अभी हालात ऐसे नहीं है। लेकिन पानी बढने की रफ्तार ऐसे ही रही तो मजबूरी में घर छोडना पड़ेगा।

water logging by yamuna

water logging by yamuna- फोटो : KAUSHAMBI

water logging by yamuna

water logging by yamuna- फोटो : KAUSHAMBI

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