फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kaushambi News ›   water in village doaba

बाढ़ का कहर, हजारों लोग बेघर

Tue, 23 Aug 2016 12:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी Updated Tue, 23 Aug 2016 12:53 AM IST
विज्ञापन
water in village doaba
other
दोआबा में यमुना नदी उफान पर है। अब तक पांच गांवों में बाढ़ का पानी घुस चुका है तो कई गांवों के मुहाने पर हिलोरे मार रहा है। बाढ़ की आगोश में आ चुके गांवों में ग्रामीणों की नींद हराम है। बाढ़ के भय से लोग धीरे-धीरे घर छोड़कर पलायन शुरू कर दिए हैं। घर से निकलने के लिए लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। बाढ़ के मामले में प्रशासन की ओर से कोई पहल शुरू नहीं हो सकी है।
विज्ञापन


दोआबा के यमुना नदी इन दिनों उफान पर हैं। यमुना का पानी कगार को तोड़कर गांवों में घुस गया है। इससे तराई में बसे लगभग 120 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा। हर घंटे बढ़ रहे पानी और तेज बहाव को देख तराई के बाशिंदों में दहशत पसर गई है। अब तक जिले के कटैया, डिहवा, मल्हीपुर, हटवा और गढ़वा गांव समेत दर्जनों गांव यमुना नदी में आई बाढ़ से घिर चुके हैं। इन गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। बाढ़ से घिरे इन गांवों के लोग प्रशासन की ओर मदद की टकटकी लगाए बैठे हैं। चार दिनों से बाढ़ की जद में आए लोगों की मदद के लिए प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ऐसे में जरूरत के सामान को लेने के लिए ग्रामीणों को पानी से होकर आना-जाना पड़ रहा है। मदद के लिए प्रशासन का हाथ उठता न देख बाढ़ से घिरे ग्रामीणों का हाल बेहाल है।
विज्ञापन


आज से जैन मंदिर में डेरा डालेंगे गढ़वा के पीड़ित
विकास खंड कौशाम्बी के गढ़वा गांव में यमुना की बाढ़ का पानी रविवार की रात घुसने लगा। गांव के महेश, हीरालाल, सैकू, बचूली के घर में पानी भर जाने से लोगों ने गृहस्थी का सामान छत और टाड़ पर रख दिया है। लेकिन बाढ़ का पानी बढ़ता जा रहा है। ऐसे में पीड़ितों ने अन्यत्र ठिकाने की तलाश शुरू कर दी है। उनका कहना है कि सोमवार की रात पानी नहीं घटा तो वह मंगलवार से बगल के जैन मंदिर में ठिकाना बनाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


30 रुपये वोट चलाने वाले ले रहे किराया
 यमुना नदी की बाढ़ की जद में आए डिहवा, कटैया और मल्हीपुर गांव में आने-जाने के लिए नाव चल रही है। लोगों को जरूरत का सामान लेने के लिए गांव से बाहर जाना पड़ता है। जलभराव के चलते उन्हें नांव की मदद लेनी पड़ती है। ऐसे में नाव चालक ग्रामीणों से मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। वह प्रत्येक व्यक्ति से आने और जाने के लिए 30-30 रुपये लेते हैं। ऐसे में यदि बाढ़ की स्थिति ज्यादा दिन रही तो ग्रामीणों की जेब आने और जाने में ही खाली हो जाएगी।

 यमुना नदी में बाढ़ के चलते अब तक दर्जनभर गांवों की तराई में बोई गई बाजरा, मिर्च, अरहर आदि फसलें जलमग्न हो चुकी हैं। जिन गांवों के किसानों की फसलों का नुकसान हुआ है उसमें कटैया, मल्हीपुर, डिवहा, डांड़ी, बरगदी, हटवा अब्बासपुर समेत दर्जनभर गांव शामिल हैं।

मवेशियों के चारे का संकट
 यमुना की बाढ़ की चपेट में आए गांवों में सबसे बुरा हाल मवेशियों के चारे का है। लोग अपने लिए तो किसी तरह रोटी का जुगाड़ कर ले रहे हैं पर पशुओं को बांधने तक की जगह नहीं है। ऐसे में लोग अपने मवेशियों को गांव के बाहर स्थित बागों में ठहराए हुए हैं। चारे के रूप में मवेशियों को आम और महुवा की पत्ती खिलाने को पशुपालक मजबूर हैं।


बाढ़ प्रभावित गांवों में प्रशासन की नजर है। फसल नुकसान का भी जायजा लिया जा रहा है। अभी ऐसी स्थिति नहीं कि लोगों को दूसरी जगह टिकाया जाए। जरूरत पर हर संभव मदद के लिए प्रशासन तैयार है।
श्रीकृष्ण, एडीएम कौशाम्बी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed