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दोआबा में भी कई ‘निर्भया’ वर्षों से कर रहीं इंसाफ का इंतजार
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दोआबा में भी कई निर्भया वर्षों से कर रहीं इंसाफ का इंतजार
फांसी से कम कुछ भी मंजूर नहीं, महामहिम तक को भेजी चिट्ठी
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। सात साल तीन महीना तीन दिन बाद शुक्रवार सुबह दिल्ली की निर्भया को इंसाफ मिल गया। देश को दहलाने वाली इस घटना और दरिंदों को हुई फांसी की सजा के बीच के लंबे अंतराल ने कानून को लचीला बताने के लिए हर किसी को मजबूर कर दिया। शायद इसी लचीलेपन का परिणाम है कि दोआबा की कई निर्भया भी वर्षों से इंसाफ का इंतजार कर रही हैं। इन्होंने गुनाहगारों को फांसी दिलाने के लिए महामहिम तक को चिट्ठी भेजी है। दृढ़ता के साथ पैरवी करके कुछ दोषियों को उम्रकैद की सजा दिला चुकी हैं, लेकिन इनके लिए काफी नहीं है। किसी भी सूरत पर आरोपियों को फंदे तक पहुंचाने के लिए अदालत का चक्कर लगा रही हैं। उधर दरिंदों के पैरोकार कानूनी दांव-पेंच फंसाकर उन्हें बचाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। पेश हैं जिले की कुछ प्रमुख घटनाएं और उनमें अब तक हुई कार्रवाई...
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इस निर्भया की आत्मा को आखिर कब मिलेगी शांति
चायल। पिपरी कोतवाली क्षेत्र की एक छह वर्षीय लड़की कक्षा एक की छात्रा थी। 10 अप्रैल 2018 को गांव के ही जगदीश पुत्र कल्लू व अरविंद पुत्र रामसिंह ने टॉफी का लालच देकर उसका अपहरण कर लिया था। इसके बाद मखऊपर गांव में नदी किनारे सुनसान स्थान पर ले जाकर दुष्कर्म किया था। फिर गला घोंटकर हत्या कर दी थी। मामले में मृतका के पिता की तहरीर पर दोनों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। तभी से दरिंदे सलाखों के पीछे हैं। अदालत उन्हें उम्रकैद की सजा सुना सकी है। पीड़ित परिवार के लोगों का कहना है कि बेटी का चेहरा उनकी आंखों के सामने से एक पल के लिए भी ओझल नहीं होता है। उनके गुनाहगारों को फांसी की सजा होनी चाहिए। अधिवक्ताओं के माध्यम से इसके लिए अदालत में पैरवी कराई जा रही है।
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सजा हुई, लेकिन फंदे तक नहीं पहुंचा भैरव
मंझनपुर। पइंसा इलाके में रहने वाले भैरव पासी ने दुष्कर्म के बाद वर्ष 2006 मे अपनी मासूम भतीजी की हत्या कर दी थी। जिले की अदालत ने इस क्रूर घटना के लिए उसे फांसी की सजा सुनाई। जनपद में यह फांसी की पहली सजा थी। बचाव के लिए भैरव ने उच्च न्यायालय में अर्जी दाखिल की। उच्च अदालत ने जमानत देने के साथ ही पहले फांसी की सजा पर रोक लगा दी, लेकिन बाद में जिला अदालत की फांसी की सजा को बहाल कर दिया। इसी के बाद से भैरव फरार है। अभी तक उसे फांसी के फंदे तक नहीं पहुंचाया जा सका है। गिरफ्तारी के लिए पुलिस के साथ प्रयागराज की एसटीएफ तक लगी है। कोई भी उसे पकड़ नहीं पा रहा है। मृतका की माता और उसके पिता का कहना है कि हैवान को फांसी की सजा मिलने के बाद ही बेटी की आत्मा को शांति मिलेगी।
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क्या मुझे तड़पने के लिए उसे जिंदा रखा है
सरायअकिल। इलाके की एक किशोरी दो सितंबर 2019 को घास काटने खेतों की ओर गई थी। वहां पड़ोसी गांव के मो. आदिल उर्फ छोटका उर्फ आतंकवादी उसके भाई मो. आकिब उर्फ बड़का व नाजिम पुत्र उवैस उल्ला उसके साथ दुष्कर्म किया था। आरोपियों ने अश्लील वीडियो भी बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था। वीडियो देखने के बाद जिले भर में आक्रोश फैल गया था। कानून व्यवस्था दुरुस्त रखना पुलिस के लिए चुनौती हो गई थी। मामले में हिम्मत का परिचय दिखाते हुए पीड़िता और उसके परिवार के लोगों ने कोर्ट में सख्त पैरवी की। पुलिस ने भी न्यायालय से समन्वय स्थापित किया। 137 दिन बाद अभी पांच फरवरी को कोर्ट ने तीनों दरिंदों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हालांकि पीड़ित लड़की इस फैसले से संतुष्ट नहीं है। उसका कहना है कि दोषियों को फांसी की सजा दिलाने से पहले चैन की नींद नहीं सोएगी। पीड़िता इसके लिए कोर्ट में बराबर पैरवी कर रही है। कचहरी में नामी वकील भी उसने अब कर लिया है। उम्रकैद की सजा पर पीड़िता सवाल उठाते हुए कहती है कि क्या मुझे तड़पाने के लिए उसे जीवित रखा गया है।
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इंसाफ मिला नहीं, जान के पीछे पड़ गया आरोपी
बिजिया चौराहा। कौशाम्बी कोतवाली क्षेत्र की एक नाबालिग लड़की के साथ दो सितंबर 2013 को पड़ोसी युवक ने दुराचार किया था। आरोपी जमानत पर रिहा है। मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रहा है। जेल से छूटते ही दो सितंबर 2015 को आरोपी ने अपने पिता के साथ मिलकर पीड़िता के पिता की हत्या का प्रयास किया था। इससे पहले भी सुलह का दबाव बनाया जा रहा था। जानलेवा हमले का केस भी दर्ज है। पीड़िता का कहना है कि इंसाफ उसे मिला नहीं और आरोपी परिवार की जान का दुश्मन बन गया है। कभी भी जानमाल का नुकसान पहुंचा सकता है। पीड़ित लड़की ने जानमाल की सुरक्षा की गुहार लगाई है।
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फांसी से कम कुछ भी मंजूर नहीं, महामहिम तक को भेजी चिट्ठी
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। सात साल तीन महीना तीन दिन बाद शुक्रवार सुबह दिल्ली की निर्भया को इंसाफ मिल गया। देश को दहलाने वाली इस घटना और दरिंदों को हुई फांसी की सजा के बीच के लंबे अंतराल ने कानून को लचीला बताने के लिए हर किसी को मजबूर कर दिया। शायद इसी लचीलेपन का परिणाम है कि दोआबा की कई निर्भया भी वर्षों से इंसाफ का इंतजार कर रही हैं। इन्होंने गुनाहगारों को फांसी दिलाने के लिए महामहिम तक को चिट्ठी भेजी है। दृढ़ता के साथ पैरवी करके कुछ दोषियों को उम्रकैद की सजा दिला चुकी हैं, लेकिन इनके लिए काफी नहीं है। किसी भी सूरत पर आरोपियों को फंदे तक पहुंचाने के लिए अदालत का चक्कर लगा रही हैं। उधर दरिंदों के पैरोकार कानूनी दांव-पेंच फंसाकर उन्हें बचाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। पेश हैं जिले की कुछ प्रमुख घटनाएं और उनमें अब तक हुई कार्रवाई...
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इस निर्भया की आत्मा को आखिर कब मिलेगी शांति
चायल। पिपरी कोतवाली क्षेत्र की एक छह वर्षीय लड़की कक्षा एक की छात्रा थी। 10 अप्रैल 2018 को गांव के ही जगदीश पुत्र कल्लू व अरविंद पुत्र रामसिंह ने टॉफी का लालच देकर उसका अपहरण कर लिया था। इसके बाद मखऊपर गांव में नदी किनारे सुनसान स्थान पर ले जाकर दुष्कर्म किया था। फिर गला घोंटकर हत्या कर दी थी। मामले में मृतका के पिता की तहरीर पर दोनों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। तभी से दरिंदे सलाखों के पीछे हैं। अदालत उन्हें उम्रकैद की सजा सुना सकी है। पीड़ित परिवार के लोगों का कहना है कि बेटी का चेहरा उनकी आंखों के सामने से एक पल के लिए भी ओझल नहीं होता है। उनके गुनाहगारों को फांसी की सजा होनी चाहिए। अधिवक्ताओं के माध्यम से इसके लिए अदालत में पैरवी कराई जा रही है।
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सजा हुई, लेकिन फंदे तक नहीं पहुंचा भैरव
मंझनपुर। पइंसा इलाके में रहने वाले भैरव पासी ने दुष्कर्म के बाद वर्ष 2006 मे अपनी मासूम भतीजी की हत्या कर दी थी। जिले की अदालत ने इस क्रूर घटना के लिए उसे फांसी की सजा सुनाई। जनपद में यह फांसी की पहली सजा थी। बचाव के लिए भैरव ने उच्च न्यायालय में अर्जी दाखिल की। उच्च अदालत ने जमानत देने के साथ ही पहले फांसी की सजा पर रोक लगा दी, लेकिन बाद में जिला अदालत की फांसी की सजा को बहाल कर दिया। इसी के बाद से भैरव फरार है। अभी तक उसे फांसी के फंदे तक नहीं पहुंचाया जा सका है। गिरफ्तारी के लिए पुलिस के साथ प्रयागराज की एसटीएफ तक लगी है। कोई भी उसे पकड़ नहीं पा रहा है। मृतका की माता और उसके पिता का कहना है कि हैवान को फांसी की सजा मिलने के बाद ही बेटी की आत्मा को शांति मिलेगी।
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क्या मुझे तड़पने के लिए उसे जिंदा रखा है
सरायअकिल। इलाके की एक किशोरी दो सितंबर 2019 को घास काटने खेतों की ओर गई थी। वहां पड़ोसी गांव के मो. आदिल उर्फ छोटका उर्फ आतंकवादी उसके भाई मो. आकिब उर्फ बड़का व नाजिम पुत्र उवैस उल्ला उसके साथ दुष्कर्म किया था। आरोपियों ने अश्लील वीडियो भी बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था। वीडियो देखने के बाद जिले भर में आक्रोश फैल गया था। कानून व्यवस्था दुरुस्त रखना पुलिस के लिए चुनौती हो गई थी। मामले में हिम्मत का परिचय दिखाते हुए पीड़िता और उसके परिवार के लोगों ने कोर्ट में सख्त पैरवी की। पुलिस ने भी न्यायालय से समन्वय स्थापित किया। 137 दिन बाद अभी पांच फरवरी को कोर्ट ने तीनों दरिंदों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हालांकि पीड़ित लड़की इस फैसले से संतुष्ट नहीं है। उसका कहना है कि दोषियों को फांसी की सजा दिलाने से पहले चैन की नींद नहीं सोएगी। पीड़िता इसके लिए कोर्ट में बराबर पैरवी कर रही है। कचहरी में नामी वकील भी उसने अब कर लिया है। उम्रकैद की सजा पर पीड़िता सवाल उठाते हुए कहती है कि क्या मुझे तड़पाने के लिए उसे जीवित रखा गया है।
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इंसाफ मिला नहीं, जान के पीछे पड़ गया आरोपी
बिजिया चौराहा। कौशाम्बी कोतवाली क्षेत्र की एक नाबालिग लड़की के साथ दो सितंबर 2013 को पड़ोसी युवक ने दुराचार किया था। आरोपी जमानत पर रिहा है। मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रहा है। जेल से छूटते ही दो सितंबर 2015 को आरोपी ने अपने पिता के साथ मिलकर पीड़िता के पिता की हत्या का प्रयास किया था। इससे पहले भी सुलह का दबाव बनाया जा रहा था। जानलेवा हमले का केस भी दर्ज है। पीड़िता का कहना है कि इंसाफ उसे मिला नहीं और आरोपी परिवार की जान का दुश्मन बन गया है। कभी भी जानमाल का नुकसान पहुंचा सकता है। पीड़ित लड़की ने जानमाल की सुरक्षा की गुहार लगाई है।