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दारानगर का कुप्पी युद्ध देखने को उमड़े दर्शक
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Viewers gathered to see the kuppi war in Daranagar
- फोटो : KAUSHAMBI
दारानगर का कुप्पी युद्ध देखने को उमड़े दर्शक
प्रभु श्रीराम द्वारा रावण का वध करते ही मैदान जयकारों से गूंज उठा
कड़ा। दारानगर में 240 वां कुप्पी युद्ध हुआ। पहले दिन यानी मंगलवार को मेघनाद-लक्ष्मण तो दूसरे दिन राम-रावण के बीच युद्ध हुआ। दो दिन में सात बार हुए बेहद रोमांचकारी कुप्पी युद्ध का नजारा देखने के लिए हजारों की भीड़ डटी रही। प्रभु श्रीराम द्वारा अहंकारी रावण का वध करते ही समूचा युद्ध मैदान प्रभु राम के जयकारों से गूंज उठा।
240 वर्ष पुरानी दारानगर की 12 दिवसीय रामलीला वाराणसी के रामनगर की रामलीला के तर्ज पर होती है। मंच की जगह दारानगर व आसपास के गांवों में पूर्व निर्धारित स्थलों पर 12 दिन तक रामलीलाएं की गईं। रामलीला की सबसे बड़ी खासियत दो दिवसीय कुप्पी युद्ध रहा। म्योहरा गांव में इसके लिए युद्ध का मैदान सजाया गया। पूरे परिसर को बैरिकेटिंग की गई। विजयदशी और एकादशी को राम-रावण की सेनाओं के बीच रोमांचक कुप्पी युद्ध हुआ। काले कपड़े में रावण दल के 25 तथा लाल रंग के वस्त्र में राम दल के 25 सेनानी प्लास्टिक की कुप्पी लेकर युद्ध के मैदान में उतरे। पहले दिन यानी मंगलवार को चार चरणों में लड़ाई हुई। परंपरा के मुताबिक पहले दिन की चारों लड़ाई में रावण की सेना श्री राम की सेना पर भारी पड़ी। जबकि, दूसरे दिन यानी बुधवार को तीन लड़ाई हुई। तीनो लड़ाई जीत कर राम की सेना विजई हुई। रावण का वध होते ही समूचा युद्ध मैदान राजाराम चंद्र की जय के उद्घोष से गूंज उठा। युद्ध इतना रोमांचक हुआ कि देखने वालो के रोंगटे खड़े हो गए। कुप्पी युद्ध देखने के लिए विधायक सिराथू शीतला प्रसाद पटेल समेत दूरदराज के दर्शक बड़ी संख्या में डटे रहे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन की ओर से एसडीएम सिराथू राजेश श्रीवास्तव, सीओ सिराथू रामवीर सिंह सर्किल के सभी थानों की फोर्स के साथ मौजूद रहे।
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प्रभु श्रीराम द्वारा रावण का वध करते ही मैदान जयकारों से गूंज उठा
कड़ा। दारानगर में 240 वां कुप्पी युद्ध हुआ। पहले दिन यानी मंगलवार को मेघनाद-लक्ष्मण तो दूसरे दिन राम-रावण के बीच युद्ध हुआ। दो दिन में सात बार हुए बेहद रोमांचकारी कुप्पी युद्ध का नजारा देखने के लिए हजारों की भीड़ डटी रही। प्रभु श्रीराम द्वारा अहंकारी रावण का वध करते ही समूचा युद्ध मैदान प्रभु राम के जयकारों से गूंज उठा।
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240 वर्ष पुरानी दारानगर की 12 दिवसीय रामलीला वाराणसी के रामनगर की रामलीला के तर्ज पर होती है। मंच की जगह दारानगर व आसपास के गांवों में पूर्व निर्धारित स्थलों पर 12 दिन तक रामलीलाएं की गईं। रामलीला की सबसे बड़ी खासियत दो दिवसीय कुप्पी युद्ध रहा। म्योहरा गांव में इसके लिए युद्ध का मैदान सजाया गया। पूरे परिसर को बैरिकेटिंग की गई। विजयदशी और एकादशी को राम-रावण की सेनाओं के बीच रोमांचक कुप्पी युद्ध हुआ। काले कपड़े में रावण दल के 25 तथा लाल रंग के वस्त्र में राम दल के 25 सेनानी प्लास्टिक की कुप्पी लेकर युद्ध के मैदान में उतरे। पहले दिन यानी मंगलवार को चार चरणों में लड़ाई हुई। परंपरा के मुताबिक पहले दिन की चारों लड़ाई में रावण की सेना श्री राम की सेना पर भारी पड़ी। जबकि, दूसरे दिन यानी बुधवार को तीन लड़ाई हुई। तीनो लड़ाई जीत कर राम की सेना विजई हुई। रावण का वध होते ही समूचा युद्ध मैदान राजाराम चंद्र की जय के उद्घोष से गूंज उठा। युद्ध इतना रोमांचक हुआ कि देखने वालो के रोंगटे खड़े हो गए। कुप्पी युद्ध देखने के लिए विधायक सिराथू शीतला प्रसाद पटेल समेत दूरदराज के दर्शक बड़ी संख्या में डटे रहे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन की ओर से एसडीएम सिराथू राजेश श्रीवास्तव, सीओ सिराथू रामवीर सिंह सर्किल के सभी थानों की फोर्स के साथ मौजूद रहे।
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