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बेमौसम बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त

Mon, 02 Mar 2015 12:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी Updated Mon, 02 Mar 2015 12:40 AM IST
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Unseasonable rain disrupted
मंझनपुर। कौशाम्बी में बेमौसम बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। शनिवार की रात झमाझम हुई बरसात रविवार को भी सारा दिन जारी रही। इससे फागुन में सावन सरीखा मौसम बना हुआ है। दो दिनों से हो रही बरसात से लोगों को घर से निकलना मुश्किल हुआ है। गांव और कस्बों में जलनिकासी और सफाई व्यवस्था की कलई खुल गई। कचरे से नालियां पटी होने के कारण सड़क और गलियों में जलजमाव है। इससे लोगों को कीचड़-पानी से होकर आना-जाना पड़ा।
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द्वाबा में महीनेभर से मौसम का मिजाज उतार-चढ़ाव भरा है। 15 दिनों तक तीखी धूप चटकने के बाद शनिवार को अचानक फिर मौसम ने करवट ले ली। पछुआ हवा के साथ आए बादलों ने आसमान में डेरा जमा लिया। रात 11 बजे तेज गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने लगी। शनिवार को रातभर हुई बारिश का सिलसिला रविवार को भी दिनभर बना रहा। दिनभर रिमझिम फुहारें पड़ती रही। इससे लोगों का घरों से निकलना मुश्किल रहा।
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वहीं शनिवार की रात और रविवार को दिनभर हुई बरसात के कारण मंझनपुर, भरवारी, सिराथू, अजुहा, मूरतगंज, चायल, सरायअकिल, कड़ा, देवीगंज, शमशाबाद समेत ज्यादातर कस्बे और गांवों की गलियों और रास्तों में जलजमाव हो गया। सड़क पर जलजमाव की यह स्थित नालियों की सफाई नहीं होने के कारण रही। कचरे से पटी नालियों से पानी की निकासी नहीं होने से बारिश का सारा पानी गांवों के रास्तों में ही भरा हुआ है। उधर, सड़क पर कीचड़-पानी होने के कारण लोगों को आने-जाने में परेशानी झेलनी पड़ी। सड़क पर कीचड़ के कारण ऐसी फिसलन रही। जिससे लोग फिसलकर गिरते भी रहे।
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किसानों के लिए रबी सीजन में मौसम दुश्मन बना हुआ है। दो महीने से बार-बार बेमौसम बारिश हो रही है। इससे जहां शुरूआत में बारिश के पानी में डूबने से आलू की फसल बर्बाद हुई थी। वहीं शनिवार और रविवार को हुई बरसात ने सरसों, मसूर, चना, मटर, अरहर जैसी तिलहन, दलहन की फसल का सत्यानाश किया है। बता दें कि जिले में 8370 हेक्टेयर चना, 1020 हेक्टेयर मटर, 1828 हेक्टेयर सरसों की खेती का रकबा है।

कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार ने बताया कि इस बारिश ने चना-मटर और सरसों की खेती को करीब 20-25 प्रतिशत नुकसान पहुंचाया। वहीं फूलदशा में रही 10 फीसदी अरहर की फसलों को भी नुकसान होने की संभावना है। बताया कि फूल और फली दशा में रही फसलें हवा के साथ हुई बारिश से गिर गई हैं। इससे दाने कमजोर होंगे। इससे पैदावार में भी कमी आएंगी। वहीं बार-बार हो रही बेमौसम बारिश के कारण किसान परेशान हैं। किसानों का मानना है कि ऐसी ही लगातार बारिश और हवा चलती रही, तो चना, मटर, आलू, सरसों, अरहर की तरह गेंहू की भी फसल का सत्यानाश होना पक्का है।

मौसम में हो रहे लगातार बदलाव के कारण पहले से ही घर-घर बुखार, जुकाम, खांसी का कहर बना हुआ है। 15 दिनों से अकेले जिला अस्पताल की ओपीडी में ही रोजाना बुखार के ही करीब 400 से 450 मरीज आ रहे हैं। वहीं इस बेमौसम बारिश के थमने के बाद वायरल फीवर, वायरल संक्रमण के साथ ही खांसी, सर्दी, जुकाम, चिकनपाक्स का भी कहर टूट सकता है। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. एके कनौजिया ने बताया कि मौसम में बार-बार आ रहा उतार-चढ़ाव सेहत के लिए खतरे की घंटी है।


लोगों को सचेत रहने की जरूरत है। बताया कि बारिश के बाद मौसम कुछ दिनों तक नम बना रहेगा। इससे लोग संक्रमण के शिकार हो सकते हैं। साथ ही गंदगी के कारण मच्छरों का भी प्रकोप बढ़ेगा। सलाह दी कि लोग गरम पानी ठंडा करके उसे इस्तेमाल करें। कटे, सड़े फल, ठेलों पर चाट आदि खाने से परहेज करें। ताजा खाना ही खाएं। साथ ही सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग भी जरूरी है। वहीं खुद की सफाई के साथ कपड़े, बिस्तर आदि की भी स्वच्छता सबसे अहम है।
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