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Kaushambi News: दो तिहाई शिक्षकों के पद खाली, कहां से मिल जाती मेडिकल कॉलेज को मान्यता

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jul 2024 04:04 AM IST
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Two-thirds of teachers' posts are vacant, from where would the medical college get recognition?
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) से मेडिकल कॉलेज को मान्यता नहीं मिलने की दो प्रमुख वजहें रहीं। पहली, फैकल्टी। यहां प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के 80 पदों में से सिर्फ 28 ही भरे जा सके हैं। दूसरी है, भवन संबंधी अधूरे काम। शासन ने यहां 2023 से ही पढ़ाई का लक्ष्य रखा था, लेकिन एक साल बाद भी तैयारी आधी-अधूरी ही है। अब 15 दिन की मिली मोहलत में कमियां दूर करने की तैयारी है।
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जिला मुख्यालय में करीब 270 करोड़ की लागत से मेडिकल कॉलेज का निर्माण हो रहा है। इसके अस्पताल का भवन संयुक्त जिला चिकित्सालय परिसर में बन रहा है। जबकि, शैक्षणिक भवन, हॉस्टल, प्रोफेसर व अन्य कर्मचारियों के आवास आदि का निर्माण कादीपुर में कराया जा रहा है। निर्माण 2021 में शुरू हुआ था। शासन ने वर्ष 2023 में यहां पढ़ाई शुरू करने की योजना बनाई थी। लेकिन, भवन ही पूरा नहीं हो सका।
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एक साल देरी के बाद शासन ने वर्ष 2024-25 के शिक्षण शुरू करने की कोशिश की, लेकिन मानकों का पालन नहीं होने से एनएमसी ने झटका दे दिया। पहले साल यहां 100 सीटों पर दाखिले की योजना है। इन्हें चिकित्सा शिक्षा देने के लिए 17 प्रोफेसर, 23 एसोसिएट प्रोफेसर और 40 असिस्टेंट प्रोफेसरों की दरकार है। शासन पिछले साल अप्रैल में ही संयुक्त जिला चिकित्सालय को मेडिकल कॉलेज का दर्जा दे चुका है।
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इसके बाद सितंबर से एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती शुरू की गई। नवंबर से नियुक्तियां भी होने लगीं। नए मेडिकल कॉलेजों में पहली नियुक्तियां होने के कारण छह दिसंबर-23 को कलक्ट्रेट में कार्यक्रम आयोजित कर तीन एसोसिएट और 11 असिस्टेंट प्रोफेसरों को तत्कालीन डीएम सुजीत कुमार के हाथों नियुक्ति पत्र दिलवाया गया था। भर्तियों का सिलसिला आगे भी चला, लेकिन रफ्तार बेहद सुस्त रही।
अभी तक सिर्फ दो प्रोफेसर, चार एसोसिएट प्रोफेसर और 22 असिस्टेंट प्रोफेसर की ही नियुक्ति हो पाई है। अभी प्रोफेसर के 15, एसोसिएट प्रोफेसर के 19 और असिस्टेंट प्रोफेसर 18 पद रिक्त हैं। फैकल्टी के रिक्त पदों के कारण ही एनएमसी ने मेडिकल कॉलेज को मान्यता देने से मना कर दिया है। हालांकि, एनएमसी ने 15 दिन की मोहलत कॉलेज प्रशासन को दी है। प्रशासन अब रिक्त पदों को भरकर अपील की तैयारी में जुट गया है।
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कॉलेज भवन का छह फीसदी काम अब भी अधूरा

शासन की शीर्ष प्राथमिकता होकर भी कॉलेज भवन का छह फीसदी काम अब भी अधूरा है। इसके भवन के निर्माण की जिम्मेदारी वेस्कॉन इंजीनियर्स लिमिटेड कंपनी को दी गई है। कंपनी को वर्ष 2022 तक ही काम पूरा करना था, लेकिन सुस्ती के चलते काम पिछड़ता चला गया। अभी तक कॉलेज भवन का 94 फीसदी काम ही पूरा हो पाया है। इलेक्ट्रिक व फॉल सीलिंग के काम के साथ एक ओर की चहारदीवारी बनाने, जमीन का समतलीकरण करके उसमें घास लगाने और परिसर में पौधरोपण का काम बाकी है।

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मेडिकल कॉलेज को मान्यता नहीं मिलने की मूल वजह फैकल्टी के रिक्त पद हैं। कुछ निर्माण भी अधूरे हैं। एनएमसी ने मानकों को पूरा करने के लिए 15 दिन का वक्त दिया है। रिक्त पदों पर नियुक्तियों के लिए आवेदन और साक्षात्कार लिए जा रहे हैं। निर्धारित समय में कमियां दूर करके मान्यता के लिए अपील करेंगे।
डॉ. एचके सिंह, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज कौशाम्बी
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