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कौशांबी : दुष्कर्म पीड़िता की मुश्किलें बढ़ीं, मेडिकल बोर्ड ने गर्भपात करने से खड़े किए हाथ

Wed, 09 Nov 2022 07:34 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी
अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 09 Nov 2022 07:34 PM IST
सार

चरवा कोतवाली इलाके के एक गांव में 13 साल की किशोरी के साथ रिश्ते में चाचा लगने वाले युवक ने ही दुष्कर्म किया था। किसी से शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी। डर के कारण किशोरी ने यह बात परिवार के लोगों से छिपाए रखी।

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troubles of the rape victim increased, the medical board raised its hands for abortion
गर्भवती (सांकेतिक चित्र)। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिंदी फीचर फिल्म क्या कहना में बिन ब्याही मां बनीं प्रीती जिंटा को तो परिवार का सहारा मिल गया था, लेकिन चरवा इलाके की दुष्कर्म पीड़िता प्रीती (काल्पनिक नाम) की जिंदगी मझधार में फंस गई है। बेटी की हालत बिगड़ते देख बेबस पिता बिलखने के लिए मजबूर है। पिता की फरियाद पर कोर्ट ने सीएमओ को मेडिकल बोर्ड गठित कर गर्भपात कराने का आदेश दिया था, लेकिन 27 सप्ताह का गर्भ होने के कारण डॉक्टर इसके पक्ष में नहीं हैं। गर्भपात से पीड़िता और उसके पेट में पल रहे बच्चे दोनों की जान जाने का खतरा है। ऐसे में डॉक्टर इसके लिए तैयार नहीं हो रहे। 

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चरवा कोतवाली इलाके के एक गांव में 13 साल की किशोरी के साथ रिश्ते में चाचा लगने वाले युवक ने ही दुष्कर्म किया था। किसी से शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी। डर के कारण किशोरी ने यह बात परिवार के लोगों से छिपाए रखी। बीते अगस्त महीने में उसे पेट दर्द की शिकायत हुई। इस पर पिता इलाज के लिए अस्पताल ले गया। परीक्षण के दौरान पता चला कि किशोरी गर्भवती है। घरवालों के पूछताछ करने पर उसने आपबीती सुनाई। इस पर पुलिस से शिकायत की गई। काफी जद्दोजहद के बाद पुलिस ने रिपोर्ट लिखकर आरोपी शिवमूरत को गिरफ्तार कर जेल भेजा।  

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इसके बाद किशोरी के पिता ने गर्भपात कराने के लिए कोर्ट ने प्रार्थना पत्र दिया। 16 दिन पहले कोर्ट ने सीएमओ को आदेश दिया कि मेडिकल बोर्ड गठित कर किशोरी का गर्भपात कराया जाए। किशोरी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। अब तक उसका गर्भपात नहीं हो सका है। सीएमओ डॉ. सुष्पेंद्र का कहना है मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट अदालत को भेज दी है। अब अदालत के अग्रिम आदेश के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने रिपोर्ट के बारे में कुछ भी बताने से मना कर दिया। हालांकि सूत्रों का कहना है कि 27 माह का गर्भ होने के कारण डॉक्टर गर्भपात करने के पक्ष में नहीं हैं।  डॉक्टरों का मानना है कि इससे किशोरी और उसके पेट में पल रहे बच्चे की मौत हो सकती है।

साहब ! बिन ब्याही बेटी है, क्या करेंगे बच्चा
दुष्कर्म पीड़िता के पिता का कहना है अगर बच्चा पैदा हो गया तो बेटी से शादी कौन करेगा। इसीलिए उसने कोर्ट में अर्जी देकर गर्भपात कराने की अनुमति मांगी थी। 16 दिन बीत जाने के बाद भी अब तक बेटी का गर्भपात नहीं कराया गया। जिला अस्पताल में भी बेटी का कोई इलाज नहीं हो रहा। कुछ पूछने पर चिकित्सक झिड़ककर भगा देते हैं। आखिर हम लोग क्या करें ? कुछ समझ में नहीं आ रहा। उधर, घटना की शिकार किशोरी भी बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती। पिता के मुताबिक, अक्सर वह जान देने की जिद करती रहती है।


दुष्कर्म पीड़िता को करीब 27 सप्ताह का गर्भ है। जिला अस्पताल की चिकित्सक डॉ. तौहीदा व डॉ. रेखा यादव उसका इलाज कर रही हैं। जरूरी दवाएं दी जा रही हैं। गर्भपात को लेकर सीएमओ की तरफ से कोर्ट में मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट भेज दी गई है। आगे जो भी फैसला होगा, उस हिसाब से कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, इस स्थित में गर्भपात कराना मुश्किल भरा हो सकता है। - डॉ. दीपक सेठ, सीएमएस

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