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नहीं बदला जा रहा ट्रांसफार्मर
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Tue, 09 Aug 2016 12:27 AM IST
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विकास खंड कौशाम्बी के दो गांवों का ट्रांसफार्मर फुंकने के दो माह बाद भी नहीं बदला जा सका है। मजबूरी में उपभोक्ताओं को रात के अंधेरे में जीवन यापन करना पड़ रहा है। ऐसे में अब उपभोक्ताओं में सवाल उठने लगा है कि आखिर 72 घंटे में ट्रांसफार्मर बदले जाने का सपा सरकार का दावा कहां गया।
सूबे की सपा सरकार ने गांवों, सरकारी नलकूपों के फुंके ट्रांसफार्मरों को 72 घंटे के भीतर बदले जाने का आदेश विभागीय जिम्मेदारों को दे रखा है। इसमें कोताही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई भी की जानी है लेकिन दोआबा में सपा सरकार के आदेश की गांव-गांव चर्चा हो रही है। गांवों में ट्रांसफार्मर फुंकने के बाद उपभोक्ताओं को महीनों जेई, वर्कशॉप और स्टोर का चक्कर काटना पड़ता है। बानगी के तौर कौशाम्बी ब्लॉक के सोंधिया और जोगापुर गांव को लिया जा सकता है। इन दोनाें गांवों में लगे 25-25 केवीए के ट्रांसफार्मर दो माह से फुंके हैं। इन ट्रांसफार्मरों को बदलना तो दूर पोल से उतारकर मरम्मत के लिए भी नहीं भेजवाया गया। ऐसे में अब ग्रामीण उपभोक्ताओं को मुख्यमंत्री का दावा याद आने लगा है।
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सूबे की सपा सरकार ने गांवों, सरकारी नलकूपों के फुंके ट्रांसफार्मरों को 72 घंटे के भीतर बदले जाने का आदेश विभागीय जिम्मेदारों को दे रखा है। इसमें कोताही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई भी की जानी है लेकिन दोआबा में सपा सरकार के आदेश की गांव-गांव चर्चा हो रही है। गांवों में ट्रांसफार्मर फुंकने के बाद उपभोक्ताओं को महीनों जेई, वर्कशॉप और स्टोर का चक्कर काटना पड़ता है। बानगी के तौर कौशाम्बी ब्लॉक के सोंधिया और जोगापुर गांव को लिया जा सकता है। इन दोनाें गांवों में लगे 25-25 केवीए के ट्रांसफार्मर दो माह से फुंके हैं। इन ट्रांसफार्मरों को बदलना तो दूर पोल से उतारकर मरम्मत के लिए भी नहीं भेजवाया गया। ऐसे में अब ग्रामीण उपभोक्ताओं को मुख्यमंत्री का दावा याद आने लगा है।
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