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तीन सीओ, 15 थानेदार भी नहीं पकड़े सके वांक्षित सदस्य शेर मोहम्मद
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जिला पंचायत के वार्ड नंबर सात से निर्वाचित सदस्य शेर मोहम्मद उर्फ शेरू को तीन सीओ, 15 थानेदार व तीन प्लाटून पीएसी की भारी भरकम टीम भी मिलकर पकड़ नहीं सकी। लग्जरी गाड़ी से शेरू वोट डालने के लिए कलक्ट्रेट आया और मताधिकार का प्रयोग कर आराम से घर चला गया। यह वही शेरू हैं जिन्हें सैनी कोतवाली पुलिस ने करीब 20 साल पहले दर्ज धोखाधड़ी के मामले में फरार बताया था। साथ ही शेरू की गिरफ्तारी के लिए सैनी कोतवाली पुलिस ने उसके घर में दबिश भी डाली थी।
सैनी कोतवाली के सयारा गांव निवासी शेर मोहम्मद उर्फ शेरू वार्ड नंबर सात से निर्वाचित सदस्य है। चर्चा रही कि शेरू सपा के साथ है। इस बीच एक नया मोड़ आया। सैनी कोतवाली में वर्ष 2000 में एक धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में जांच में शेरू का नाम प्रकाश में आया। सैनी पुलिस ने शेरू के घर पर कई मर्तबा दबिश दी, लेकिन वह पकड़ा नहीं जा सका। खुद सैनी इंस्पेक्टर तेज बहादुर सिंह ने बयान दिया था कि शेरू वांछित है।
इसलिए परिजनों को उसे कोतवाली भेजने के लिए कहा गया था। दबिश की बात भी स्वीकार की गई थी। अब बदले घटनाक्रम में शनिवार को शेर मोहम्मद मतदान के लिए कलक्ट्रेट पहुंचा। कलक्ट्रेट के मेन गेट पर उसने पुलिस और प्रशासन के अफसरों को अपना आधार कार्ड और निर्वाचन का प्रमाण पत्र दिखाया और मतदान के लिए चला गया।
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वोट डालने के बाद वह आराम से घर चला गया। इस दौरान सबसे हैरानी वाली बात यह रही कि जिस शेरू की तलाश पुलिस को शिद्दत से थी वह सुरक्षा ड्यूटी में रहे तीन सीओ, 15 थानेदार (जिले के बाहर के भी शामिल थे), तीन प्लाटून पीएसी और 125 पुलिस कर्मियों की निगाह से कैसे बचकर निकल गया? पुलिस उसे इतने अभिलेख दिखाने के बाद भी पहचान नहीं सकी या फिर पहचान नहीं कर पाने का नाटक कर उसे आसानी से जाने दिया।
मतदान करने की हिम्मत नहीं दिखा सका आरसी जाफरी
वार्ड संख्या दो से निर्वाचित सामूहिक मामले का आरोपी मतदान करने की हिम्मत नहीं जुटा सका। चर्चा रही कि आरसी जाफरी सपा कार्यालय में है और मतदान के अंतिम क्षणों में वोट डाल सकता है। यह बात दीगर है कि वह सपा या भाजपा में किसे वोट करेगा इस पर सभी की निगाह लगी थी। लेकिन आरसी जाफरी वोट डालने नहीं आया। वहीं चर्चा रही कि आरसी जाफरी का प्रमाण पत्र सपा प्रत्याशी के पास था लेकिन सामूहिक दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज होने के बाद वह अंदर से टूट गया। इस वजह से उसने खुद को मतदान प्रक्रिया से अलग रखने में ही भलाई समझी।
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सैनी कोतवाली के सयारा गांव निवासी शेर मोहम्मद उर्फ शेरू वार्ड नंबर सात से निर्वाचित सदस्य है। चर्चा रही कि शेरू सपा के साथ है। इस बीच एक नया मोड़ आया। सैनी कोतवाली में वर्ष 2000 में एक धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में जांच में शेरू का नाम प्रकाश में आया। सैनी पुलिस ने शेरू के घर पर कई मर्तबा दबिश दी, लेकिन वह पकड़ा नहीं जा सका। खुद सैनी इंस्पेक्टर तेज बहादुर सिंह ने बयान दिया था कि शेरू वांछित है।
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इसलिए परिजनों को उसे कोतवाली भेजने के लिए कहा गया था। दबिश की बात भी स्वीकार की गई थी। अब बदले घटनाक्रम में शनिवार को शेर मोहम्मद मतदान के लिए कलक्ट्रेट पहुंचा। कलक्ट्रेट के मेन गेट पर उसने पुलिस और प्रशासन के अफसरों को अपना आधार कार्ड और निर्वाचन का प्रमाण पत्र दिखाया और मतदान के लिए चला गया।
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वोट डालने के बाद वह आराम से घर चला गया। इस दौरान सबसे हैरानी वाली बात यह रही कि जिस शेरू की तलाश पुलिस को शिद्दत से थी वह सुरक्षा ड्यूटी में रहे तीन सीओ, 15 थानेदार (जिले के बाहर के भी शामिल थे), तीन प्लाटून पीएसी और 125 पुलिस कर्मियों की निगाह से कैसे बचकर निकल गया? पुलिस उसे इतने अभिलेख दिखाने के बाद भी पहचान नहीं सकी या फिर पहचान नहीं कर पाने का नाटक कर उसे आसानी से जाने दिया।
मतदान करने की हिम्मत नहीं दिखा सका आरसी जाफरी
वार्ड संख्या दो से निर्वाचित सामूहिक मामले का आरोपी मतदान करने की हिम्मत नहीं जुटा सका। चर्चा रही कि आरसी जाफरी सपा कार्यालय में है और मतदान के अंतिम क्षणों में वोट डाल सकता है। यह बात दीगर है कि वह सपा या भाजपा में किसे वोट करेगा इस पर सभी की निगाह लगी थी। लेकिन आरसी जाफरी वोट डालने नहीं आया। वहीं चर्चा रही कि आरसी जाफरी का प्रमाण पत्र सपा प्रत्याशी के पास था लेकिन सामूहिक दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज होने के बाद वह अंदर से टूट गया। इस वजह से उसने खुद को मतदान प्रक्रिया से अलग रखने में ही भलाई समझी।