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कौशाम्बी : चिल्ड्रेन बैंक के जाली नोट के साथ तीन बदमाश गिरफ्तार, चार लाख के फर्जी नोट बरामद
Sat, 02 Oct 2021 07:16 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी
अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 02 Oct 2021 07:16 PM IST
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Kaushambi : कौशाम्बी में जाली नोट के साथ पकड़े गए आरोपी।
- फोटो : Kaushambi
एसओजी के एक खास ऑपरेशन ने जिला पुलिस की खासी किरकिरी कराई। पुलिस का दावा था कि नकली नोट के कारोबार की सूचना पर सैनी के दिलावलपुर मोड़ से तीन बदमाशों को पकड़ा गया। उनके पास जो नोट मिली वह चिल्ड्रेन बैंक ऑफ इंडिया (नकली) की निकली। एसओजी गिरोह की तह तक पहुंचना चाह रही थी, इस बीच खबर सोशल मीडिया वायरल हो गई। कहा गया कि आतंकियों को फंडिंग करने वाले गिरोह में इन्हीं सदस्यों का हाथ है। पुलिस भी शुक्रवार से सैनी कोतवाली में आरोपियों को रखकर अपनी पीठ थपथपा रही थी।
शनिवार दोपहर में पुलिस ऑफिस में घटना के खुलासे को लेकर प्रेसवार्ता हुई। जिसमें एएसपी समर बहादुर ने बताया कि सूचना नकली नोट सप्लाई करने वाले गिरोह की मिली थी। लेकिन, मीडिया में मामला आ जाने के कारण सरगना सतर्क हो गया और भाग निकला। तीन लोग पकड़े गए हैं जिनकी पहचान फतेहपुर जिले के हथिगवां इलाके के मलाका निवासी शमीम, किल्हानापुर निवासी रमाकांत व रोहित मिश्रा के रूप में की गई है।
इन लोगों के पास से दो बाइक, दो हजार रुपये के चिल्ड्रेन बैंक की एक गड्डी, पांच सौ के नोट की चार गड्डी, 100 सौ रुपये के तीन असली नोट जिन्हें कैस्टोफिन टैबलेट लगाकर असली जैसा किया जाता था। तीन मोबाइल फोन, एक तमंचा-कातूस और एक पत्ता कैस्टोफीन टैबलेट बराबद की गई है। एएसपी ने बताया कि विंग के प्रभारी सिद्धार्थ सिंह, राजेंद्र प्रसाद, सुरेंद्र सिंह, विजय सिंह यादव, प्रमोद कुमार, मनोज कुमार, सरताज, मनीष कुमार शामिल रहे। गिरोह के दो सदस्य फरार है, जल्द ही उनकी गिरफ्तारी के बाद पूरे मामले का खुलासा होगा।
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बैंक के समीप ग्राहकों को बनाते थे निशाना
एसओजी प्रभारी सिद्धार्थ सिंह का कहना है कि गिरोह के सदस्य बैंक के आसपास सक्रिय रहते थे। खासतौर पर इनके निशाने पर वह ग्रामीण इलाके का बैंक होते थे जहां सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे होते थे। वहां बिड्राल भरने के बहाने उसका पैसा निकलवाते, फिर उसे नकली नोट की गड्डी थमाकर भाग निकलते थे।
खांसी में काम आती है कैस्टोफिन
पकड़े गए बदमाशों के पास से कैस्टोफिन टैबलेट का पत्ता बरामबद हुआ है। पूछताछ के दौरान बदमाशों ने बताया कि इस दवा का इस्तेमाल व नकली नोट का रंग चटख करने में किया करते थे। अक्सर यह नोट पेट्रोल पंप, शराब के ठेके का सट्टे में लगाई जाती थी। इस वजह से किसी को शक नहीं जाता था।
गाजियाबाद कांड से तार जोड़ रही है पुलिस
जिले में पकड़े गए कथित नकली नोट के बाबत पुलिस को सूचनी मिली थी कि गाजियाबाद मदरसा कांड में जिले के रास्ते ही फंडिंग कराई कराई गई। खुफिया रिपोर्ट के आधार पर एसपी राधेश्याम ने एसओजी को सक्रिय भी किया। इससे पहले मामला कोखराज कोतवाली से लीक हो गया। सोशल मीडिया में खबरें आने के बाद पुलिस को मजबूरी में पकड़े गए तीन लोगों को जाली नोट के साथ गिरफ्तारी दिखाकर जेल भेजना पड़ा।
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शनिवार दोपहर में पुलिस ऑफिस में घटना के खुलासे को लेकर प्रेसवार्ता हुई। जिसमें एएसपी समर बहादुर ने बताया कि सूचना नकली नोट सप्लाई करने वाले गिरोह की मिली थी। लेकिन, मीडिया में मामला आ जाने के कारण सरगना सतर्क हो गया और भाग निकला। तीन लोग पकड़े गए हैं जिनकी पहचान फतेहपुर जिले के हथिगवां इलाके के मलाका निवासी शमीम, किल्हानापुर निवासी रमाकांत व रोहित मिश्रा के रूप में की गई है।
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इन लोगों के पास से दो बाइक, दो हजार रुपये के चिल्ड्रेन बैंक की एक गड्डी, पांच सौ के नोट की चार गड्डी, 100 सौ रुपये के तीन असली नोट जिन्हें कैस्टोफिन टैबलेट लगाकर असली जैसा किया जाता था। तीन मोबाइल फोन, एक तमंचा-कातूस और एक पत्ता कैस्टोफीन टैबलेट बराबद की गई है। एएसपी ने बताया कि विंग के प्रभारी सिद्धार्थ सिंह, राजेंद्र प्रसाद, सुरेंद्र सिंह, विजय सिंह यादव, प्रमोद कुमार, मनोज कुमार, सरताज, मनीष कुमार शामिल रहे। गिरोह के दो सदस्य फरार है, जल्द ही उनकी गिरफ्तारी के बाद पूरे मामले का खुलासा होगा।
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बैंक के समीप ग्राहकों को बनाते थे निशाना
एसओजी प्रभारी सिद्धार्थ सिंह का कहना है कि गिरोह के सदस्य बैंक के आसपास सक्रिय रहते थे। खासतौर पर इनके निशाने पर वह ग्रामीण इलाके का बैंक होते थे जहां सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे होते थे। वहां बिड्राल भरने के बहाने उसका पैसा निकलवाते, फिर उसे नकली नोट की गड्डी थमाकर भाग निकलते थे।
खांसी में काम आती है कैस्टोफिन
पकड़े गए बदमाशों के पास से कैस्टोफिन टैबलेट का पत्ता बरामबद हुआ है। पूछताछ के दौरान बदमाशों ने बताया कि इस दवा का इस्तेमाल व नकली नोट का रंग चटख करने में किया करते थे। अक्सर यह नोट पेट्रोल पंप, शराब के ठेके का सट्टे में लगाई जाती थी। इस वजह से किसी को शक नहीं जाता था।
गाजियाबाद कांड से तार जोड़ रही है पुलिस
जिले में पकड़े गए कथित नकली नोट के बाबत पुलिस को सूचनी मिली थी कि गाजियाबाद मदरसा कांड में जिले के रास्ते ही फंडिंग कराई कराई गई। खुफिया रिपोर्ट के आधार पर एसपी राधेश्याम ने एसओजी को सक्रिय भी किया। इससे पहले मामला कोखराज कोतवाली से लीक हो गया। सोशल मीडिया में खबरें आने के बाद पुलिस को मजबूरी में पकड़े गए तीन लोगों को जाली नोट के साथ गिरफ्तारी दिखाकर जेल भेजना पड़ा।