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युवाओं को झटका दे रहा मोबाइल, टीवी
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Thu, 09 Jul 2015 02:15 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। कंप्यूटर, मोबाइल जैसी चीजों ने विकास के नए आयाम भले ही खड़े कर दिए हों लेकिन इससे चिपके रहने वाले युवाओं को यह भारी पड़ रहा है। युवाओं में उलझन, अनिद्रा जैसी कई तरह की परेशानियां हो रही हैं। परेशान युवक चिकित्सकों के यहां पहुंच रहे हैं। उन्हें इन चीजों से जरूरत से ज्यादा न चिपके रहने की सलाह दी जा रही है।
आईटी से जुड़े युवाओं में यह परेशानी अधिक देखी जा रही है। इसके अलावा ऐसे युवा जो मोबाइल पर लगातार गेम खेलते रहते हैं, टीवी देखते रहते हैं, लगातार उनका ध्यान बना रहता है। इससे आंखों में खुजलाहट, लाल होना, सिर में उलझन, नींद न आना, तनाव बने रहना, आंखों की रोशनी प्रभावित होना, याददाश्त कम होना जैसी परेशानियां हो रही हैं। स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय के न्यूरो सर्जन डॉ. एनएन गोपाल कहते हैं कि उनकी ओपीडी में इस तरह के रोजाना दो-तीन मामले पहुंच रहे हैं। शहर के दूसरे मस्तिष्क रोग विशेषज्ञ भी ऐसा ही कह रहे हैं। शहर में मस्तिष्क रोगियों का उपचार इस वक्त आधा दर्जन से अधिक चिकित्सक कर रहे हैं।
डॉ. गोपाल कहते हैं कि जो युवा कंप्यूटर पर बैठकर लगातार काम कर रहे हैं, उनमें सिर और आंखों में परेशानी के साथ कमर में दर्द, गर्दन में दर्द, पीठ में तकलीफ, हाथों में तकलीफ जैसी दूसरी परेशानियां हो रही हैं। इविवि के मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो. दीपा पुनेठा कहती हैं कि मोबाइल, टीवी, कंप्यूटर जैसी चीजों के संपर्क में अधिक देर तक लगातार जुड़े रहने वाले युवाओं में मानसिक और शारीरिक परेशानियां हो रही हैं। इससे वे समाज से भी कट रहे हैं और उनके एकाकी जीवन को बढ़ावा भी मिल रहा है। अकेलेपन से युवाओं में तमाम तरह की विकृतियां भी हो रही हैं।
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स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय सर्जरी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एसपीएस चौहान कहते हैं कि अगर काम के दौरान बीच-बीच में गैप दिया जाए और जरूरत से अधिक मोबाइल, कंप्यूटर का प्रयोग न किया जाए यही बेहतर है।
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आईटी से जुड़े युवाओं में यह परेशानी अधिक देखी जा रही है। इसके अलावा ऐसे युवा जो मोबाइल पर लगातार गेम खेलते रहते हैं, टीवी देखते रहते हैं, लगातार उनका ध्यान बना रहता है। इससे आंखों में खुजलाहट, लाल होना, सिर में उलझन, नींद न आना, तनाव बने रहना, आंखों की रोशनी प्रभावित होना, याददाश्त कम होना जैसी परेशानियां हो रही हैं। स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय के न्यूरो सर्जन डॉ. एनएन गोपाल कहते हैं कि उनकी ओपीडी में इस तरह के रोजाना दो-तीन मामले पहुंच रहे हैं। शहर के दूसरे मस्तिष्क रोग विशेषज्ञ भी ऐसा ही कह रहे हैं। शहर में मस्तिष्क रोगियों का उपचार इस वक्त आधा दर्जन से अधिक चिकित्सक कर रहे हैं।
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डॉ. गोपाल कहते हैं कि जो युवा कंप्यूटर पर बैठकर लगातार काम कर रहे हैं, उनमें सिर और आंखों में परेशानी के साथ कमर में दर्द, गर्दन में दर्द, पीठ में तकलीफ, हाथों में तकलीफ जैसी दूसरी परेशानियां हो रही हैं। इविवि के मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो. दीपा पुनेठा कहती हैं कि मोबाइल, टीवी, कंप्यूटर जैसी चीजों के संपर्क में अधिक देर तक लगातार जुड़े रहने वाले युवाओं में मानसिक और शारीरिक परेशानियां हो रही हैं। इससे वे समाज से भी कट रहे हैं और उनके एकाकी जीवन को बढ़ावा भी मिल रहा है। अकेलेपन से युवाओं में तमाम तरह की विकृतियां भी हो रही हैं।
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स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय सर्जरी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एसपीएस चौहान कहते हैं कि अगर काम के दौरान बीच-बीच में गैप दिया जाए और जरूरत से अधिक मोबाइल, कंप्यूटर का प्रयोग न किया जाए यही बेहतर है।