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Marriage : कौशाम्बी का युवक सात समंदर पार से लाया दुल्हन, विदेशी बहू देखने की मची होड़

Sun, 15 May 2022 07:05 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी
अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 15 May 2022 07:05 PM IST
सार

कड़ाधाम कोतवाली के फरीदगंज निवासी लल्लू राम ठेकेदारी करते थे। लल्लू की मौत के बाद करीब 12 साल पहले उनका मझला बेटा सऊदी अरब कमाने गया। वहां वह कपड़ा बनाने वाली कंपनी एटलांटा में काम करने लगा।

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The young man of Kaushambi brought the bride from across the border
Kaushambi : मधुशा और बलराम। - फोटो : Kaushambi

विस्तार

12 साल तक लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले युगल की तीन देश के बीच लिखी गई प्रेम कथा को कौशाम्बी में मुकाम मिला। श्रीलंका से टूरिस्ट वीजा लेकर आई युवती ने शनिवार को जिले के युवक के साथ बौद्घ रीति-रिवाज से सात फेरे लिए। दोनों की मुलाकात सऊदी अरब की एक कपड़ा कम्पनी में हुई थी। विदेशी दुल्हन पाकर घर-परिवार में खुशियों का महौल है।

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कड़ाधाम कोतवाली के फरीदगंज निवासी लल्लू राम ठेकेदारी करते थे। लल्लू की मौत के बाद करीब 12 साल पहले उनका मझला बेटा सऊदी अरब कमाने गया। वहां वह कपड़ा बनाने वाली कंपनी एटलांटा में काम करने लगा। वहीं पर श्रीलंका को कोलंबो की मधुशा भी काम करती थी। साथ काम करने के दौरान दोनों में प्रेम हो गया। वह लोग लिव इन रिलेशनशिप में रहने लगे। उम्र बढ़ती जाने पर तीन महीने पहले बलराम व मधुशा श्रीलंका गए। वहां पर दोनों ने कोर्ट मैरिज किया।
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बलराम की इच्छा थी कि वह अपनी शादी परिवार वालों के सामने करें। उसने अपनी इच्छा पत्नी मधुशा से जाहिर की। मधुशा ने पति की इच्छा का सम्मान करते हुए भारत आने का फैसला कर लिया। काफी प्रयास के बाद 27 अप्रैल को उसे तीन महीने के लिए भारत आने का टूरिस्ट वीजा प्राप्त हो गया। शनिवार को बलराम के घर में धूमधाम से वैवाहिक कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम में तमाम रिश्तेदार बुलाए गए थे। मधुशा व बलराम शादी से बहुत खुश हैं।   

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विदेशी बहू की मुंह दिखाई को लगा रहा तांता
बलराम के घर में रिश्तेदारों का तांता लगा रहा। घर-परिवार के अलावा मोहल्ले के लोग विदेशी बहू की मुंह दिखाई के लिए होड़ लगाए रहे। बच्चों की टोली तो सुबह से ही घर में जमा हो गई थी। हलांकि मधुशा हिंदी बोल लेती है लेकिन बोली धारा-प्रवाह नहीं है। इसकी वजह से बच्चे उसकी नकल उतारते दिखे।

भारत की संस्कृति से अभिभूत है मधुशा
विदेशी मधुशा भारत की संस्कृति व संस्कार से अभिभूत है। अमर उजाला से बातचीत में उसका कहना है यहां हल्दी की रश्म, जयमाला, मेहंदी, मुंह दिखाई का कार्यक्रम बेहद अच्छा लगा। यह सारे कार्यक्रम अपनत्व का एहसास कराते हैं। यहां परिवार के लोगों ने लोगों ने वर व कन्या पक्ष की भूमिका निभाई जो अद्भुत थी।


श्रीलंका के हालत से चितिंत है मधुशा, पर उम्मीद कायम
आर्थिक संकट से घिरे श्रीलंका के हालात के बारे में पूछने पर मधुशा का कहना है कि वहां महंगाई बहुत ज्यादा हो गई है। लोग अपना कारोबार बंद कर रहे हैं। उसके पिता निर्मल भी बिजनेसमैन थे। लेकिन मंदी के कारण कारोबार चौपट हो गया है। वहां के लोग आर्थिक स्थित सुधारने के लिए दूसरे देश में कमाई के लिए जाने पर मजबूर होने लगे थे। अब सत्ता परिवर्तन हो चुका है। उम्मीद है कि जल्द ही आर्थिक हालात में सुधार होगा।

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