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Kaushambi News: मौसम की करवट... मेडिकल कॉलेज में मरीजों की लंबी कतार
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मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। कुछ दिन पहले मेडिकल कॉलेज के ओपीडी में रोजाना करीब 900 मरीजों का इलाज होता था। लेकिन, वर्तमान में यह संख्या बढ़कर 1500 के पार हो गई। सोमवार को मेडिकल कॉलेज में 1562 मरीजों का इलाज किया गया। वहीं, सुबह से ही काउंटर पर लंबी कतारें लगी रहीं।
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल के ओपीडी में सबसे ज्यादा मरीज सर्दी-जुकाम, खांसी, वायरल बुखार, सांस की दिक्कत और जोड़ों के दर्द के आए। मेडिकल कॉलेज की पैथोलॉजी विभाग में भी जांचों का दबाव बढ़ गया है। खून जांच केंद्र पर रोजाना करीब 500 से अधिक मरीजों की जांच हो रही है।
वहीं, चेस्ट फिजिशियन डॉ. संजीव सिंह ने बताया कि तापमान में अचानक गिरावट से सांस की दिक्कत वाले मरीज बढ़े हैं। ठंडी हवा और प्रदूषण से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस की समस्या बढ़ी है। उन्होंने लोगों को ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़े पहनने, धूल-धुएं से दूर रहने और जरूरत पड़ने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विश्व प्रकाश ने बताया कि बच्चों में सर्दी-जुकाम, खांसी और वायरल बुखार के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बदलते मौसम में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे वे जल्दी संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं।
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पैथोलॉजी में एलर्जी की जांच 300 पार
मेडिकल कॉलेज की पैथोलॉजी में सीबीसी, एलएफटी, केएफटी, लिपिड प्रोफाइल, थॉयराइड सहित रोजाना करीब 500 से अधिक जांचें की जा रही हैं। पैथोलॉजी विभाग की सीनियर रेजिडेंट डॉ. अंकिता द्विवेदी ने बताया कि पैथोलॉजी में जांच कराने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। करीब 300 से अधिक जांचें एलर्जी से जुड़े मरीजों की रही।
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मौसम बदला तो बिगड़ी सेहत, ओपीडी में कतार
:: मेडिकल कॉलेज के ओपीडी में सोमवार को मरीजों की भारी भीड़ जुटी रही। ओपीडी में मौजूद कर्मचारियों के अनुसार बाल रोग विभाग में 150 से अधिक मरीजों का उपचार किया गया। वहीं, चेस्ट विभाग की ओपीडी में करीब 200 मरीज पहुंचे। नाक, कान, गला रोग विभाग में 90 से अधिक और नेत्र विभाग की ओपीडी में 100 से 150 मरीजों ने इलाज कराया।
बाल रोग विभाग में बच्चे का इलाज कराने आए रामजीत ने बताया कि उनके बच्चे को तीन-चार दिनों से सर्दी लग रही है। दूध पीने पर बच्चे को उल्टी हो जाती थी। क्लीनिक में दिखाने के बाद भी आराम नहीं मिला। सोमवार को मेडिकल कॉलेज में लाया था। वहीं, चेस्ट विभाग पहुंचे ननकू ने बताया कि उन्हें पिछले दो दिनों से सीने में जकड़न है। परेशानी बढ़ने पर सोमवार को चेस्ट फिजिशियन को दिखाया।
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मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल के ओपीडी में सबसे ज्यादा मरीज सर्दी-जुकाम, खांसी, वायरल बुखार, सांस की दिक्कत और जोड़ों के दर्द के आए। मेडिकल कॉलेज की पैथोलॉजी विभाग में भी जांचों का दबाव बढ़ गया है। खून जांच केंद्र पर रोजाना करीब 500 से अधिक मरीजों की जांच हो रही है।
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वहीं, चेस्ट फिजिशियन डॉ. संजीव सिंह ने बताया कि तापमान में अचानक गिरावट से सांस की दिक्कत वाले मरीज बढ़े हैं। ठंडी हवा और प्रदूषण से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस की समस्या बढ़ी है। उन्होंने लोगों को ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़े पहनने, धूल-धुएं से दूर रहने और जरूरत पड़ने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विश्व प्रकाश ने बताया कि बच्चों में सर्दी-जुकाम, खांसी और वायरल बुखार के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बदलते मौसम में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे वे जल्दी संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं।
पैथोलॉजी में एलर्जी की जांच 300 पार
मेडिकल कॉलेज की पैथोलॉजी में सीबीसी, एलएफटी, केएफटी, लिपिड प्रोफाइल, थॉयराइड सहित रोजाना करीब 500 से अधिक जांचें की जा रही हैं। पैथोलॉजी विभाग की सीनियर रेजिडेंट डॉ. अंकिता द्विवेदी ने बताया कि पैथोलॉजी में जांच कराने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। करीब 300 से अधिक जांचें एलर्जी से जुड़े मरीजों की रही।
मौसम बदला तो बिगड़ी सेहत, ओपीडी में कतार
:: मेडिकल कॉलेज के ओपीडी में सोमवार को मरीजों की भारी भीड़ जुटी रही। ओपीडी में मौजूद कर्मचारियों के अनुसार बाल रोग विभाग में 150 से अधिक मरीजों का उपचार किया गया। वहीं, चेस्ट विभाग की ओपीडी में करीब 200 मरीज पहुंचे। नाक, कान, गला रोग विभाग में 90 से अधिक और नेत्र विभाग की ओपीडी में 100 से 150 मरीजों ने इलाज कराया।
बाल रोग विभाग में बच्चे का इलाज कराने आए रामजीत ने बताया कि उनके बच्चे को तीन-चार दिनों से सर्दी लग रही है। दूध पीने पर बच्चे को उल्टी हो जाती थी। क्लीनिक में दिखाने के बाद भी आराम नहीं मिला। सोमवार को मेडिकल कॉलेज में लाया था। वहीं, चेस्ट विभाग पहुंचे ननकू ने बताया कि उन्हें पिछले दो दिनों से सीने में जकड़न है। परेशानी बढ़ने पर सोमवार को चेस्ट फिजिशियन को दिखाया।