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तीसरे दिन थमी बारिश, ठंड से कांपे लोग
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तीसरे दिन थमी बारिश, ठंड से कांपे लोग
दिनभर आसमान छाए रहे बादल, नहीं हुए सूर्य देव के दर्शन
मंझनपुर। मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव होने से अनिश्चितता बनी हुई है। दो दिन तक लगातार हुई बारिश के बाद तीसरे दिन शनिवार को रुक-रुककर बरसात हुई। तीसरे दिन बारिश थमी, लेकिन आसमान में बादल छाए रहे। दिन में सूर्य के दर्शन नहीं हुए। कडकड़ाती ठंड से लोग कांप उठे।
बृहस्पतिवार की सुबह से शुरू हुई रिमझिम फुहारें लगातार 48 घंटे तक जारी रहीं। तीसरे दिन शनिवार की सुबह तकरीबन आठ बजे बारिश थमने के साथ ही आसमान खुल गया। सूरज की लालिमा देख लगा कि मौसम साफ हो जाएगा। लेकिन अगले ही घंटे फिर से मौसम ने करवट बदल लिया। दोपहर 12 बजे से एक बजे तक बारिश हुई। रिमझिम फुहारों का यह सिलसिला रुक-रुककर शाम तक चलता रहा। बारिश और बादल छाए रहने से दिनभर भगवान सूर्य के दर्शन नहीं हुए। लोगों को ठंड से राहत नहीं मिली और कंपकंपाते रहे। बारिश के बाद बढ़ी ठंड की वजह से जनजीवन पर असर पड़ा है। सड़कों, बाजारों में कम चहलपहल रही। सामान्य कारोबार में गिरावट आई है। जरूरी काम से बाहर निकले लोग भी आग का सहारा ढूंढते नजर आए। हालांकि, शुक्रवार की अपेक्षा शनिवार को अधिकतम तापमान में दो और न्यूनतम तापमान में तीन डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी जरूर दर्ज की गई। रविवार को अधिकतम तापमान 19 और न्यूनतम 14 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम वैज्ञानिक रविवार को भी बारिश की आशंका जता रहे हैं।
सीवीओ डॉ. सीमा ने बताया कि पशुओं को सीधी हवा लगने से बचाने के साथ ही बासी ठंडा पानी के बजाय ताजा पानी पिलाना चाहिए। पशुओं को प्रतिदिन 30 ग्राम मिनरल मिक्चर, 100 ग्राम गुड़ और लगभग 20 ग्राम अजवाइन प्रतिदिन खिलाएं। बताया कि इसके अलावा दुधारू पशुओं में कैल्शियम की कमी हो जाती है, जिससे बीमार होने और ठंड लगने की आशंका बढ़ जाती है, इसीलिए दूध देने वाले मवेशी को प्रतिदिन 50 ग्राम कैल्शियम अवश्य दें। डॉ. सीमा ने बताया कि मवेशी को कीड़ों की दवा और नमक भी समय-समय पर देते रहें, जिससे उनके बीमार होने की आशंका कम रहती है। इसके अलावा पशुओं के बाड़े में अलाव की व्यवस्था करें अथवा 100 वाट के दो बल्ब भी लगाए जा सकते हैं, जिससे वहां गर्माहट बनी रहेगी।
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जनपद के किसान बड़े पैमाने पर आलू की खेती करते हैं। बारिश व बदली के कारण आलू में झुलसा रोग की आशंका बढ़ गई है। जिला उद्यान अधिकारी सुरेंद्र राम भाष्कर ने बताया कि पिछैती रोग के प्रकोप से पत्तियां सिरे से झुलसना शुुरू हो जाती हैं। पत्तियों पर भूरे काले रंग के जलीय धब्बे बनते हैं, पत्तियों के निचली सतह पर रुई की तरह फफूंदी दिखाई देती है। बदलीयुक्त 80 प्रतिशत से अधिक आर्द्र वातावरण एवं 10 से 20 डिग्री तापमान पर रोग का प्रकोप बहुत तेजी से होता है। कृषि विज्ञान केंद्र महगांव के वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार सिंह ने बताया कि आलू की फसल को झुलसा रोग से बचाने के लिए जिंक मैग्नीज कार्बोमेट 2.0 से 2.5 किलो को 800 से 1000 लीटर पानी घोलकर हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए। इसी तरह से सरसों की फसल में माहू आने की संभावना को देखते हुए कोई भी कीटनाशक दवा का छिड़काव कर दें। इसके लिए नीम का तेल अथवा जैविक दवा का छिड़काव करना चाहिए।
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दिनभर आसमान छाए रहे बादल, नहीं हुए सूर्य देव के दर्शन
मंझनपुर। मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव होने से अनिश्चितता बनी हुई है। दो दिन तक लगातार हुई बारिश के बाद तीसरे दिन शनिवार को रुक-रुककर बरसात हुई। तीसरे दिन बारिश थमी, लेकिन आसमान में बादल छाए रहे। दिन में सूर्य के दर्शन नहीं हुए। कडकड़ाती ठंड से लोग कांप उठे।
बृहस्पतिवार की सुबह से शुरू हुई रिमझिम फुहारें लगातार 48 घंटे तक जारी रहीं। तीसरे दिन शनिवार की सुबह तकरीबन आठ बजे बारिश थमने के साथ ही आसमान खुल गया। सूरज की लालिमा देख लगा कि मौसम साफ हो जाएगा। लेकिन अगले ही घंटे फिर से मौसम ने करवट बदल लिया। दोपहर 12 बजे से एक बजे तक बारिश हुई। रिमझिम फुहारों का यह सिलसिला रुक-रुककर शाम तक चलता रहा। बारिश और बादल छाए रहने से दिनभर भगवान सूर्य के दर्शन नहीं हुए। लोगों को ठंड से राहत नहीं मिली और कंपकंपाते रहे। बारिश के बाद बढ़ी ठंड की वजह से जनजीवन पर असर पड़ा है। सड़कों, बाजारों में कम चहलपहल रही। सामान्य कारोबार में गिरावट आई है। जरूरी काम से बाहर निकले लोग भी आग का सहारा ढूंढते नजर आए। हालांकि, शुक्रवार की अपेक्षा शनिवार को अधिकतम तापमान में दो और न्यूनतम तापमान में तीन डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी जरूर दर्ज की गई। रविवार को अधिकतम तापमान 19 और न्यूनतम 14 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम वैज्ञानिक रविवार को भी बारिश की आशंका जता रहे हैं।
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सीवीओ डॉ. सीमा ने बताया कि पशुओं को सीधी हवा लगने से बचाने के साथ ही बासी ठंडा पानी के बजाय ताजा पानी पिलाना चाहिए। पशुओं को प्रतिदिन 30 ग्राम मिनरल मिक्चर, 100 ग्राम गुड़ और लगभग 20 ग्राम अजवाइन प्रतिदिन खिलाएं। बताया कि इसके अलावा दुधारू पशुओं में कैल्शियम की कमी हो जाती है, जिससे बीमार होने और ठंड लगने की आशंका बढ़ जाती है, इसीलिए दूध देने वाले मवेशी को प्रतिदिन 50 ग्राम कैल्शियम अवश्य दें। डॉ. सीमा ने बताया कि मवेशी को कीड़ों की दवा और नमक भी समय-समय पर देते रहें, जिससे उनके बीमार होने की आशंका कम रहती है। इसके अलावा पशुओं के बाड़े में अलाव की व्यवस्था करें अथवा 100 वाट के दो बल्ब भी लगाए जा सकते हैं, जिससे वहां गर्माहट बनी रहेगी।
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जनपद के किसान बड़े पैमाने पर आलू की खेती करते हैं। बारिश व बदली के कारण आलू में झुलसा रोग की आशंका बढ़ गई है। जिला उद्यान अधिकारी सुरेंद्र राम भाष्कर ने बताया कि पिछैती रोग के प्रकोप से पत्तियां सिरे से झुलसना शुुरू हो जाती हैं। पत्तियों पर भूरे काले रंग के जलीय धब्बे बनते हैं, पत्तियों के निचली सतह पर रुई की तरह फफूंदी दिखाई देती है। बदलीयुक्त 80 प्रतिशत से अधिक आर्द्र वातावरण एवं 10 से 20 डिग्री तापमान पर रोग का प्रकोप बहुत तेजी से होता है। कृषि विज्ञान केंद्र महगांव के वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार सिंह ने बताया कि आलू की फसल को झुलसा रोग से बचाने के लिए जिंक मैग्नीज कार्बोमेट 2.0 से 2.5 किलो को 800 से 1000 लीटर पानी घोलकर हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए। इसी तरह से सरसों की फसल में माहू आने की संभावना को देखते हुए कोई भी कीटनाशक दवा का छिड़काव कर दें। इसके लिए नीम का तेल अथवा जैविक दवा का छिड़काव करना चाहिए।