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पल भर छिन गई सीताराम के घर की खुशियां
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Mon, 04 May 2015 01:38 AM IST
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चायल (कौशाम्बी)। जवई गांव के सीताराम की सारी खुशियां रविवार को पल भर में लुट गई। जलने से पत्नी और दो मासूम बच्चे घर में जिंदा राख हो गए। बीवी और मासूम बच्चों की मौत उसके ऊपर बड़ा वज्रपात है। साथ ही छह महीने में उसके परिवार पर टूटा यह दूसरा कहर है। इससे पहले उसके पिता की मौत हुई थी। पति को गंवाने का गम झेल रही उसकी मां तो बहू और मासूम बच्चों की हुई दर्दनाक मौत के बाद बुत बन गई है। वहीं इस घटना से पूरा गांव स्तब्ध है।
बता दें कि पिपरी कोतवाली के जवई गांव निवासी सीताराम सोनी का परिवार खाता-पीता साधारण सा कुनबा था। पर, छह महीने पहले तब इस परिवार पर पहला कहर टूटा जब उसके पिता दशरथलाल अचानक बीमार होकर इस दुनिया से विदा हो गए। हालांकि पिता की मौत के 3 महीने बाद ही तब परिवार का गम हल्का हुआ जब घर में उसकी पत्नी गुड़िया ने चांद से बेटे को जन्म दिया। घर में मासूम की किलकारियां गूंजने से सीताराम, उसकी मां समेत पूरा परिवार फिर से खिलखिलाने लगा था।
पर, रविवार को उनकी इन खुशियों पर किसी की नजर लग गई। पड़ोस के लोग बताते हैं कि सुबह तैयार होकर सीताराम अपनी सिलाई की दुकान पर जाने वाला था। तभी किसी बात पर उसका बीवी से झगड़ा हो गया। दोनों में इतनी तीखी तकरार हुई कि उसने अपनी पत्नी पर हाथ भी छोड़ दिया था। इसके बाद वह गुस्से में ही घर से निकलकर दुकान चला गया। इधर, पति से हुए झगड़े का गुस्सा गुड़िया संभाल नहीं पाई।
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घंटों वह घर में बैठी सिसकती रही। फिर उसने ऐसा रोंगटे खड़ा कर देने वाला कदम उठा लिया जिसकी कल्पना मात्र से ही किसी की रूह कांप जाए। उसने अपने दोनों मासूम बच्चों के साथ घर के भीतर आत्मदाह कर लिया। जलने से तीनों की मौत हो गई।
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बता दें कि पिपरी कोतवाली के जवई गांव निवासी सीताराम सोनी का परिवार खाता-पीता साधारण सा कुनबा था। पर, छह महीने पहले तब इस परिवार पर पहला कहर टूटा जब उसके पिता दशरथलाल अचानक बीमार होकर इस दुनिया से विदा हो गए। हालांकि पिता की मौत के 3 महीने बाद ही तब परिवार का गम हल्का हुआ जब घर में उसकी पत्नी गुड़िया ने चांद से बेटे को जन्म दिया। घर में मासूम की किलकारियां गूंजने से सीताराम, उसकी मां समेत पूरा परिवार फिर से खिलखिलाने लगा था।
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पर, रविवार को उनकी इन खुशियों पर किसी की नजर लग गई। पड़ोस के लोग बताते हैं कि सुबह तैयार होकर सीताराम अपनी सिलाई की दुकान पर जाने वाला था। तभी किसी बात पर उसका बीवी से झगड़ा हो गया। दोनों में इतनी तीखी तकरार हुई कि उसने अपनी पत्नी पर हाथ भी छोड़ दिया था। इसके बाद वह गुस्से में ही घर से निकलकर दुकान चला गया। इधर, पति से हुए झगड़े का गुस्सा गुड़िया संभाल नहीं पाई।
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घंटों वह घर में बैठी सिसकती रही। फिर उसने ऐसा रोंगटे खड़ा कर देने वाला कदम उठा लिया जिसकी कल्पना मात्र से ही किसी की रूह कांप जाए। उसने अपने दोनों मासूम बच्चों के साथ घर के भीतर आत्मदाह कर लिया। जलने से तीनों की मौत हो गई।