{"_id":"5dd2f01a8ebc3e54d146b37c","slug":"the-god-of-the-earth-joins-the-couple-separated-in-the-train-kaushambi-news-ald2604689117","type":"story","status":"publish","title_hn":"ट्रेन में बिछड़े दंपती को ‘धरती के भगवान’ ने मिलाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ट्रेन में बिछड़े दंपती को ‘धरती के भगवान’ ने मिलाया
विज्ञापन
कौशाम्बी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मूरतगंज में बिछड़े दंपती
- फोटो : KAUSHAMBI
ट्रेन में बिछड़े दंपती को ‘धरती के भगवान’ ने मिलाया
महिला थी गर्भवती, मूरतगंज के अस्पताल में दिया बच्चे को जन्म
डॉक्टर ने गूगल के जरिये खोजा पति का पता, मिलते ही फफक पड़े पति-पत्नी
संवाद न्यूज एजेंसी
मूरतगंज (कौशाम्बी)। चलती ट्रेन में बिछड़े एक दंपती को आखिरकार ‘धरती के भगवान’ ने फिर से मिला दिया। पति तो बीवी-बच्चों की खोजबीन में नाकाम होने के बाद हिमाचल प्रदेश लौट गया था और गर्भवती पत्नी कौशाम्बी जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) मूरतगंज में भर्ती थी। प्रसव पीड़ा होने पर जीआरपी ने भरवारी में उसे ट्रेन से उतार कर पीएचसी में भर्ती कराया था। पखवाड़े भर तक चले अस्पताल कर्मियों के तमाम प्रयासों के बाद आखिरकार उसके पति का पता चल गया। सोमवार को पीएचसी में पत्नी-बच्चों से मिला, इस दौरान दोनों रो पड़े।
जिला महराजगंज के सक्सेना नगर निवासी संजय अग्रहरि उर्फ अरविंद हिमाचल प्रदेश की एक कंपनी में काम करता था। संजय की पत्नी पूजा गर्भवती थी। प्रसव का समय नजदीक होने के कारण तीन नवंबर को संजय अपनी पत्नी पूजा व तीन वर्षीय बेटे के साथ घर आने के लिए अंबाला से ट्रेन में सवार होकर गोरखपुर के लिए निकला था। लखनऊ के समीप किसी स्टेशन पर संजय पानी लेने के लिए उतर गया। इसी बीच ट्रेन गंतव्य को रवाना हो गई। जानकारी नहीं होने से पूजा ने ट्रेन रोकने के लिए न तो चेन पुलिंग की और न ही किसी से मदद मांगी। इसके कारण ट्रेन गोरखपुर आ गई।
यहां पूजा ने रेलवे के अफसरों को खबर दी तो दो दिन तक एनाउंस कराकर संजय की खोजबीन की गई। कोई पता नहीं चलने पर पूजा को सात नवंबर को चौरी-चौरा एक्सप्रेस से प्रयागराज भेज दिया गया। प्रयागराज जा रही ट्रेन जब आठ नवंबर को भरवारी रेलवे स्टेशन पहुंची तो पूजा को प्रसव पीड़ा बढ़ गई। यात्रियों की सूचना पर जीआरपी ने पूजा को पीएचसी मूरतगंज में भर्ती कराया। नौ नवंबर को पूजा ने बच्चे को जन्म दिया। पूजा अपने पति का मोबाइल नंबर नहीं जानती थी। चिकित्सा प्रभारी डॉ. सुनील सिंह को पूजा सिर्फ यह बता सकी कि उसका पति हिमाचल प्रदेश की महराजा कंपनी में काम करता है। डॉ. सुनील ने मोबाइल पर कंपनी को सर्च किया तो उसका पता मालूम चल गया।
विज्ञापन
इस बीच कंपनी के एचआर से फोन पर बात हुई। एचआर ने संजय औैर पूजा की वीडियो कॉलिंग कराई। पत्नी व बच्चों की सलामती के बाबत जानकारी होने पर संजय सोमवार को मूरतगंज पहुंचा। यहां पत्नी व बच्चों को सकुशल देख पति फफककर रो पड़ा। पत्नी भी अपने आंसू नहीं रोक सकी। संजय ने अस्पताल के स्टाफ डॉ, दीप्ती सोनकर, कविता, साधना, विजय लक्ष्मी, जगरूप के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कहा कि पत्नी व बच्चों को काफी जगह खोजने के बाद वह उम्मीद खोकर हिमाचल वापस लौटा था। अस्पताल का स्टाफ उसके लिए भगवान बन गया है।
विज्ञापन
महिला थी गर्भवती, मूरतगंज के अस्पताल में दिया बच्चे को जन्म
डॉक्टर ने गूगल के जरिये खोजा पति का पता, मिलते ही फफक पड़े पति-पत्नी
संवाद न्यूज एजेंसी
मूरतगंज (कौशाम्बी)। चलती ट्रेन में बिछड़े एक दंपती को आखिरकार ‘धरती के भगवान’ ने फिर से मिला दिया। पति तो बीवी-बच्चों की खोजबीन में नाकाम होने के बाद हिमाचल प्रदेश लौट गया था और गर्भवती पत्नी कौशाम्बी जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) मूरतगंज में भर्ती थी। प्रसव पीड़ा होने पर जीआरपी ने भरवारी में उसे ट्रेन से उतार कर पीएचसी में भर्ती कराया था। पखवाड़े भर तक चले अस्पताल कर्मियों के तमाम प्रयासों के बाद आखिरकार उसके पति का पता चल गया। सोमवार को पीएचसी में पत्नी-बच्चों से मिला, इस दौरान दोनों रो पड़े।
जिला महराजगंज के सक्सेना नगर निवासी संजय अग्रहरि उर्फ अरविंद हिमाचल प्रदेश की एक कंपनी में काम करता था। संजय की पत्नी पूजा गर्भवती थी। प्रसव का समय नजदीक होने के कारण तीन नवंबर को संजय अपनी पत्नी पूजा व तीन वर्षीय बेटे के साथ घर आने के लिए अंबाला से ट्रेन में सवार होकर गोरखपुर के लिए निकला था। लखनऊ के समीप किसी स्टेशन पर संजय पानी लेने के लिए उतर गया। इसी बीच ट्रेन गंतव्य को रवाना हो गई। जानकारी नहीं होने से पूजा ने ट्रेन रोकने के लिए न तो चेन पुलिंग की और न ही किसी से मदद मांगी। इसके कारण ट्रेन गोरखपुर आ गई।
विज्ञापन
यहां पूजा ने रेलवे के अफसरों को खबर दी तो दो दिन तक एनाउंस कराकर संजय की खोजबीन की गई। कोई पता नहीं चलने पर पूजा को सात नवंबर को चौरी-चौरा एक्सप्रेस से प्रयागराज भेज दिया गया। प्रयागराज जा रही ट्रेन जब आठ नवंबर को भरवारी रेलवे स्टेशन पहुंची तो पूजा को प्रसव पीड़ा बढ़ गई। यात्रियों की सूचना पर जीआरपी ने पूजा को पीएचसी मूरतगंज में भर्ती कराया। नौ नवंबर को पूजा ने बच्चे को जन्म दिया। पूजा अपने पति का मोबाइल नंबर नहीं जानती थी। चिकित्सा प्रभारी डॉ. सुनील सिंह को पूजा सिर्फ यह बता सकी कि उसका पति हिमाचल प्रदेश की महराजा कंपनी में काम करता है। डॉ. सुनील ने मोबाइल पर कंपनी को सर्च किया तो उसका पता मालूम चल गया।
विज्ञापन
इस बीच कंपनी के एचआर से फोन पर बात हुई। एचआर ने संजय औैर पूजा की वीडियो कॉलिंग कराई। पत्नी व बच्चों की सलामती के बाबत जानकारी होने पर संजय सोमवार को मूरतगंज पहुंचा। यहां पत्नी व बच्चों को सकुशल देख पति फफककर रो पड़ा। पत्नी भी अपने आंसू नहीं रोक सकी। संजय ने अस्पताल के स्टाफ डॉ, दीप्ती सोनकर, कविता, साधना, विजय लक्ष्मी, जगरूप के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कहा कि पत्नी व बच्चों को काफी जगह खोजने के बाद वह उम्मीद खोकर हिमाचल वापस लौटा था। अस्पताल का स्टाफ उसके लिए भगवान बन गया है।