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Kaushambi News: महिलाओं को सिलाई व ब्यूटी पार्लर सिखा बना रही स्वरोजगारी
Wed, 05 Nov 2025 12:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Wed, 05 Nov 2025 12:38 AM IST
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दुकान पर बैठी लक्ष्मी। स्रोत- स्वयं
गांव की महिलाएं भी अब आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं। चायल तहसील के नेवादा गांव की लक्ष्मी देवी ने अपने प्रयासों से न केवल खुद को रोजगार दिया, बल्कि अन्य महिलाओं को भी काम से जोड़ा है।
लक्ष्मी ने वर्ष 2016 में महिला स्वयं सहायता समूह का गठन किया। इसके बाद 10 महिलाओं के साथ मिलकर लेडीज कपड़ों और कॉस्मेटिक सामग्री का कारोबार शुरू कर दिया। लक्ष्मी देवी बताती हैं कि शुरुआत में सिलाई मशीन से छोटे पैमाने पर काम शुरू किया था लेकिन, धीरे-धीरे समूह ने पहचान बना ली। अब यह समूह लेडीज गारमेंट्स, कॉटन सूट, बच्चों के कपड़े और सौंदर्य सामग्री की बिक्री करता है।
समूह से जुड़ीं महिलाओं को औसतन 15 हजार रुपये प्रति माह की आमदनी हो रही है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार की तमाम संभावनाएं हैं, लेकिन प्रशिक्षण और पूंजी की कमी सबसे बड़ी चुनौती है। लक्ष्मी देवी का कहना है कि अगर सरकार सिलाई केंद्रों के लिए नियमित प्रशिक्षण और विपणन सुविधा उपलब्ध कराए, तो महिलाएं आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बन सकती हैं।
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जिला समन्वयक दिव्यांशु सिंह ने बताया कि स्वयं सहायता समूह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य हो रहा है। इसके लिए महिलाओं को समय-समय पर प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
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लक्ष्मी ने वर्ष 2016 में महिला स्वयं सहायता समूह का गठन किया। इसके बाद 10 महिलाओं के साथ मिलकर लेडीज कपड़ों और कॉस्मेटिक सामग्री का कारोबार शुरू कर दिया। लक्ष्मी देवी बताती हैं कि शुरुआत में सिलाई मशीन से छोटे पैमाने पर काम शुरू किया था लेकिन, धीरे-धीरे समूह ने पहचान बना ली। अब यह समूह लेडीज गारमेंट्स, कॉटन सूट, बच्चों के कपड़े और सौंदर्य सामग्री की बिक्री करता है।
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समूह से जुड़ीं महिलाओं को औसतन 15 हजार रुपये प्रति माह की आमदनी हो रही है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार की तमाम संभावनाएं हैं, लेकिन प्रशिक्षण और पूंजी की कमी सबसे बड़ी चुनौती है। लक्ष्मी देवी का कहना है कि अगर सरकार सिलाई केंद्रों के लिए नियमित प्रशिक्षण और विपणन सुविधा उपलब्ध कराए, तो महिलाएं आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बन सकती हैं।
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जिला समन्वयक दिव्यांशु सिंह ने बताया कि स्वयं सहायता समूह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य हो रहा है। इसके लिए महिलाओं को समय-समय पर प्रशिक्षण भी दिया जाता है।