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रजिस्ट्री हुई ठप, डेढ़ करोड़ का नुकसान
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Wed, 14 Dec 2016 12:37 AM IST
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नोटबंदी का नियम लागू होते ही रजिस्ट्री का कारोबार ठप सा हो गया है। अकेले नवंबर माह में एआईजी कार्यालय को रजिस्ट्री से होने वाली आय में डेढ़ करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा। दिसंबर माह में भी आय के हालात ठीक नहीं है। ऐसे में लक्ष्य की पूर्ति को लेकर एआईजी स्टांप परेशान हैं।
नोटबंदी के बाद से आमजन तो हलाकान हैं ही राजस्व वसूली से जुड़े सरकारी महकमे के जिम्मेदार भी परेशान हैं। नोटबंदी के चलते माह में राजस्व वसूली का रखा जाने वाले लक्ष्य आधा भी पूरा नहीं हो पा रहा है। बानगी के तौर पर एआईजी स्टांप को लिया जा सकता है। जिले भर में होने वाली रजिस्ट्री से स्टांप व निबंधन शुल्क से दो करोड़ 88 लाख आय का लक्ष्य नवंबर माह में रखा गया था। आठ नवंबर तक तो स्थिति ठीक रही।
इसके बाद हुई नोटबंदी ने आय की कमर तोड़ दी। पूरे माह में स्टांप एवं निबंधन शुल्क का लक्ष्य 50 प्रतिशत पर ही सिमट कर रह गया। विभाग को कुल 144 लाख की ही आय हो सकी। एआईजी स्टांप पूर्णिमा मिश्रा की माने तो दिसंबर के हालात तो और भी बुरे हैं। महीने की 13 तारीख बीत गई और लक्ष्य की पूर्ति 25 फीसदी तक नहीं पहुंच सकी है। ऐसे में इस माह 50 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति होना मुश्किल लग रहा है।
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प्लाटिंग करने वालों का है बुरा हाल
मंझनपुर में प्लाटिंग का कारोबार नवंबर माह की शुरुआत तक चरम पर था। मुख्यालय के चारों ओर बसी ग्राम सभाओं की भूमि खरीद का कारोबार तेजी से चल रहा था, लेकिन नोटबंदी ने प्लाटिंग करने वालों की भी कमर तोड़ दी है। दिसंबर माह में प्लाट रजिस्ट्री की एक भी रिपोर्ट तीनों तहसीलों के सब रजिस्ट्रार कार्यालय से नहीं मिल सकी है। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि नोटबंदी का असर भूमि की खरीद-फरोख्त करने वालों पर कितना पड़ा है।
भुखमरी की कगार पर पहुंचे स्टांप वेंडर
मंझनपुर सहित जिले की तीनों तहसीलों के स्टांप वेंडरों का बुरा हाल है। नोटबंदी के चलते बंद हुई भूमि की रजिस्ट्री ने स्टांप बिक्री पर ब्रेक लगा दिया है। इससे तहसील मुख्यालय पर सुबह-सुबह पहुंचकर स्टांप वेंडर दिनभर ग्राहक आने का इंतजार तो करते हैं पर शाम को उन्हें बैरंग ही लौटना पड़ता है। किसी-किसी स्टांप वेंडर की तो बोहनी तक नहीं होती। बानगी के तौर नौगीरा निवासी अमर सिंह यादव को लिया जा सकता है। इनकी मंझनपुर तहसील में स्टांप वेंडर की दुकान है। नोटबंदी के बाद से प्रभावित हुई बिक्री ने कमर तोड़ दी है। अमर सिंह का कहना है कि हलफनामा के अलावा स्टांप की ब्रिकी पूरी तरह से ठप है। इससे माह भर में हालात बद से बदतर हो चले हैं।
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नोटबंदी के बाद से आमजन तो हलाकान हैं ही राजस्व वसूली से जुड़े सरकारी महकमे के जिम्मेदार भी परेशान हैं। नोटबंदी के चलते माह में राजस्व वसूली का रखा जाने वाले लक्ष्य आधा भी पूरा नहीं हो पा रहा है। बानगी के तौर पर एआईजी स्टांप को लिया जा सकता है। जिले भर में होने वाली रजिस्ट्री से स्टांप व निबंधन शुल्क से दो करोड़ 88 लाख आय का लक्ष्य नवंबर माह में रखा गया था। आठ नवंबर तक तो स्थिति ठीक रही।
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इसके बाद हुई नोटबंदी ने आय की कमर तोड़ दी। पूरे माह में स्टांप एवं निबंधन शुल्क का लक्ष्य 50 प्रतिशत पर ही सिमट कर रह गया। विभाग को कुल 144 लाख की ही आय हो सकी। एआईजी स्टांप पूर्णिमा मिश्रा की माने तो दिसंबर के हालात तो और भी बुरे हैं। महीने की 13 तारीख बीत गई और लक्ष्य की पूर्ति 25 फीसदी तक नहीं पहुंच सकी है। ऐसे में इस माह 50 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति होना मुश्किल लग रहा है।
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प्लाटिंग करने वालों का है बुरा हाल
मंझनपुर में प्लाटिंग का कारोबार नवंबर माह की शुरुआत तक चरम पर था। मुख्यालय के चारों ओर बसी ग्राम सभाओं की भूमि खरीद का कारोबार तेजी से चल रहा था, लेकिन नोटबंदी ने प्लाटिंग करने वालों की भी कमर तोड़ दी है। दिसंबर माह में प्लाट रजिस्ट्री की एक भी रिपोर्ट तीनों तहसीलों के सब रजिस्ट्रार कार्यालय से नहीं मिल सकी है। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि नोटबंदी का असर भूमि की खरीद-फरोख्त करने वालों पर कितना पड़ा है।
भुखमरी की कगार पर पहुंचे स्टांप वेंडर
मंझनपुर सहित जिले की तीनों तहसीलों के स्टांप वेंडरों का बुरा हाल है। नोटबंदी के चलते बंद हुई भूमि की रजिस्ट्री ने स्टांप बिक्री पर ब्रेक लगा दिया है। इससे तहसील मुख्यालय पर सुबह-सुबह पहुंचकर स्टांप वेंडर दिनभर ग्राहक आने का इंतजार तो करते हैं पर शाम को उन्हें बैरंग ही लौटना पड़ता है। किसी-किसी स्टांप वेंडर की तो बोहनी तक नहीं होती। बानगी के तौर नौगीरा निवासी अमर सिंह यादव को लिया जा सकता है। इनकी मंझनपुर तहसील में स्टांप वेंडर की दुकान है। नोटबंदी के बाद से प्रभावित हुई बिक्री ने कमर तोड़ दी है। अमर सिंह का कहना है कि हलफनामा के अलावा स्टांप की ब्रिकी पूरी तरह से ठप है। इससे माह भर में हालात बद से बदतर हो चले हैं।