{"_id":"68fbd55cae8e47174f0cf9ad","slug":"soil-testing-is-necessary-for-fertilizer-assessment-dr-manoj-kaushambi-news-c-261-1-kmb1004-131721-2025-10-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"उर्वरक के आकलन के लिए मृदा परीक्षण जरूरी : डॉ. मनोज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उर्वरक के आकलन के लिए मृदा परीक्षण जरूरी : डॉ. मनोज
Sat, 25 Oct 2025 01:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Sat, 25 Oct 2025 01:07 AM IST
विज्ञापन
किसान कल्याण केंद्र सौर ई खुर्द में कृषि सखियों को जानकारी देते वैज्ञानिक। स्रोत- वैज्ञानिक
- फोटो : रायबरेली में शुक्रवार को शहर के रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार करते यात्री।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किसान कल्याण केंद्र सौरई खुर्द में प्राकृतिक खेती योजना के तहत गंगा किनारे स्थित ग्राम पंचायतों के क्लस्टर में नियुक्त कृषि सखियों का दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। पहले दिन कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. मनोज सिंह ने बताया कि मिट्टी में उर्वरक की मात्रा का आकलन करने के लिए मृदा परीक्षण आवश्यक है। उन्होंने प्रयोग में लाए जाने वाले विभिन्न पोषक तत्वों की जानकारी देते हुए मृदा स्वास्थ्य कार्ड के बारे में बताया।
मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के प्रभारी विकास यादव ने बताया कि प्राकृतिक खेती के लिए रासायनिक उर्वरकों की जगह जैविक खाद का उपयोग किया जाना चाहिए। इसके लिए मिट्टी की जांच अनिवार्य है। इस उद्देश्य से जिला मुख्यालय सहित आठ ब्लॉकों में मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं, जहां मिट्टी के नमूनों की जांच की जाती है। इसके बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किया जाता है।
सहायक विकास अधिकारी कृषि मनमोहन मिश्रा ने प्राकृतिक खेती से जुड़ी विभागीय योजनाओं और उनके लाभ के बारे में जानकारी दी। वहीं बीज गोदाम प्रभारी अनंत राम ने बताया कि चना, मटर और सरसों के बीज पंजीकृत किसानों को सब्सिडी दर पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के प्रभारी विकास यादव ने बताया कि प्राकृतिक खेती के लिए रासायनिक उर्वरकों की जगह जैविक खाद का उपयोग किया जाना चाहिए। इसके लिए मिट्टी की जांच अनिवार्य है। इस उद्देश्य से जिला मुख्यालय सहित आठ ब्लॉकों में मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं, जहां मिट्टी के नमूनों की जांच की जाती है। इसके बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किया जाता है।
विज्ञापन
सहायक विकास अधिकारी कृषि मनमोहन मिश्रा ने प्राकृतिक खेती से जुड़ी विभागीय योजनाओं और उनके लाभ के बारे में जानकारी दी। वहीं बीज गोदाम प्रभारी अनंत राम ने बताया कि चना, मटर और सरसों के बीज पंजीकृत किसानों को सब्सिडी दर पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
विज्ञापन