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बिना अनुमति के सोशल मीडिया पर हो रहा प्रचार
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Tue, 14 Feb 2017 12:17 AM IST
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विधानसभा चुनावी दंगल में उतर चुके उम्मीदवारों के प्रचार-प्रसार का माध्यम सोशल मीडिया बन चुका है। समर्थक व्हाट्सएप, फेसबुक और ट्यूटर के माध्यम से अपने-अपने प्रत्याशियों का प्रचार कर रहे हैं। इसके अलावा प्रत्याशियों के खिलाफ तीखे प्रहार भी किए जा रहे हैं। बगैर अनुमति लिए सोशल मीडिया द्वारा किए जा रहे प्रचार-प्रसार को लेकर प्रशासन ने चुप्पी साध रखी है। ऐसे में पोस्ट होने वाली तीखी प्रतिक्रिया को लेकर कभी भी समर्थकों में बवाल हो सकता है।
जिले में सिराथू, मंझनपुर और चायल विधानसभा सीटें हैं। इनमें सिराथू से 16, मंझनपुर से छह व चायल सीट से 19 उम्मीदवार मैदान में हैं। दल और निर्दल के रूप में चुनाव लड़ रहे इन उम्मीदवारों ने सोशल मीडिया को प्रचार का माध्यम बना लिया है। समर्थकों द्वारा व्हाट्सएप, फेसबुक और ट्यूटर के माध्यम से अपने-अपने उम्मीदवारों का प्रचार किया जा रहा है। इस दौरान आदर्श आचार संहिता को ताक पर रखते हुए समर्थकों की ओर से गांवों में किए जा रहे प्रचार, जनता का रुझान और हार-जीत तक सुनिश्चित करते देखे जा रहे हैं। हद तो तब हो जाती है जब उनके द्वारा तीखी प्रतिक्रिया पोस्ट की जाती है। इससे उम्मीदवारों के समर्थकों में कभी भी मनमुटाव बढ़ सकता है जो चुनाव के दौरान बवाल का कारण बन सकता है। उधर आदर्श आचार संहिता का पालन कराने की जिम्मेदारी संभाल रहे अफसर मामले में पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए हैं। सप्ताह भर से सोशल मीडिया पर चल रहे प्रचार-प्रसार व प्रतिक्रियाओं के खिलाफ अब तक एक भी कार्रवाई नहीं हो सकी है।
निर्वाचन आयोग ने लगा रखी है रोक
विधान सभा चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग ने बगैर अनुमति एक भी प्रचार माध्यम को न अपनाए जाने का निर्देश दे रखा है। आयोग के इस निर्देश का तनिक भी भय सोशल मीडिया पर नहीं देखा जा रहा है। फेसबुक और ट्यूटर पर तो हार-जीत कराने की प्रतिक्रियाएं चल ही रहीं है। मोबाइल पर बने विभिन्न ग्रुपों से रोज भड़काऊ पोस्ट की जा रही है।
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जिले में सिराथू, मंझनपुर और चायल विधानसभा सीटें हैं। इनमें सिराथू से 16, मंझनपुर से छह व चायल सीट से 19 उम्मीदवार मैदान में हैं। दल और निर्दल के रूप में चुनाव लड़ रहे इन उम्मीदवारों ने सोशल मीडिया को प्रचार का माध्यम बना लिया है। समर्थकों द्वारा व्हाट्सएप, फेसबुक और ट्यूटर के माध्यम से अपने-अपने उम्मीदवारों का प्रचार किया जा रहा है। इस दौरान आदर्श आचार संहिता को ताक पर रखते हुए समर्थकों की ओर से गांवों में किए जा रहे प्रचार, जनता का रुझान और हार-जीत तक सुनिश्चित करते देखे जा रहे हैं। हद तो तब हो जाती है जब उनके द्वारा तीखी प्रतिक्रिया पोस्ट की जाती है। इससे उम्मीदवारों के समर्थकों में कभी भी मनमुटाव बढ़ सकता है जो चुनाव के दौरान बवाल का कारण बन सकता है। उधर आदर्श आचार संहिता का पालन कराने की जिम्मेदारी संभाल रहे अफसर मामले में पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए हैं। सप्ताह भर से सोशल मीडिया पर चल रहे प्रचार-प्रसार व प्रतिक्रियाओं के खिलाफ अब तक एक भी कार्रवाई नहीं हो सकी है।
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निर्वाचन आयोग ने लगा रखी है रोक
विधान सभा चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग ने बगैर अनुमति एक भी प्रचार माध्यम को न अपनाए जाने का निर्देश दे रखा है। आयोग के इस निर्देश का तनिक भी भय सोशल मीडिया पर नहीं देखा जा रहा है। फेसबुक और ट्यूटर पर तो हार-जीत कराने की प्रतिक्रियाएं चल ही रहीं है। मोबाइल पर बने विभिन्न ग्रुपों से रोज भड़काऊ पोस्ट की जा रही है।
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