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Kaushambi News: मारपीट का जुर्म कबूल करने पर सात को अर्थदंड
Thu, 04 Apr 2024 01:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Thu, 04 Apr 2024 01:28 AM IST
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मारपीट का जुर्म कबूल करने पर सात को अर्थदंड
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दीपक कुमार जायसवाल की अदालत ने बुधवार को मारपीट के चार अलग-अलग मामलों में सात आरोपितों की ओर से जुर्म कबूल करने पर अर्थदंड की सजा सुनाई।
कोखराज कोतवाली के सैंता निवासी राजू व मंसूर के खिलाफ वर्ष 1996 में मारपीट का मुकदमा कायम हुआ था। करीब तीन दशक बीतने के बाद भी पुलिस की ओर से कोर्ट के समक्ष कोई गवाह पेश नहीं किए गए। इससे परेशान होकर राजू व मंसूर ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। कोर्ट ने दोनों को एक-एक हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। इसी तरह से मंझनपुर कोतवाली के सईदाबाद नारा निवासी नसीरूद्दीन के खिलाफ वर्ष 1997 में मारपीट का मुकदमा दर्ज हुआ था। पुलिस की लचर पैरवी के चलते अब तक कोई भी गवाही नहीं हुई। जुर्म कबूल करने पर कोर्ट ने नसीरूद्दीन को दो हजार रुपये अर्थदंड जमा करने की सजा सुनाई। तीसरी अर्जी मंझनपुर के खनवारी निवासी सुरेश यादव ने दाखिल की थी। सुरेश के खिलाफ वर्ष 1999 में मारपीट का मुकदमा दर्ज हुआ था। इसमें भी जुर्म कबूल करने पर कोर्ट ने दो हजार रुपये के अर्थदंड से उसे दंडित किया। चौथा मामला कोखराज कोतवाली के रसूलपुर काजी निवासी अमजद, माशूक व मंसूर अहमद का था। इनके खिलाफ वर्ष 2010 में मारपीट की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इस केस में भी पुलिस गवाहों को अदालत में पेश करने में विफल रही। कोर्ट का चक्कर काटते तीनों परेशान हो गए। इस पर सभी के जुर्म स्वीकार करने पर तीनों पर दो-दो हजार रुपये का अर्थ दंड लगाया गया है। आरोपी जुर्माने की रकम जमा कर घर चले गए।
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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दीपक कुमार जायसवाल की अदालत ने बुधवार को मारपीट के चार अलग-अलग मामलों में सात आरोपितों की ओर से जुर्म कबूल करने पर अर्थदंड की सजा सुनाई।
कोखराज कोतवाली के सैंता निवासी राजू व मंसूर के खिलाफ वर्ष 1996 में मारपीट का मुकदमा कायम हुआ था। करीब तीन दशक बीतने के बाद भी पुलिस की ओर से कोर्ट के समक्ष कोई गवाह पेश नहीं किए गए। इससे परेशान होकर राजू व मंसूर ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। कोर्ट ने दोनों को एक-एक हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। इसी तरह से मंझनपुर कोतवाली के सईदाबाद नारा निवासी नसीरूद्दीन के खिलाफ वर्ष 1997 में मारपीट का मुकदमा दर्ज हुआ था। पुलिस की लचर पैरवी के चलते अब तक कोई भी गवाही नहीं हुई। जुर्म कबूल करने पर कोर्ट ने नसीरूद्दीन को दो हजार रुपये अर्थदंड जमा करने की सजा सुनाई। तीसरी अर्जी मंझनपुर के खनवारी निवासी सुरेश यादव ने दाखिल की थी। सुरेश के खिलाफ वर्ष 1999 में मारपीट का मुकदमा दर्ज हुआ था। इसमें भी जुर्म कबूल करने पर कोर्ट ने दो हजार रुपये के अर्थदंड से उसे दंडित किया। चौथा मामला कोखराज कोतवाली के रसूलपुर काजी निवासी अमजद, माशूक व मंसूर अहमद का था। इनके खिलाफ वर्ष 2010 में मारपीट की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इस केस में भी पुलिस गवाहों को अदालत में पेश करने में विफल रही। कोर्ट का चक्कर काटते तीनों परेशान हो गए। इस पर सभी के जुर्म स्वीकार करने पर तीनों पर दो-दो हजार रुपये का अर्थ दंड लगाया गया है। आरोपी जुर्माने की रकम जमा कर घर चले गए।
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