फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kaushambi News ›   Secretary trapped in son's appointment against rules made allegations of illegal extortion

Kaushambi News: नियमों विरुद्ध बेटे की नियुक्त में फंसे सचिव ने लगाए अवैध वसूली के आरोप

Tue, 26 Sep 2023 12:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी Updated Tue, 26 Sep 2023 12:25 AM IST
विज्ञापन
Secretary trapped in son's appointment against rules made allegations of illegal extortion
एआर को-ऑपरेटिव ने कहा आरोप मनगढ़ंत
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
भरवारी। नगर स्थित क्रय-विक्रय सहकारी समिति में नियमों को ताक पर रखकर बेटे की नियुक्त करने वाले सचिव ने महकमे के अफसरों पर अवैध वसूली और जांच में तथ्यों को छिपाने का आरोप लगाया है। हालांकि, अफसरों ने आरोपों को मनगढ़ंत बताया।
क्रय-विक्रय सहकारी समिति के सचिव उमाशंकर यादव के खिलाफ नियमों के विपरीत अपने बेटे राहुल कुमार की सहायक के रूप में नियुक्ति करने का आरोप लगा था। जांच में इसकी पुष्टि होने के बाद एआर कोऑपरेटिव आरके द्विवेदी ने उनके खिलाफ एफआईआर के आदेश दिए थे। हालांकि, उच्चाधिकारियों की रोक के कारण एफआईआर नहीं हुई।
विज्ञापन

इसी बीच सचिव ने उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि बेटे की नियुक्त वर्ष 2020 में पूर्व सचिव अशफाक अहमद ने की थी। जब वह सचिव बने तो सिर्फ नवीनीकरण हुआ था। मामले की जांच करने वाले अफसरों ने एडीसीओ, बैंक मैनेजर, तत्कालीन अध्यक्ष का बयान भी नहीं लिया। तत्कालीन एआर द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र का जांच में कोई उल्लेख नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

उनका आरोप है कि महकमे के एक एडीओ ने उच्चाधिकारियों के नाम पर एक लाख रुपये मांगे थे। रुपये न देने पर जेल भेजने की धमकी दी। किसी तरह 50 हजार रुपये दे दिए। शेष रकम न देने के कारण उन्हें फंसाया जा रहा है।

इनसेट
अनुमोदन के बिना कराई नियुक्ति, निकाल लिया वेतन
सहायक आयुक्त एवं प्रबंधक साधन सहकारी समितियां आरके द्विवेदी का कहना है कि राहुल कुमार की सहायक के रूप में नियुक्ति के लिए दो बार प्रस्ताव कराए गए। एक प्रस्ताव जून 2020 में सचिव अशफाक अहमद ने तो दूसरा सचिव उमेश कुमार ने सितंबर 2022 में कराया, लेकिन उच्चाधिकारियों से अनुमोदन एक भी बार नहीं लिया। बिना अनुमोदन के नियुक्त अवैध है। सचिव ने वर्ष 2020 के प्रस्ताव के आधार पर हुई नियुक्ति की तिथि से वेतन के करीब 1.70 लाख रुपये निकाल लिए गए। रुपये मांगने का आरोप पूरी तरह गलत है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed