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Kaushambi News: पति से सीखा कपड़े बनाना, फिर सावित्री ने बदल डाली समूह की तकदीर
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सदर तहसील के पिंडरा सहावनपुर गांव की महिलाओं ने करीब तीन साल पहले समूह का गठन किया। कोषाध्यक्ष सावित्री ने पति से लोअर और टीशर्ट बनाना सीखा। इसके बाद समूह की अन्य महिलाओं ने भी उनका सहयोग किया। आज समूह की दसों महिलाओं को सालभर का रोजगार मिला है। कपड़े बेचकर समूह हर महीने 25 से 30 हजार रुपये की आमदनी कर रहा है।
पिंडरा सहावनपुर गांव की सावित्री देवी समेत अन्य महिलाओं संग गौरी महिला स्वयं सहायता समूह का गठन किया। समूह से जुड़ीं महिलाओं को सावित्री ने कपड़ा बनाने के लिए प्रेरित किया। मुंबई में कपड़े बनाने का काम कर रहे उनके पति राजू गौतम ने सभी को ट्रेनिंग दी। वह भी अपना काम छोड़कर गांव ही आ गए।
इसके बाद समूह की महिलाओं ने लोअर और टीशर्ट बनाने का काम शुरू किया। शुरुआत में इनके सामने बाजार का संकट था। राजू ने दुकान- दुकान जाकर कपड़े बेचे। मेहनत और जज्बे के दम पर आज समूह हर महीने चार हजार से ज्यादा लोअर और टीशर्ट बनाकर बेच रहा है।
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कानपुर से आता है कच्चा माल
-- - सावित्री देवी ने बताया कि मुंबई की अपेक्षा यहां कच्चा माल मिलने में समस्या होती है। कानपुर से कच्चा माल मंगाया जाता है। हालांकि यह मुंबई में मिलने वाले कच्चे माल की अपेक्षा थोड़ा महंगा है।
महिलाएं करती हैं सिलाई
सावित्री ने बताया कि समूह की महिला और उनके परिवार के लोग कपड़े की सिलाई करते हैं। इसके लिए प्रति पीस 15-20 रुपये दिए जाते हैं। एक महिला दिन भर में 20-25 कपड़े सिल लेती है। बताया कि धनराशि की मांग की गई है। अगर मिली तो कारोबार को और आगे बढ़ाया जाएगा।
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-- महिलाओं का काम बेहतर है। इनकी ओर से धनराशि की मांग की गई है। इसके लिए मार्च के बाद योजना बनाकर धनराशि देने की तैयारी है। इसके लिए अधिकारियों से बात की जा रही है। - दिव्यांशु सिंह, जिला मिशन प्रबंधक, एनआरएलएम
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पिंडरा सहावनपुर गांव की सावित्री देवी समेत अन्य महिलाओं संग गौरी महिला स्वयं सहायता समूह का गठन किया। समूह से जुड़ीं महिलाओं को सावित्री ने कपड़ा बनाने के लिए प्रेरित किया। मुंबई में कपड़े बनाने का काम कर रहे उनके पति राजू गौतम ने सभी को ट्रेनिंग दी। वह भी अपना काम छोड़कर गांव ही आ गए।
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इसके बाद समूह की महिलाओं ने लोअर और टीशर्ट बनाने का काम शुरू किया। शुरुआत में इनके सामने बाजार का संकट था। राजू ने दुकान- दुकान जाकर कपड़े बेचे। मेहनत और जज्बे के दम पर आज समूह हर महीने चार हजार से ज्यादा लोअर और टीशर्ट बनाकर बेच रहा है।
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कानपुर से आता है कच्चा माल
महिलाएं करती हैं सिलाई
सावित्री ने बताया कि समूह की महिला और उनके परिवार के लोग कपड़े की सिलाई करते हैं। इसके लिए प्रति पीस 15-20 रुपये दिए जाते हैं। एक महिला दिन भर में 20-25 कपड़े सिल लेती है। बताया कि धनराशि की मांग की गई है। अगर मिली तो कारोबार को और आगे बढ़ाया जाएगा।