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कौशांबी :  अस्पताल से घर पहुंचा संपत, डॉक्टर ने कहा- आम आदमी की तरह बोल सकेंगे

Sun, 11 Sep 2022 09:22 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी
अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 11 Sep 2022 09:22 PM IST
सार

संपत की माली हालत ठीक नहीं है। हाल ही में उसने बेटी की शादी की थी। इसके लिए पत्नी बन्नो ने स्वयं सहायता समूह से ऋण ले लिया था। उसी ऋण को चुकाने के चक्कर में संपत ने गांव के अन्य लोगों से भी उधारी पर पैसा ले रखा है।

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Sampat reached home from the hospital, the doctor said - will be able to speak like a common man
कौशाम्बी : संपत। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

शक्तिपीठ मां शीतला के दरबार में अर्पित करने के लिए जीभ काटने वाला संपत लाल रविवार को अस्पताल से घर पहुंच गया। दोपहर दो बजे के बाद डॉक्टरों ने अस्पताल से छुट्टी दे दी। पश्चिमशरीरा कोतवाली के पूरबशरीरा गांव का संपत (40) शनिवार सुबह अपनी पत्नी बन्नो देवी के साथ शक्तिपीठ कड़ा धाम दर्शन करने गया था। दर्शन-पूजन और परिक्रमा के बाद उसने जेब से ब्लेड निकाली और मां को अर्पित करने के लिए जीभ काट ली। इससे उसकी हालत बिगड़ गई।

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खून बहता देख मंदिर परिसर में हड़कंप मच गया। आननफानन उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना को लेकर परिवार के सदस्यों ने कर्ज में डूबे होने की बात बताई थी।
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अस्पताल में इलाज करने वाले चिकित्सक डॉ. विवेक केसरवानी ने बताया कि संपत को छुट्टी दे दी गई है। अब वह ठीक है और आम लोगों की तरह बात भी कर सकता है। बस कुछ दिनों तक उसे अपना ध्यान रखना होगा। 

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बेटी की शादी के लिए समूह से लिया था ऋण
संपत की माली हालत ठीक नहीं है। हाल ही में उसने बेटी की शादी की थी। इसके लिए पत्नी बन्नो ने स्वयं सहायता समूह से ऋण ले लिया था। उसी ऋण को चुकाने के चक्कर में संपत ने गांव के अन्य लोगों से भी उधारी पर पैसा ले रखा है। संपत और उसकी पत्नी मेहनत- मजदूरी करने के बाद भी कर्जा भर नहीं पा रहे हैं। इसी से आजिज आकर उक्त कदम उठाने की बात कही जा रही है। 


पैसा नहीं होने पर दूसरे के घर छिप जाता है दंपती
पड़ोसी दिनेश कुमार के अनुसार स्वयं सहायता समूह से ऋण की वसूली के लिए हर सप्ताह लोग आते रहते हैं। जिस सप्ताह देने के लिए पैसा नहीं रहता है, दंपती पड़ोसियों के घर में जाकर छिप जाता है।  संपत की पत्नी के अनुसार वसूली के लिए आने वाले लोग मिलने पर बिना पैसा लिए नहीं जाते हैं। बेटी मनीता ने बताया कि उन्हें सरकार की तरफ से उज्ज्वला योजना के तहत गैस सिलिंडर और चूल्हा मिला है, लेकिन आर्थिक संकट के कारण दोबारा गैस नहीं भरवा पाए हैं।  

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