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नोटबंदी : संकट में देश-विदेश से आए धर्मगुरू
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Thu, 08 Dec 2016 12:56 AM IST
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करारी व रहीमपुर मोलानी में अमारी का जुलूस निकलना है। नौहाखानी के लिए अंजुमनों ने देश-विदेश से धर्मगुुरूओं को बुलाया है। नोटबंदी की मार का असर यह है कि अकीदत व एहतेराम के साथ बुलाए गए धर्मगुरूओं को अंजुमने भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। इससे उनका जुलूस भी प्रभावित होने लगा है। अंजुमनें मजदूरों को दिहाड़ी नहीं दे पा रहे हैं।
करारी नगर पंचायत में गुरुवार को अमारी का जुलूस निकलना है। इस जुलूस में बड़े पैमाने पर इंतजाम किया जाता है। जुलूस में लगभग दो से ढाई लाख का खर्च आता है। इसमें से अधिकांश रकम मजदूर व फूल वाले को दी जाती है। बैंकाें से कैश नहीं मिल पा रहा है। अंजुमन असगरिया जुलूस निकालती है। अंजुमन असगरिया का खाता बैंक आफ बड़ौदा की शाखा करारी में खुला है। अंजुमन असगरिया के खजांची एजाज असगर लगातार प्रयास कर रहे हैं कि उन्हें बैंक से कैश मिल जाए तो वह भुगतान करें। नोटबंदी का असर यह है कि ईरान से आए मौलाना अजादार हुसैन समेत छत्तीसगढ़, बिहार, दिल्ली के धर्मगुरूओं को भी वह भुगतान नहीं कर पा रहे हैं।
चाय-नाश्ता और बाहर से आने वाले लोगों को खाने-पीने का भी इंतजाम अंजुमन नहीं कर पा रहे हैं। यही स्थिति रहीमपुर मोलानी गांव की अंजुमन का है। रहीमपुर मोलानी गांव की अंजुमन के सचिव हैदर अब्बास का कहना है कि तीन दिन पहले उन्होंने बीओबी बैंक में चेक लगाया था। अभी तक भुगतान नहीं हुआ है। बैंक में कैश आया था, लेकिन दो हजार रुपये से ज्यादा नहीं दिया जा रहा था। जिसे लेने से उन्होंने इंकार कर दिया था। बुधवार को भी उन्हें भुगतान नहीं हुआ है। कहा कि चेक लेने के लिए ठेकेदार व फूलवाले तैयार नहीं हैं। इन परिस्थितियों में वह क्या करें, उन्हें समझ में नहीं आ रहा है।
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करारी नगर पंचायत में गुरुवार को अमारी का जुलूस निकलना है। इस जुलूस में बड़े पैमाने पर इंतजाम किया जाता है। जुलूस में लगभग दो से ढाई लाख का खर्च आता है। इसमें से अधिकांश रकम मजदूर व फूल वाले को दी जाती है। बैंकाें से कैश नहीं मिल पा रहा है। अंजुमन असगरिया जुलूस निकालती है। अंजुमन असगरिया का खाता बैंक आफ बड़ौदा की शाखा करारी में खुला है। अंजुमन असगरिया के खजांची एजाज असगर लगातार प्रयास कर रहे हैं कि उन्हें बैंक से कैश मिल जाए तो वह भुगतान करें। नोटबंदी का असर यह है कि ईरान से आए मौलाना अजादार हुसैन समेत छत्तीसगढ़, बिहार, दिल्ली के धर्मगुरूओं को भी वह भुगतान नहीं कर पा रहे हैं।
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चाय-नाश्ता और बाहर से आने वाले लोगों को खाने-पीने का भी इंतजाम अंजुमन नहीं कर पा रहे हैं। यही स्थिति रहीमपुर मोलानी गांव की अंजुमन का है। रहीमपुर मोलानी गांव की अंजुमन के सचिव हैदर अब्बास का कहना है कि तीन दिन पहले उन्होंने बीओबी बैंक में चेक लगाया था। अभी तक भुगतान नहीं हुआ है। बैंक में कैश आया था, लेकिन दो हजार रुपये से ज्यादा नहीं दिया जा रहा था। जिसे लेने से उन्होंने इंकार कर दिया था। बुधवार को भी उन्हें भुगतान नहीं हुआ है। कहा कि चेक लेने के लिए ठेकेदार व फूलवाले तैयार नहीं हैं। इन परिस्थितियों में वह क्या करें, उन्हें समझ में नहीं आ रहा है।
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