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रेफरल सेंटर बने हैं जिले के सरकारी अस्पताल
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referal center
- फोटो : KAUSHAMBI
मंझनपुर। जिले के सरकारी अस्पताल मरीजों को इलाज कम दर्द ज्यादा दे रहे हैं। सस्ते इलाज की लालच में मरीज एंबुलेंस की मदद से सीएचसी पहुंच तो जाता है लेकिन चिकित्सकों के अभाव में उसे रेफर कर दिया जाता है। नतीजतन, मरीज एंबुलेंस में ही कराहने के लिए मजबूर हैं। अमर उजाला टीम ने शुक्रवार को एफआरयू (फर्स्ट रेफरल यूनिट) का दर्जा प्राप्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की पड़ताल किया तो चौंकाने वाली हकीकत सामने आई। अस्पताल के ओपीडी में तो मरीजों की संख्या काफी रही लेकिन किसी गंभीर मर्ज के इलाज का जिक्र तक नहीं था। ऐसे में साफ है कि सीएचसी में सिर्फ सर्दी-जुकाम आदि के मरीजों को ही स्वास्थ्य लाभ मिल पाता है। बाकी के मरीज इलाज के लिए इस अस्पताल से उस अस्पताल तक भटकने के लिए मजबूर रहते हैं।
सीएचसी बारा में नहीं होती है सर्जरी
बारा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बारा के ओपीडी रजिस्टर पर गौर करें तो यहां सितंबर माह में 218 ओपीडी ही हो सकी। यहां सर्जरी से जुड़े 22 मामले आए लेकिन सभी को रेफर कर दिया गया। अस्पताल में प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं के अल्ट्रासाउंड की जरुरत होती है लेकिन एक भी महिला का अस्पताल में अल्ट्रासाउंड नहीं हुआ। 170 महिलाओं को बाहर से अल्ट्रासाउंड कराना पड़ा। अस्पताल में सात चिकित्सक के पद है लेकिन सिर्फ तीन तैनात है। महिला, बाल रोग, सर्जन, अस्थि और रेडियोलॉजिस्ट के पद काफी दिनों से रिक्त हैं।
सिराथू सीएचसी में आए पांच हजार, ऑपरेशन एक भी नहीं
सिराथू। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के गृह नगर सिराथू स्थित सीएचसी का हाल और भी खराब है। यहां पर 5357 मरीजों का नाम सितंबर माह की ओपीडी में दर्ज है। अस्पताल के आंकड़ों पर गौर करें तो दिसंबर के बाद से अब तक एक भी ऑपरेशन नहीं हुआ। 30 बेड के इस अस्पताल में सात चिकित्सकों के सापेक्ष महज पांच तैनात हैं। अस्थि व सर्जरी के चिकित्सक नहीं होने से यहां 46 मरीजों को जिला अस्पताल रेफर किया गया।
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सीएचसी कड़ा में नहीं होता एक्स-रे, सर्जरी करानी होती है बाहर
सिराथू। गंगा नदीं के किनारे स्थित सीएचसी कड़ा में सितंबर माह में 2978 मरीजों का इलाज किया गया। यहां एक्स-रे के मरीजों को रेफर किया जाता है। सर्जन नहीं होने से यहां ऑपरेशन नहीं होते। 40 मरीज अन्य रेफर किए गए। बाल और अस्थि रोग के भी चिकित्सक नहीं है।
चायल और नेवादा पीएचसी भी रेफर होते हैं मरीज
चायल। पीएचसी नेवादा में सितंबर माह में 143 महिलाएं प्रसव के लिए आई, जिसमें 15 को रेफर किया गया। छह स्टाफ नर्सो पर ही प्रसव कराने का जिम्मा है। यहां सिर्फ तीन चिकित्सक ही नियुक्त हैं। 6434 मरीजों के पंजीकरण का दावा किया गया जिसमें चार रेफर किए गए। पीएचसी चायल का भी यही हाल है। यहां 145 महिलाओं ने प्रसव के लिए पंजीकरण कराया जिसमें 12 रेफर की गई। 7900 मरीजों की ओपीडी हुई। प्रसव कराने का जिम्मा तीन स्टाफ नर्स पर है। यहां के मरीज सीधे प्रयागराज के लिए रेफर किए जाते हैं। इस वजह से उनका आंकड़ा नहीं मिल सका।
जिले में चिकित्सकों की कमी के कारण सीएचसी में पूरा स्टाफ नहीं है। खास तौर पर बाल रोग, स्त्री रोग और अस्थि रोग के चिकित्सकों की काफी कमी है। इसी कारण सीएचसी से मरीजों को जिला अस्पताल के लिए रेफर किया जाता है। जिला अस्पताल में भी मरीज को लाभ नहीं मिलने पर प्रयागराज रेफर किया जाता है।
डॉ. हिंदप्रकाश मणि, डिप्टी सीएमओ
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सीएचसी बारा में नहीं होती है सर्जरी
बारा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बारा के ओपीडी रजिस्टर पर गौर करें तो यहां सितंबर माह में 218 ओपीडी ही हो सकी। यहां सर्जरी से जुड़े 22 मामले आए लेकिन सभी को रेफर कर दिया गया। अस्पताल में प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं के अल्ट्रासाउंड की जरुरत होती है लेकिन एक भी महिला का अस्पताल में अल्ट्रासाउंड नहीं हुआ। 170 महिलाओं को बाहर से अल्ट्रासाउंड कराना पड़ा। अस्पताल में सात चिकित्सक के पद है लेकिन सिर्फ तीन तैनात है। महिला, बाल रोग, सर्जन, अस्थि और रेडियोलॉजिस्ट के पद काफी दिनों से रिक्त हैं।
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सिराथू सीएचसी में आए पांच हजार, ऑपरेशन एक भी नहीं
सिराथू। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के गृह नगर सिराथू स्थित सीएचसी का हाल और भी खराब है। यहां पर 5357 मरीजों का नाम सितंबर माह की ओपीडी में दर्ज है। अस्पताल के आंकड़ों पर गौर करें तो दिसंबर के बाद से अब तक एक भी ऑपरेशन नहीं हुआ। 30 बेड के इस अस्पताल में सात चिकित्सकों के सापेक्ष महज पांच तैनात हैं। अस्थि व सर्जरी के चिकित्सक नहीं होने से यहां 46 मरीजों को जिला अस्पताल रेफर किया गया।
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सीएचसी कड़ा में नहीं होता एक्स-रे, सर्जरी करानी होती है बाहर
सिराथू। गंगा नदीं के किनारे स्थित सीएचसी कड़ा में सितंबर माह में 2978 मरीजों का इलाज किया गया। यहां एक्स-रे के मरीजों को रेफर किया जाता है। सर्जन नहीं होने से यहां ऑपरेशन नहीं होते। 40 मरीज अन्य रेफर किए गए। बाल और अस्थि रोग के भी चिकित्सक नहीं है।
चायल और नेवादा पीएचसी भी रेफर होते हैं मरीज
चायल। पीएचसी नेवादा में सितंबर माह में 143 महिलाएं प्रसव के लिए आई, जिसमें 15 को रेफर किया गया। छह स्टाफ नर्सो पर ही प्रसव कराने का जिम्मा है। यहां सिर्फ तीन चिकित्सक ही नियुक्त हैं। 6434 मरीजों के पंजीकरण का दावा किया गया जिसमें चार रेफर किए गए। पीएचसी चायल का भी यही हाल है। यहां 145 महिलाओं ने प्रसव के लिए पंजीकरण कराया जिसमें 12 रेफर की गई। 7900 मरीजों की ओपीडी हुई। प्रसव कराने का जिम्मा तीन स्टाफ नर्स पर है। यहां के मरीज सीधे प्रयागराज के लिए रेफर किए जाते हैं। इस वजह से उनका आंकड़ा नहीं मिल सका।
जिले में चिकित्सकों की कमी के कारण सीएचसी में पूरा स्टाफ नहीं है। खास तौर पर बाल रोग, स्त्री रोग और अस्थि रोग के चिकित्सकों की काफी कमी है। इसी कारण सीएचसी से मरीजों को जिला अस्पताल के लिए रेफर किया जाता है। जिला अस्पताल में भी मरीज को लाभ नहीं मिलने पर प्रयागराज रेफर किया जाता है।
डॉ. हिंदप्रकाश मणि, डिप्टी सीएमओ