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Kaushambi News: मेडिकल कॉलेज में रीजेंट और किट खत्म, बिन जांच लौट रहे मरीज
Tue, 28 Oct 2025 01:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Tue, 28 Oct 2025 01:31 AM IST
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मेडिकल कॉलेज की पैथोलॉजी में जांच कराने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाते मरीज। संवाद
मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग में पिछले 15 दिन से विडाल टेस्ट के रीजेंट और हेपेटाइटिस-बी जांच की किट खत्म है। ऐसे में यहां पर रोजाना 50 से अधिक बुखार और करीब 50 से 60 हेपेटाइटिस-बी के संदिग्ध मरीजों की जांच नहीं हो रही है। कई लोग मजबूरन निजी लैब में महंगे दामों पर जांच कराने के लिए विवश हैं।
मंझनपुर के अमित कुमार ने बताया कि मां को तीन दिन से लीवर की जांच कराने आ रहा हूं। हर बार यही कहा जाता है कि किट नहीं है। एक अन्य मरीज रीता देवी ने कहा कि बाहर जांच कराने में 300 से 400 रुपये तक खर्च हो रहे हैं। जबकि मरीज सानू ने बताया कि अभी कुछ देर पहले डॉक्टर ने दो जांच कराने की सलाह दी है जिसमें एक सीबीसी और दूसरी विडाल यानी टायफाइड। यहां पर केवल सीबीसी ही जांच की गई और विडाल के लिए बाहर भेज दिया गया।
बाहर जांच कराने पर 100 रुपये में हुई है। नाम न छापने की शर्त पर एक कर्मचारी ने बताया कि विडाल जांच की रीजेंट करीब 15 दिनों से नहीं है। इसी तरह हेपेटाइटिस-बी की जांच किट का अभाव है। जांच सामग्री के लिए कई मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों से कहा गया लेकिन अभी तक जांच किट उपलब्ध नहीं हो पाई।
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इधर, विभागीय अधिकारियों ने बताया कि प्रस्ताव भेजा जा चुका है लेकिन आपूर्ति में देरी हो रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि किट मिलते ही जांच फिर से शुरू कर दी जाएगी। वहीं तीमारदार रमेश, संतोष, अनिल और रन्नो देवी ने बताया कि जब जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिल चुका है, तब ऐसी मूलभूत जांच सुविधाओं का ठप होना गंभीर लापरवाही है।
मुख्य अस्पताल और एमसीएच विंग की ओपीडी में बैठने वाले ज्यादातर विशेषज्ञों ने बताया कि बुखार और हेपेटाइटिस के बढ़ते मामलों के बीच जांच बंद रहना स्वास्थ्य सेवाओं के लिए चिंताजनक है।
-एक युवक ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर की है शिकायत्र
एक युवक ने 23 अक्तूबर को मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की है कि मेडिकल कॉलेज के मुख्य अस्पताल स्थित पैथोलॉजी में बुखार की जांच के लिए गया था। डॉक्टर ने खून की जांच लिखी लेकिन प्रयोगशाला में बताया गया कि टायफाइड और हेपेटाइटिस-बी की जांच नहीं हो रही है। जब शिकायतकर्ता ने कारण पूछा तो लैब कर्मियों ने बताया कि जांच किट उपलब्ध नहीं है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, खून की जांच करने वाले केंद्र के डॉक्टरों ने कहा कि प्राचार्य को कई बार जांच किट की मांग भेजी गई लेकिन अभी तक खरीद नहीं हुई। फिलहाल यह जांच केवल भर्ती मरीजों की हो रही है। मजबूरन युवक को निजी लैब में जांच करानी पड़ी।
शिकायतकर्ता ने प्रशासन से मांग की कि जब जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज बन चुका है तो सभी जांच सुविधाएं मरीजों को यहीं मिलनी चाहिए ताकि उन्हें बाहर न जाना पड़े और मरीजों को उचित इलाज मिल सके।
मेडिकल कॉलेज में जांच की सभी व्यवस्थाएं सुचारू हैं। कुछ जांच की सामग्री खत्म थी जिसके लिए शासन को पत्राचार किया गया है। आपूर्ति की प्रक्रिया जारी है और उम्मीद है कि जल्द सभी जांचें सामान्य रूप से शुरू हो जाएंगी। - डॉ. हरिओम कुमार सिंह, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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मंझनपुर के अमित कुमार ने बताया कि मां को तीन दिन से लीवर की जांच कराने आ रहा हूं। हर बार यही कहा जाता है कि किट नहीं है। एक अन्य मरीज रीता देवी ने कहा कि बाहर जांच कराने में 300 से 400 रुपये तक खर्च हो रहे हैं। जबकि मरीज सानू ने बताया कि अभी कुछ देर पहले डॉक्टर ने दो जांच कराने की सलाह दी है जिसमें एक सीबीसी और दूसरी विडाल यानी टायफाइड। यहां पर केवल सीबीसी ही जांच की गई और विडाल के लिए बाहर भेज दिया गया।
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बाहर जांच कराने पर 100 रुपये में हुई है। नाम न छापने की शर्त पर एक कर्मचारी ने बताया कि विडाल जांच की रीजेंट करीब 15 दिनों से नहीं है। इसी तरह हेपेटाइटिस-बी की जांच किट का अभाव है। जांच सामग्री के लिए कई मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों से कहा गया लेकिन अभी तक जांच किट उपलब्ध नहीं हो पाई।
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इधर, विभागीय अधिकारियों ने बताया कि प्रस्ताव भेजा जा चुका है लेकिन आपूर्ति में देरी हो रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि किट मिलते ही जांच फिर से शुरू कर दी जाएगी। वहीं तीमारदार रमेश, संतोष, अनिल और रन्नो देवी ने बताया कि जब जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिल चुका है, तब ऐसी मूलभूत जांच सुविधाओं का ठप होना गंभीर लापरवाही है।
मुख्य अस्पताल और एमसीएच विंग की ओपीडी में बैठने वाले ज्यादातर विशेषज्ञों ने बताया कि बुखार और हेपेटाइटिस के बढ़ते मामलों के बीच जांच बंद रहना स्वास्थ्य सेवाओं के लिए चिंताजनक है।
-एक युवक ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर की है शिकायत्र
एक युवक ने 23 अक्तूबर को मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की है कि मेडिकल कॉलेज के मुख्य अस्पताल स्थित पैथोलॉजी में बुखार की जांच के लिए गया था। डॉक्टर ने खून की जांच लिखी लेकिन प्रयोगशाला में बताया गया कि टायफाइड और हेपेटाइटिस-बी की जांच नहीं हो रही है। जब शिकायतकर्ता ने कारण पूछा तो लैब कर्मियों ने बताया कि जांच किट उपलब्ध नहीं है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, खून की जांच करने वाले केंद्र के डॉक्टरों ने कहा कि प्राचार्य को कई बार जांच किट की मांग भेजी गई लेकिन अभी तक खरीद नहीं हुई। फिलहाल यह जांच केवल भर्ती मरीजों की हो रही है। मजबूरन युवक को निजी लैब में जांच करानी पड़ी।
शिकायतकर्ता ने प्रशासन से मांग की कि जब जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज बन चुका है तो सभी जांच सुविधाएं मरीजों को यहीं मिलनी चाहिए ताकि उन्हें बाहर न जाना पड़े और मरीजों को उचित इलाज मिल सके।
मेडिकल कॉलेज में जांच की सभी व्यवस्थाएं सुचारू हैं। कुछ जांच की सामग्री खत्म थी जिसके लिए शासन को पत्राचार किया गया है। आपूर्ति की प्रक्रिया जारी है और उम्मीद है कि जल्द सभी जांचें सामान्य रूप से शुरू हो जाएंगी। - डॉ. हरिओम कुमार सिंह, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज