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ओवरलोडिंग,लो-वोल्टेज व फाल्ट की समस्या से उपभोक्ता परेशान

Fri, 13 Sep 2019 12:51 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 13 Sep 2019 12:51 AM IST
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problem of electricity cut
problem of electricity cut - फोटो : KAUSHAMBI
मंझनपुर। इसे अफसरों की चूक कहें या फिर जल्दबाजी में लिया गया फैसला। सौभाग्य और पं. दीन दयाल उपाध्याय योजना के तहत गांवों में बिजली तो पहुंचा कर लोगों को कनेक्शन दिया गया। पर, ट्रांसफार्मरों की क्षमता में इजाफा नहीं हो सका। नतीजतन रोजाना जिले में करीब 10 से 15 गांव के ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं। लगातार फुंकने के कारण वर्कशॉप से लोगों को समय पर ट्रांसफार्मर नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में विद्युत कनेक्शन के बाद भी ग्रामीणों को कूलर-पंखा आदि की सुविधा नसीब नहीं हो रही है।
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सौभाग्य योजना के तहत पिछले दिनों जिले के 50 हजार घरों को मुफ्त कनेक्शन बांटा गया है। ये वो इलाके थे जहां पर बिजली की लाइन नहीं थी। एल एंड टी व विश्वनाथ कंपनी ने सौभाग्य के तहत गांवों को ऊर्जीकृत कर कनेक्शन बांटने का दावा किया। कार्यदाई संस्था को लोकसभा चुनाव सेे पहले ही कार्य पूरा करना था लेकिन धीमी प्रगति के कारण आधा-अधूरा ही काम हो सका। नतीजतन लोगों को मुफ्त कनेक्शन देने की जल्दबाजी में 50 हजार लोगों को नए कनेक्शन तो दे दिए गए लेकिन गांवों के ट्रांसफार्मर की क्षमता नहीं बढ़ाई गई। इसका खामियाजा अब गांव के उन उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है, जिनके पास पहले से ही कनेक्शन था। ट्रांसफार्मर की क्षमता नहीं बढने के कारण गांवों में लो-वोल्टेज व फाल्ट होने की समस्या बढ़ गई है। इस बाबत अवर अभियंता स्टोर रिंकू सेठ का कहना है कि करीब सौ ट्रांसफार्मरों की पेन्डेंसी है। रोजाना 10 से 15 ट्रांसफार्मरों के फुंकने की शिकायत आ रही है। जितने ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं, उतने का ही निर्माण कराकर जेई की रिपोर्ट पर उसे भेजा जा रहा है।
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अब जेई की रिपोर्ट पर मिलेगा ट्रांसफार्मर
मंझनपुर। भाजपा सरकार ने फुंके ट्रांसफार्मरों की ऑनलाइन शिकायत करने की व्यवस्था की है। विभाग के टॉल फ्री नंबर 1912 पर फोन करके शिकायत दर्ज कराई जाती है। नियम के मुताबिक 72 घंटे में ट्रांसफार्मर को बदला जाना है। पर, जिले में सरकार का ये दावा हवा-हवाई साबित हो रहा है।
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सरकारी दावे धड़ाम, पीड़ितों की सुनें जुबानी
मंझनपुर। अमर उजाला ने ट्रांसफार्मरों की पेडेंसी के बाबत पड़ताल किया तो 72 घंटे में ट्रांसफार्मर बदले जाने का सच सामने आया। गोपसहसा उपकेंद्र से जुड़े गुरौली गांव के जीतेंद्र सिंह ने बताया कि उनके नलकूप में लगा 25 केवीए का ट्रांसफार्मर चार अगस्त से फुंका है। आफ लाइन और ऑन लाइन शिकायत के बाद भी ट्रांसफार्मर को बदला नहीं जा रहा। इसी तरह वर्कशॉप में चक्कर काट रहे नौबस्ता के संदीप का कहना है कि उनके गांव का ट्रांसफार्मर पांच अगस्त से फुंका है। काफी प्रयास के बाद भी ट्रांसफार्मर बदला नहीं जा सका।
खुद लाओ और ले भी जाओ, ठेकेदार का पैसा जेब में
मंझनपुर। बिजली विभाग की व्यवस्था है कि अगर किसी उपभोक्ता का ट्रांसफार्मर फुंकता है तो ऑनलाइन शिकायत के बाद सम्बंधित पावर हाउस का ठेकेदार फुंके ट्रांसफार्मर लेकर वर्कशॉप आएगा। ट्रांसफार्मर मरम्मत या दूसरा मिलने के बाद ठेकेदार ही मौके पर ट्रांसफार्मर अपने वाहन से पहुंचाएगा। इस सारी कवायद का पैसा शासन देता है लेकिन पर, जिले में उल्टी गंगा बह रही है। यहां उपभोक्ता को खुद के पैसे से ट्रांसफार्मर वर्कशॉप तक लाना और ले जाना पड़ रहा है।

बरासत के दिनों में ट्रांसफार्मर फुंकने की समस्या ज्यादा होती है। पावर हाउस के जेई की अनुमति के बाद ही दूसरा ट्रांसफार्मर दिया जाता है। ट्रांसफार्मरों की क्षमता में बढोत्तरी नहीं करना भी उनके फुंकने का बड़ा कारण है।
रिंकू सेठ, अवर अभियंता, वर्कशॉप कौशाम्बी
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