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बूंद-बूंद पानी काे भटक रहे लोग
काौश्ााम्बी ब्यूरो
Updated Wed, 17 Aug 2016 01:25 AM IST
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विकास खंड कौशाम्बी के छेकवा गांव में करीब एक करोड़ की लागत से बनी पानी की टंकी करीब दो साल से ठप है। इससे पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही है। लगभग दो सौ हैंडपंप भी पानी नहीं दे रहे हैं। इससे भी पेयजल संकट और गहराया गया है। इस वजह से लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। इससे इनमें आक्रोश है।
छेकवा गांव में करीब दो दशक पहले टंकी का निर्माण कराया गया था। इसके बाद छेकवा, महिला, भकंदा, जुगराजपुर, धाना, अइगवां, लाला का पुरवा, पन्ना का पुरवा आदि गांवों को पेयजल की आपूर्ति की जाती थी, लेकिन दो साल से लोगों को चुल्लूभर पानी के लिए भटकना पड़ता है। ग्रामीण खेतों की सिंचाई के लिए लगे पंपों और दूसरों के घरों में लगे हैंडपंपों से पानी भरते हैं। छेकवा निवासी खालिक अहमद का कहना है कि पहले संबंधित विभाग के अभियंता ने बिजली लाइन में खराबी बताकर पंप को बंद कर दिया था। बिजली विभाग ने सब दुरुस्त करा दिया तो अब टंकी में पानी चढ़ाने वाले पाइप में खराबी बताई जा रही है। इससे लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। मई और जून में ग्रामीण बेहाल हो जाते है। वह अपने लिए किसी तरह पानी का इंतजाम कर जुटा लेते हैं, लेकिन मवेशियों को उन्हें यमुना ले जाना पड़ता था। बताया जाता है कि कई गांवों में हैंडपंपों की स्थिति बेहद खराब है। तमाम गांवों में लगभग दो सौं हैंडपंप पानी नहीं दे रहे हैं। इससे भी पेयजल संकट और गहरा गया है। लोगों का कहना है कि हैंडपंपों को दुरुस्त नहीं कराया जा रहा है।
ग्राम प्रधान छेकवा चंद्रशेखर सिंह का कहना है िककि करीब 23 साल से ग्रामीणों को पानी की टंकी पेयजल मुहैया कराया जा रहा था। करीब दो साल से लोगों को संबंधित विभाग की अनदेखी से पानी टंकी का लाभ नहीं मिल रहा है। कोई न कोई कमी बताकर विभाग के जिम्मेदार पंप को बंद किए हुए हैं। इससे लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में तो लोग बारिश का पानी बर्तनों में भरकर पी रहे हैं। वहीं जेई जलनिगम राजीव कुमार का कहना है किछेकवा पेयजल टंकी विद्युत लाइन आदि में खराबी के चलते बंद हुई थी। काफी दिनों से जलापूर्ति नहीं होने से पाइप में खराबी आ गई। पाइप कानपुर में मिलेगी। उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। जब पाइप मिलेगी तो उसे लगवाकर टंकी से जलापूर्ति शुरू करा दी जाएगी।
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छेकवा गांव में करीब दो दशक पहले टंकी का निर्माण कराया गया था। इसके बाद छेकवा, महिला, भकंदा, जुगराजपुर, धाना, अइगवां, लाला का पुरवा, पन्ना का पुरवा आदि गांवों को पेयजल की आपूर्ति की जाती थी, लेकिन दो साल से लोगों को चुल्लूभर पानी के लिए भटकना पड़ता है। ग्रामीण खेतों की सिंचाई के लिए लगे पंपों और दूसरों के घरों में लगे हैंडपंपों से पानी भरते हैं। छेकवा निवासी खालिक अहमद का कहना है कि पहले संबंधित विभाग के अभियंता ने बिजली लाइन में खराबी बताकर पंप को बंद कर दिया था। बिजली विभाग ने सब दुरुस्त करा दिया तो अब टंकी में पानी चढ़ाने वाले पाइप में खराबी बताई जा रही है। इससे लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। मई और जून में ग्रामीण बेहाल हो जाते है। वह अपने लिए किसी तरह पानी का इंतजाम कर जुटा लेते हैं, लेकिन मवेशियों को उन्हें यमुना ले जाना पड़ता था। बताया जाता है कि कई गांवों में हैंडपंपों की स्थिति बेहद खराब है। तमाम गांवों में लगभग दो सौं हैंडपंप पानी नहीं दे रहे हैं। इससे भी पेयजल संकट और गहरा गया है। लोगों का कहना है कि हैंडपंपों को दुरुस्त नहीं कराया जा रहा है।
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ग्राम प्रधान छेकवा चंद्रशेखर सिंह का कहना है िककि करीब 23 साल से ग्रामीणों को पानी की टंकी पेयजल मुहैया कराया जा रहा था। करीब दो साल से लोगों को संबंधित विभाग की अनदेखी से पानी टंकी का लाभ नहीं मिल रहा है। कोई न कोई कमी बताकर विभाग के जिम्मेदार पंप को बंद किए हुए हैं। इससे लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में तो लोग बारिश का पानी बर्तनों में भरकर पी रहे हैं। वहीं जेई जलनिगम राजीव कुमार का कहना है किछेकवा पेयजल टंकी विद्युत लाइन आदि में खराबी के चलते बंद हुई थी। काफी दिनों से जलापूर्ति नहीं होने से पाइप में खराबी आ गई। पाइप कानपुर में मिलेगी। उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। जब पाइप मिलेगी तो उसे लगवाकर टंकी से जलापूर्ति शुरू करा दी जाएगी।
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