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मार्च में ही सूखने लगे तालाब व पोखर
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Wed, 01 Mar 2017 11:44 PM IST
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kaushambi
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मार्च के महीने में ही तालाब व पोखर सूखने लगे हैं। पछुवा हवा भी सितम ढा रही है। इससे पानी तेजी से सूख रहा है। गर्मी दस्तक दे चुकी है, मार्च महीने में भाष्कर देव इस तरह का तेवर दिखाएंगे इसका लोगों को अंदाजा नहीं था। मंझनपुर तहसील में करीब ढाई हजार तालाब हैं। इनमें से अधिकांश पर कब्जा है। तालाबों का अस्तित्व बचाने के लिए मनरेगा, मुख्यमंत्री जल बचाओ अभियान समेत कई योजनाएं शुरू हुई, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। सूख रहे तालाब गर्मी के दिनों में भयावह स्थिति की तस्वीर दिखा रहे हैं, इसके बाद भी अधिकारी तालाब व पोखर बचाने के लिए संजीदा नहीं हैं।
मंझनपुर तहसील में करीब चार सौ से ज्यादा तालाबों का सुंदरीकरण कराने के लिए मनरेगा से रुपये आवंटित हुए। इसके अलावा मुख्यमंत्री जल बचाओ अभियान के तहत मंझनपुर, सरसवां व कौशाम्बी ब्लाक के तालाबों को संरक्षित करने का प्रस्ताव तैयार हुआ, लेकिन सबकुछ कागज में ही सीमित रहा। योजनाएं धरातल पर नहीं उतरीं। मनरेगा का रुपया लूटखसोट में चला गया। मार्च महीने में ही तालाब व पोखर सूखने लगे हैं।
इनका पानी तेजी से घट रहा है। पछुवा हवा नमी निगलने लगी तो इन तालाब व पोखर में मोटर लगाकर लोगों ने पानी निकालना शुरू कर दिया। प्राकृतिक संसाधन से हुई छेड़छाड़ का खामियाजा आने वाले दिनों में लोग भुगतेंगे। भीषण गर्मी के दिनों में तालाबों के सूखने पर मवेशियों को पानी पिलाने का कोई दूसरा इंतजाम नहीं है। हैंडपंप अथवा निजी नलकूप ही एक मात्र सहारा रहेंगे। अभी से स्थितियां अनुकूल नहीं दिख रही हैं, इसके बाद पानी बचाने की मुहिम नहीं शुरू हो सकी। अधिकारियों ने भी फिलहाल अभी आंखें मूंद रखी हैं। गर्मी के दिनों में इन तालाबों में पानी कहां से आएगा, इस पर विचार ही नहीं किया जा रहा है।
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सूखने पर पानी का कैसे होगा इंतजाम
तालाब व पोखर तेजी से सूख रहे हैं। अप्रैल माह तक तालाबों से धूल उड़ सकती है। भीषण गर्मी पड़ने पर अग्निकांड शुरू हो जाते हैं। इसके अलावा मवेशियों को पानी पिलाने का संकट बढ़ जाता है। हर साल प्रशासन तालाब में पानी भरवाने का फरमान जारी करता है, लेकिन परिणाम शून्य ही रहता है। प्रधानों के पास इसके लिए कोई अतिरिक्त मद नहीं रहता है।
तहसील क्षेत्र में तालाबों की संख्या हजारों में है। इनको चिह्नित करा लिया गया है। पानी भरवाने का काम जल्द कर लिया जाएगा।
लालजी मिश्र, एसडीएम मंझनपुर
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मंझनपुर तहसील में करीब चार सौ से ज्यादा तालाबों का सुंदरीकरण कराने के लिए मनरेगा से रुपये आवंटित हुए। इसके अलावा मुख्यमंत्री जल बचाओ अभियान के तहत मंझनपुर, सरसवां व कौशाम्बी ब्लाक के तालाबों को संरक्षित करने का प्रस्ताव तैयार हुआ, लेकिन सबकुछ कागज में ही सीमित रहा। योजनाएं धरातल पर नहीं उतरीं। मनरेगा का रुपया लूटखसोट में चला गया। मार्च महीने में ही तालाब व पोखर सूखने लगे हैं।
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इनका पानी तेजी से घट रहा है। पछुवा हवा नमी निगलने लगी तो इन तालाब व पोखर में मोटर लगाकर लोगों ने पानी निकालना शुरू कर दिया। प्राकृतिक संसाधन से हुई छेड़छाड़ का खामियाजा आने वाले दिनों में लोग भुगतेंगे। भीषण गर्मी के दिनों में तालाबों के सूखने पर मवेशियों को पानी पिलाने का कोई दूसरा इंतजाम नहीं है। हैंडपंप अथवा निजी नलकूप ही एक मात्र सहारा रहेंगे। अभी से स्थितियां अनुकूल नहीं दिख रही हैं, इसके बाद पानी बचाने की मुहिम नहीं शुरू हो सकी। अधिकारियों ने भी फिलहाल अभी आंखें मूंद रखी हैं। गर्मी के दिनों में इन तालाबों में पानी कहां से आएगा, इस पर विचार ही नहीं किया जा रहा है।
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सूखने पर पानी का कैसे होगा इंतजाम
तालाब व पोखर तेजी से सूख रहे हैं। अप्रैल माह तक तालाबों से धूल उड़ सकती है। भीषण गर्मी पड़ने पर अग्निकांड शुरू हो जाते हैं। इसके अलावा मवेशियों को पानी पिलाने का संकट बढ़ जाता है। हर साल प्रशासन तालाब में पानी भरवाने का फरमान जारी करता है, लेकिन परिणाम शून्य ही रहता है। प्रधानों के पास इसके लिए कोई अतिरिक्त मद नहीं रहता है।
तहसील क्षेत्र में तालाबों की संख्या हजारों में है। इनको चिह्नित करा लिया गया है। पानी भरवाने का काम जल्द कर लिया जाएगा।
लालजी मिश्र, एसडीएम मंझनपुर