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पीएम के फैसले से न किसान खुश, न ही सेठ जी
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Wed, 09 Nov 2016 12:14 AM IST
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प्र्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच सौ व एक हजार की नोट पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। इससे न तो दिन भर हाड़तोड़ मेहनत करने वाला किसान संपा खुश है, न ही व्यापार मंडल के मुखिया रमेश केशरवानी। यही नहीं सरकारी कर्मचारियों के साथ अन्य दलों के नेता भी इससे सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि कालाबाजारी बंद करने का यह तरीका गलत है। क्या दो हजार की नोट शुरू होने से कालाबाजारी बंद होगी?
रात करीब आठ बजे के बाद से ही जिले में पांच सौ व एक हजार के नोट बंद होने की चर्चा ने लोगों को परेशान कर दिया। हर आदमी इससे सकते में था। मंझनपुर के कारोबारी अन्नू केशरवानी व महेश केशरवानी सकते में आ गए। वह एक दूसरे को फोन कर यह पूछने लगे कि पीएम मोदी ने कहा क्या है? सही जानकारी मिलने के बाद उनकी परेशानी में इजाफा हो गया। उन्हें तकलीफ इस बात की नहीं की कि पांच सौ व एक हजार की नोट बंद हो जाएगी और उन्हें नोट वापस करना पड़ेगा। उनका कहना है कि इसके लिए वह बुधवार से बैंक में लाइन लगाएं। सबसे ज्यादा भरवारी बाजार के कारोबारियों में इसको लेकर गुस्सा है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री को यही करना था तो इसके लिए कोई तो मौका देते। इससे तो पूरा बाजार ही चौपट हो जाएगा। बड़े काश्तकारों का भी यही कहना है।
पीएम मोदी का यह फैसला एकदम तानाशाही वाला है। यदि पांच सौ व एक हजार की नोट ही बंद करना था तो इसके लिए वह समय देते। कालाधन इकट्ठा करने वालों की तलाश में वह उन गरीबों का नुकसान करा देंगे जो अपने घरों में रुपया इकट्ठा कर बैठे हैं। इसके अलावा मार्केट में दो हजार का नोट आने से क्या भ्रष्टाचार बंद हो जाएगा।
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रमेश केशरवानी, व्यापारी नेता
व्यापार में हमेशा बड़ी नोट की डिमांड रहती है। अब तो आनलाइन लेनदेन का दौर शुरू हो गया, लेकिन पीएम मोदी का यह भी समझना चाहिए कि छोटे किसान जब अपना उत्पाद बेचते हैं तो उन्हें नकद रुपया चाहिए। ऐसे में उन्हें बड़ी नोट मिल गई तो उनका क्या होगा। सरकार की फिलहाल यह रणनीति समझ से बाहर है।
विजय कुमार गुलाटी, व्यापारी
पीएम मोदी का यह फैसला बाजार को चौपट करेगा। किसान के साथ ही मध्यम वर्ग भी इससे परेशान होगा। नौकरी पेशा वाले लोगों के भी पास पांच सौ व एक हजार के नोट हैं। बुधवार से बाजार के हालात बिगड़ जाएंगे, इसका जिम्मेदार कौन होगा।
अनिरूद्ध कुमार रस्तोगी, व्यापारी
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रात करीब आठ बजे के बाद से ही जिले में पांच सौ व एक हजार के नोट बंद होने की चर्चा ने लोगों को परेशान कर दिया। हर आदमी इससे सकते में था। मंझनपुर के कारोबारी अन्नू केशरवानी व महेश केशरवानी सकते में आ गए। वह एक दूसरे को फोन कर यह पूछने लगे कि पीएम मोदी ने कहा क्या है? सही जानकारी मिलने के बाद उनकी परेशानी में इजाफा हो गया। उन्हें तकलीफ इस बात की नहीं की कि पांच सौ व एक हजार की नोट बंद हो जाएगी और उन्हें नोट वापस करना पड़ेगा। उनका कहना है कि इसके लिए वह बुधवार से बैंक में लाइन लगाएं। सबसे ज्यादा भरवारी बाजार के कारोबारियों में इसको लेकर गुस्सा है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री को यही करना था तो इसके लिए कोई तो मौका देते। इससे तो पूरा बाजार ही चौपट हो जाएगा। बड़े काश्तकारों का भी यही कहना है।
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पीएम मोदी का यह फैसला एकदम तानाशाही वाला है। यदि पांच सौ व एक हजार की नोट ही बंद करना था तो इसके लिए वह समय देते। कालाधन इकट्ठा करने वालों की तलाश में वह उन गरीबों का नुकसान करा देंगे जो अपने घरों में रुपया इकट्ठा कर बैठे हैं। इसके अलावा मार्केट में दो हजार का नोट आने से क्या भ्रष्टाचार बंद हो जाएगा।
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रमेश केशरवानी, व्यापारी नेता
व्यापार में हमेशा बड़ी नोट की डिमांड रहती है। अब तो आनलाइन लेनदेन का दौर शुरू हो गया, लेकिन पीएम मोदी का यह भी समझना चाहिए कि छोटे किसान जब अपना उत्पाद बेचते हैं तो उन्हें नकद रुपया चाहिए। ऐसे में उन्हें बड़ी नोट मिल गई तो उनका क्या होगा। सरकार की फिलहाल यह रणनीति समझ से बाहर है।
विजय कुमार गुलाटी, व्यापारी
पीएम मोदी का यह फैसला बाजार को चौपट करेगा। किसान के साथ ही मध्यम वर्ग भी इससे परेशान होगा। नौकरी पेशा वाले लोगों के भी पास पांच सौ व एक हजार के नोट हैं। बुधवार से बाजार के हालात बिगड़ जाएंगे, इसका जिम्मेदार कौन होगा।
अनिरूद्ध कुमार रस्तोगी, व्यापारी