फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kaushambi News ›   people came in moharram juloos

अली अकबर के ताबूत क़ी ज्यारत को उमड़ा जन सैलाब

Tue, 03 Sep 2019 12:36 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 03 Sep 2019 12:36 AM IST
विज्ञापन
people came in moharram juloos
people came in moharram juloos - फोटो : KAUSHAMBI
अली अकबर के ताबूत क़ी ज्यारत को उमड़ा जन सैलाब
विज्ञापन

दो मोहर्रम को मरहूम हाशिम अली के अजाखाने में मजलिस के बाद बरामद हुआ अली अकबर का ताबूत
करारी। स्थानीय कस्बे के नयागंज वार्ड स्थित हाशिम अली मरहूम के अजाखाने में मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस को मौलाना मो अब्बास ने खिताब किया। मजलिस के बाद अली अकबर का ताबूत बरामद हुआ। लोगों ने ताबूत की ज्यारत कर आंसू बहाए।
सोमवार की सुबह आई अजाखानों से हाय हुसैन की सदाएं बुलंद होने लगीं। नयागंज वार्ड में मरहूम हाशिम अली के अजाखाने में अली अकबर की याद में मजलिस आयोजित की गई। मजलिस की शुरुआत सोजख़्वानी से मजहरुल अब्बास ने किया। इसके बाद मौलाना मोहम्मद अब्बास ने मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि अगर इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में कुर्बानी न दी होती तो आज इस्लाम मिट गया होता। मसाएब पढ़ते हुए कहा कि कर्बला के मैदान इमाम हुसैन के बेटे अली अकबर 18 साल के जवान थे। अली अकबर मैदान में गए दुश्मनों से जंग की उसके बाद अली अकबर घोड़े से गिरे। इमाम हुसैन ने अपने जवान बेटे का मातम किया। अजादारों की आंखों से आंसू बहने लगे। ताबूत बरामद हुआ।अजादारों ने ताबूत की ज्यारत की। हसन अब्बास और रिजवान ने नौहा पढ़। नौहे पर नवजवानों ने मातम कर आंसू बहाए।
विज्ञापन

वहीं पूरामुफ्ती के मनौरी गांव में सोमवार को शहीद ए कर्बला की याद में हाजिरी की मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस को खेताब बिहार के शेखपुरा से आए मौलाना इमाम अली जाफरी ने खिताब किया। मजलिस की शुरुआत की गई। सोजख्वानी बादशाह हुसैन और शमीम अब्बास ने की। उसके बाद मौलाना इमाम अली जाफरी ने मजलिस को खिताब किया। उन्होंने कहा कि हमें इस बात का गर्व है कि नबी के नवासे ने आखिरी समय में हमारे देश भारत को याद किया। इमाम हुसैन की याद भारत में जिस प्रकार विभिन्न धर्मों के बीच मनाई जाती है, उसकी मिसाल दुनिया में मिलना मुश्किल है। मजलिस में जुटे लोगों से कहा कि दो मोहर्रम को इमाम हुसैन कर्बला के करीब थे। यजीदी फौज ने इमाम का रास्ता रोक दिया। काफिले में छोटे-छोटे बच्चे और महिलाएं भी थीं। फौज ने इस्लामी कायदे के खिलाफ इमाम हुसैन का पानी बंद कर दिया। मगर इमाम ने यजीद के सामने झुकने की बजाए शहीद होना कबूल कर लिया। मौलाना ने जब वाकए करबला बयान किया तो अजादार अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए ओर जारो कतार रोने लगे। वसीम रिजवी ने पुरसौज नौहे पढ़कर हुसैनियत का पैगाम दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed