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Kaushambi News: गर्मी में पेट रोग से जुड़े मरीज हुए दोगुने
Tue, 11 Jun 2024 04:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Tue, 11 Jun 2024 04:27 AM IST
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भीषण गर्मी की वजह से इन दिनों डायरिया, बुखार के साथ पेट से जुड़े मरीज बढ़ गए हैं। इन मौसम जनित बीमारियों के इलाज के लिए मरीज ऐलोपैथी के साथ आयुर्वेद पर भी भरोसा जता रहे हैं। यही वजह है कि राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में बीते तीन महीनों में मरीजों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है।
जिले में पांच राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय हैं। जिला मुख्यालय के भेलखा स्थित 25 बेड का राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय भी इसमें शामिल है। इस अस्पताल में एक प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. सफीना खातून और एक चिकित्साधिकारी डॉ. राकेश कुमार पांडेय की तैनाती है। पहले यहां पर प्रतिमाह करीब 400 मरीज आते थे। मार्च से जब गर्मी ने जोर पकड़ना शुरू किया तब से मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी।
मार्च में 435, अप्रैल में 857 तो मई में 721 मरीजों ने यहां इलाज कराया। वहीं जून के शुरुआती 10 दिन में ही रोगियों की संख्या 415 पहुंच गई है। सोमवार को ही दोनों चिकित्सकों ने करीब 70 से अधिक मरीजों को देखा और दवाएं दीं। प्रभारी चिकित्साधिकारी ने बताया कि पहले ज्यादातर जोड़ों में दर्द व अन्य जटिल रोगों से पीड़ित लोग ही आते थे। अब पेट में दर्द, सिर दर्द, उल्टी-दस्त और बुखार जैसे सामान्य रोगों के मरीज भी आ रहे हैं। प्रतिदिन आने वाले मरीजों में इन रोगों से पीड़ित लोगों की संख्या करीब 30 फीसदी रहती है। कुछ इसी तरह जिले के पश्चिमशरीरा, कौशाम्बी, कड़ा और तिल्हापुर स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में भी रोगियों की संख्या बढ़ गई है।
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महिलाएं भी आ रहीं आयुर्वेद अस्पताल
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय मंझनपुर में पहले महिलाएं सामान्य रोग का उपचार कराने आती थीं। अब स्त्री रोगों से पीड़ित महिलाएं भी यहां आ रहीं हैं। प्रभारी चिकित्साधिकारी बताती हैं कि स्त्री रोगों से पीड़ित करीब 10 महिलाएं हर दिन चिकित्सालय आ रही हैं। इनमें तमाम ऐसी होती हैं, जिन्हें ऐलोपैथी से तुरंत फायदा तो हो जाता है, लेकिन रोगों से पूरी तरह छुटकारा नहीं मिल पाता। जबकि, आयुर्वेद में यह संभव है। महिलाएं स्वस्थ हो रहीं हैं। इसीलिए महिलाएं रोगियों की संख्या भी बढ़ी है।
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राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में मरीजों की संख्या पहले की अपेक्षा करीब दोगुनी हो गई है। साफ है कि आयुर्वेद के प्रति लोगों में भरोसा भी बढ़ा है। रोगियों को बेहतर सुविधाएं देने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. अक्षय लाल
क्षेत्रीय आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी
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जिले में पांच राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय हैं। जिला मुख्यालय के भेलखा स्थित 25 बेड का राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय भी इसमें शामिल है। इस अस्पताल में एक प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. सफीना खातून और एक चिकित्साधिकारी डॉ. राकेश कुमार पांडेय की तैनाती है। पहले यहां पर प्रतिमाह करीब 400 मरीज आते थे। मार्च से जब गर्मी ने जोर पकड़ना शुरू किया तब से मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी।
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मार्च में 435, अप्रैल में 857 तो मई में 721 मरीजों ने यहां इलाज कराया। वहीं जून के शुरुआती 10 दिन में ही रोगियों की संख्या 415 पहुंच गई है। सोमवार को ही दोनों चिकित्सकों ने करीब 70 से अधिक मरीजों को देखा और दवाएं दीं। प्रभारी चिकित्साधिकारी ने बताया कि पहले ज्यादातर जोड़ों में दर्द व अन्य जटिल रोगों से पीड़ित लोग ही आते थे। अब पेट में दर्द, सिर दर्द, उल्टी-दस्त और बुखार जैसे सामान्य रोगों के मरीज भी आ रहे हैं। प्रतिदिन आने वाले मरीजों में इन रोगों से पीड़ित लोगों की संख्या करीब 30 फीसदी रहती है। कुछ इसी तरह जिले के पश्चिमशरीरा, कौशाम्बी, कड़ा और तिल्हापुर स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में भी रोगियों की संख्या बढ़ गई है।
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महिलाएं भी आ रहीं आयुर्वेद अस्पताल
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय मंझनपुर में पहले महिलाएं सामान्य रोग का उपचार कराने आती थीं। अब स्त्री रोगों से पीड़ित महिलाएं भी यहां आ रहीं हैं। प्रभारी चिकित्साधिकारी बताती हैं कि स्त्री रोगों से पीड़ित करीब 10 महिलाएं हर दिन चिकित्सालय आ रही हैं। इनमें तमाम ऐसी होती हैं, जिन्हें ऐलोपैथी से तुरंत फायदा तो हो जाता है, लेकिन रोगों से पूरी तरह छुटकारा नहीं मिल पाता। जबकि, आयुर्वेद में यह संभव है। महिलाएं स्वस्थ हो रहीं हैं। इसीलिए महिलाएं रोगियों की संख्या भी बढ़ी है।
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में मरीजों की संख्या पहले की अपेक्षा करीब दोगुनी हो गई है। साफ है कि आयुर्वेद के प्रति लोगों में भरोसा भी बढ़ा है। रोगियों को बेहतर सुविधाएं देने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. अक्षय लाल
क्षेत्रीय आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी