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कौशांबी जिला पंचायत अध्यक्ष: आठ साल में चार बार लाया गया अविश्वास प्रस्ताव, पांचवें की तैयारी

Sat, 29 Jul 2023 05:57 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी
अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 29 Jul 2023 05:57 PM IST
सार

सपा सरकार में 14 जनवरी 2016 को मधुपति वाचस्पति की बतौर अध्यक्ष की ताजपोसी हुई थी। लेकिन प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही महज सवा साल में ही अध्यक्ष ने सदस्यों का भरोसा खो दिया। 8 मई 2017 में तत्कालीन डीएम अखंड प्रताप सिंह ने बतौर प्रशासक मिनी सदन की बागडोर संभाली।

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Panchayat President: 'no confidence motion' brought four times in eight years, preparation for the fifth
जिला पंचायत कौशांबी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

कौशाम्बी में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी अस्थिरता का शिकार हो गई है। यहां पिछले आठ साल के दौरान चार बार अध्यक्ष बदले जा चुके हैं। अब एक बार फिर 20 सदस्यों ने अविश्वास का हलफनामा देकर पांचवे अध्यक्ष के ताजपोशी के संकेत दे दिए हैं। कार्यकाल के मध्य हो रही उठापटक से जिले के विकास कार्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

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सपा सरकार में 14 जनवरी 2016 को मधुपति वाचस्पति की बतौर अध्यक्ष की ताजपोसी हुई थी। लेकिन प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही महज सवा साल में ही अध्यक्ष ने सदस्यों का भरोसा खो दिया। 8 मई 2017 में तत्कालीन डीएम अखंड प्रताप सिंह ने बतौर प्रशासक मिनी सदन की बागडोर संभाली। 22 मई को उनके तबादले के बाद पहले सीडीओ डॉ. दिनेश कुमार सिंह और फिर अगले दिन तत्कालीन जिलाधिकारी मनीष वर्मा प्रशासक रहे।
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उपचुनाव के बाद 28 अगस्त 2017 को अनामिका सिंह अध्यक्ष निर्वाचित हुईं। लेकिन वह भी सदस्यों के भरोसे पर खरी नहीं उतरी। किसी तरह एक साल पूरा होते ही सदस्यों ने अनामिका के खिलाफ भी अविश्वास जता दिया। हालांकि, फ्लोर टेस्ट से पहले ही अनामिका ने 15 नवंबर 2018 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। ऐसे में जिला पंचायत की कमान एक बार फिर तत्कालीन डीएम मनीष वर्मा को संभालनी पड़ी।

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इसके बाद हुए उपचुनाव में भाजपा की अवधरानी पटेल आठ अगस्त 2019 को अध्यक्ष चुनी गईं। कार्यकाल पूरा होने के बाद तीन जुलाई 2021 को हुए चुनाव में भाजपा प्रत्याशी कल्पना सोनकर विजयी हुईं। कल्पना ने 12 जुलाई शपथ ग्रहण कर कार्यभार संभाला। एक साल पूरा होते ही इनके खिलाफ भी सदस्य बवावती तेवर अपनाने लगे थे। लेकिन उस वक्त कतिपय सियासी कारणों से कल्पना की कुर्सी बच गई।

इसी बीच सरकार ने दो साल से पहले अविश्वास नहीं लाने का नया कानून बना दिया। नतीजन सदस्य खामोसी के साथ वक्त का इंतजार करने लगे। दो साल पूरा होते ही 26 जुलाई को 26 सदस्यीय सदन के 20 सदस्यों ने डीएम से मिलकर अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास का हलफनामा सौंप दिया। अध्यक्ष के प्रतिनिधि ने हलफनामे पर किए गए हस्ताक्षरों को लेकर सवाल खड़ा किया तो डीएम ने दो अगस्त को अभिलेखीय मिलान के लिए सदस्यों को नोटिस जारी कर दी। मौजूदा राजीनकि समीकरण को देखते हुए माना जा रहा है कि नाराज खेमा अपने मकसद में सफल हो जाएगा। यदि ऐसा हुआ तो आठ साल के भीतर पांचवे अध्यक्ष की ताजपोसी तय मानी जा रही है।

पिछले कार्यकाल में तीन अध्यक्ष व चार प्रशासक

जिला पंचायत का पिछला कार्यकाल अब तक का सर्वाधिक उठापटक वाला रहा। पांच साल के भीतर तीन अध्ययक्ष चुने गए। चार बार प्रशासकों को जिला पंचायत की कमान संभालने का मौका मिला।

अध्यक्ष के खिलाफ भाजपा सदस्यों के विद्रोह पर पार्टी ने साधी चुप्पी


जिला पंचायत कौशाम्बी में अध्यक्ष समेत छह सदस्य भारतीय जनता पार्टी के हैं। इनमें से पांच सदस्यों ने हलफनामा सौंपकर अपने ही पार्टी के अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास जाहिर किया है। अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाली पार्टी इस मामले में चार दिन बीतने के बावजूद चुप्पी साधे हुए है। इसे लेकर सियासी गलियारे में तरह-तरह की चर्चा है।

जनपद की 26 सदस्यीय जिला पंचायत के चुनाव में सत्ताधारी दल भाजपा के छह सदस्य निर्वाचित हुए थे। इनमें अध्यक्ष कल्पना सोनकर के अलावा तूफान सिंह, रामनरेश, पूनम मौर्या, मीनू साहू और अर्चना निषाद शामिल हैं। महज छह सदस्यों वाली पार्टी उस वक्त किसी तरह अपना अध्यक्ष निर्वाचित कराने में सफल रही थी।

वक्त गुजरने के साथ ही अध्यक्ष ने दूसरे दलों के सदस्यों का भरोसा जीतना तो दूर अपनों का भी विश्वास खो दिया। इसकी बानगी 26 जुलाई को साफ देखने को मिली। दरअसल, डीएम के समक्ष अविश्वास का हलफनामा सौंपने वाले 20 में भाजपा के भी पांचों सदस्य शामिल हैं। अध्यक्ष के खिलाफ अपने ही पार्टी के सदस्यों द्वारा मोर्चा खोले जाने के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जिला पंचायत के अंदर चल रही इस अंतर कलह पर पार्टी पूरी तरह से मौन है।

सदस्यों ने हलफनामा देने से पहले कोई चर्चा नहीं की थी। इस बाबत पार्टी के जिला पंचायत सदस्यों से चर्चा की जाएगी। जो भी शिकायते हैं आपस में बैठकर दूर कर दी जाएंगी। संगठन में कोई भी विघटन की स्थिति नहीं है। - अनीता त्रिपाठी- जिलाध्यक्ष

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