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पंचायत चुनाव:75 फीसदी सीटों में होगा उलटफेर, बदलेंगे चुनावी समीकरण
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panchayat election reservation : 75% seats will disturbed
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हाईकोर्ट से आरक्षण नियमावली खारिज होने से ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र व जिला पंचायत सदस्यों के आरक्षण का निर्धारण नए सिरे से होगा। नए सिरे से आरक्षण में 75 फीसदी सीटों में फेरबदल होने का अनुमान है। सीटों के फेरबदल से दोआबा का सियासी समीकरण भी बदलना तय माना जा रहा है। 27 मार्च तक प्रशासन 451 पंचायतों की नई आरक्षण सूची जारी करेगा।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में पदों के आरक्षण के लिए सरकार ने 11 फरवरी 2011 को शासनादेश जारी किया था। इसके जरिए वर्ष 1995 को आधार वर्ष बनाते हुए चक्रानुक्रम आरक्षण तय करने के निर्देश दिए गए थे।
इसके आधार पर पंचायती राज विभाग ने 12 फरवरी को सभी वर्गों के प्रतिशत के मुताबिक आरक्षित पदों की संख्या तय कर दी। कौशाम्बी में जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट अनुसूचित जाति के खाते मेें चली गई। जबकि ग्राम प्रधान की 451 सीटों पर अनुसूचित जाति (महिला) को 38, अनुसूचित जाति को 77, पिछड़ी (महिला) 42, पिछड़ा को 76, महिला 73 एवं सामान्य वर्ग को 149 सीटें आवंटित हुईं थीं।
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उच्च न्यायालय ने 1995 के आधार पर जारी की गई आरक्षण सूची निरस्त कर दी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद वर्ष 2015 के आधार पर आरक्षण तय होगा। जिला निर्वाचन अधिकारी अमित कुमार सिंह ने बताया कि तीन मार्च को जारी अंतिम आरक्षण सूची निरस्त हो गई है। पूरी आरक्षण प्रक्रिया दोबारा होगी। पंचायती राज विभाग के सूत्रों के मुताबिक नए सिरे से आरक्षण में तकरीबन 75 फीसदी सीटों में फेरबदल होगा।
ग्राम व क्षेत्र पंचायत सदस्यों के लिए होगी अधिक कसरत
मंझनपुर। जनपद के आठ ब्लॉकों और 26 जिला पंचायत वार्डों में आरक्षण का निर्धारण तीन से चार दिन में हो जाएगा। लेकिन, 451 ग्राम प्रधानों, 654 क्षेत्र पंचायतों और 5871 ग्राम पंचायत सदस्यों के आरक्षण निर्धारण में प्रशासन को नए सिरे से कसरत करनी पड़ेगी।
470 आपत्तियों के परिणाम भी रद्द
जिला मजिस्ट्रेट अमित कुमार सिंह ने बताया तीन मार्च को जारी आरक्षण सूची पर आठ मार्च तक 470 आपत्तिर्यां आइं थीं। इनका परिणाम रद्द कर दिया गया है। अब नई आरक्षण सूची के आधार पर आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। उनकी निस्तारण रिपोर्ट सार्वजनिक होगी।
पखवाड़े भर के लिए पिछड़ी चुनाव प्रक्रिया
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव प्रक्रिया नई आरक्षण व्यवस्था के कारण पखवाड़े भर तक के लिए पिछड़ सकती है। आरक्षण सूची, आपत्तियों का निस्तारण और फिर अंतिम सूची का प्रकाशन आदि अप्रैल के पहले सप्ताह में पूर्ण हो सकेगा। ऐसे में 10 अप्रैल के बाद ही अधिसूचना जारी होने की संभावना है।
नए शासनादेश का इंतजार किया जा रहा है। शासनादेश में जिन प्रावधानों का उल्लेख रहेगा, उसके मुताबिक नए आरक्षित स्थान तय होंगे।
गोपाल जी ओझा-डीपीआरओ
पानी की तरह बहा चुके पैसा, अब बढ़ी धड़कनें
पंचायत चुनाव में किस्मत आजमाने के लिए उम्मीदवारों ने गांव-गांव घूमना शुरू कर दिया था। जिन उम्मीदवारों को अंतरिम आरक्षण में ही अपने मनमुताबिक सीट मिल गई, उन्होंने पैसा भी पानी की तरह बहाना शुरू कर दिया था। दूसरे उम्मीदवारों से आगे रहने के लिए इन नेताओं ने आरक्षण की अंतिम सूची का भी इंतजार नहीं किया। यही बेसब्री अब उनको भारी पड़ने जा रही है।
चुनावी तैयारियों में प्रधान एवं जिपं पद के उम्मीदवार सबसे आगे हैं। मतदाताओं को साधने के लिए गांवों में इनकी ओर से मुर्गा-दारू पार्टियों का दौर शुरू हो गया था। लेकिन, ऐन वक्त हाईकोर्ट के निर्णय ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया।
अब नए सिरे से आरक्षण की बात सुनकर ऐसे दावेदारों के होश उड़े हुए हैं। वर्ष 2015 के आधार पर अगर उनकी सीट का आरक्षण बदला तो अब तक खर्च हुआ पैसा मिट्टी में मिलना तय है। ऐसे में हाईकोर्ट के फैसले पर इन उम्मीदवारों की सबसे अधिक निगाहें थीं। विकास भवन पहुंचकर भी तमाम उम्मीदवार नए आरक्षण की स्थिति जानने की कोशिश करते रहे।
मंगलवार को देखा गया कि ज्यादातर दावेदार चुनाव प्रचार के लिए भी नहीं निकले। अब तो बस सभी को सीटों के नए आरक्षण की चिंता सता रही है।
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में पदों के आरक्षण के लिए सरकार ने 11 फरवरी 2011 को शासनादेश जारी किया था। इसके जरिए वर्ष 1995 को आधार वर्ष बनाते हुए चक्रानुक्रम आरक्षण तय करने के निर्देश दिए गए थे।
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इसके आधार पर पंचायती राज विभाग ने 12 फरवरी को सभी वर्गों के प्रतिशत के मुताबिक आरक्षित पदों की संख्या तय कर दी। कौशाम्बी में जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट अनुसूचित जाति के खाते मेें चली गई। जबकि ग्राम प्रधान की 451 सीटों पर अनुसूचित जाति (महिला) को 38, अनुसूचित जाति को 77, पिछड़ी (महिला) 42, पिछड़ा को 76, महिला 73 एवं सामान्य वर्ग को 149 सीटें आवंटित हुईं थीं।
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उच्च न्यायालय ने 1995 के आधार पर जारी की गई आरक्षण सूची निरस्त कर दी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद वर्ष 2015 के आधार पर आरक्षण तय होगा। जिला निर्वाचन अधिकारी अमित कुमार सिंह ने बताया कि तीन मार्च को जारी अंतिम आरक्षण सूची निरस्त हो गई है। पूरी आरक्षण प्रक्रिया दोबारा होगी। पंचायती राज विभाग के सूत्रों के मुताबिक नए सिरे से आरक्षण में तकरीबन 75 फीसदी सीटों में फेरबदल होगा।
ग्राम व क्षेत्र पंचायत सदस्यों के लिए होगी अधिक कसरत
मंझनपुर। जनपद के आठ ब्लॉकों और 26 जिला पंचायत वार्डों में आरक्षण का निर्धारण तीन से चार दिन में हो जाएगा। लेकिन, 451 ग्राम प्रधानों, 654 क्षेत्र पंचायतों और 5871 ग्राम पंचायत सदस्यों के आरक्षण निर्धारण में प्रशासन को नए सिरे से कसरत करनी पड़ेगी।
470 आपत्तियों के परिणाम भी रद्द
जिला मजिस्ट्रेट अमित कुमार सिंह ने बताया तीन मार्च को जारी आरक्षण सूची पर आठ मार्च तक 470 आपत्तिर्यां आइं थीं। इनका परिणाम रद्द कर दिया गया है। अब नई आरक्षण सूची के आधार पर आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। उनकी निस्तारण रिपोर्ट सार्वजनिक होगी।
पखवाड़े भर के लिए पिछड़ी चुनाव प्रक्रिया
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव प्रक्रिया नई आरक्षण व्यवस्था के कारण पखवाड़े भर तक के लिए पिछड़ सकती है। आरक्षण सूची, आपत्तियों का निस्तारण और फिर अंतिम सूची का प्रकाशन आदि अप्रैल के पहले सप्ताह में पूर्ण हो सकेगा। ऐसे में 10 अप्रैल के बाद ही अधिसूचना जारी होने की संभावना है।
नए शासनादेश का इंतजार किया जा रहा है। शासनादेश में जिन प्रावधानों का उल्लेख रहेगा, उसके मुताबिक नए आरक्षित स्थान तय होंगे।
गोपाल जी ओझा-डीपीआरओ
पानी की तरह बहा चुके पैसा, अब बढ़ी धड़कनें
पंचायत चुनाव में किस्मत आजमाने के लिए उम्मीदवारों ने गांव-गांव घूमना शुरू कर दिया था। जिन उम्मीदवारों को अंतरिम आरक्षण में ही अपने मनमुताबिक सीट मिल गई, उन्होंने पैसा भी पानी की तरह बहाना शुरू कर दिया था। दूसरे उम्मीदवारों से आगे रहने के लिए इन नेताओं ने आरक्षण की अंतिम सूची का भी इंतजार नहीं किया। यही बेसब्री अब उनको भारी पड़ने जा रही है।
चुनावी तैयारियों में प्रधान एवं जिपं पद के उम्मीदवार सबसे आगे हैं। मतदाताओं को साधने के लिए गांवों में इनकी ओर से मुर्गा-दारू पार्टियों का दौर शुरू हो गया था। लेकिन, ऐन वक्त हाईकोर्ट के निर्णय ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया।
अब नए सिरे से आरक्षण की बात सुनकर ऐसे दावेदारों के होश उड़े हुए हैं। वर्ष 2015 के आधार पर अगर उनकी सीट का आरक्षण बदला तो अब तक खर्च हुआ पैसा मिट्टी में मिलना तय है। ऐसे में हाईकोर्ट के फैसले पर इन उम्मीदवारों की सबसे अधिक निगाहें थीं। विकास भवन पहुंचकर भी तमाम उम्मीदवार नए आरक्षण की स्थिति जानने की कोशिश करते रहे।
मंगलवार को देखा गया कि ज्यादातर दावेदार चुनाव प्रचार के लिए भी नहीं निकले। अब तो बस सभी को सीटों के नए आरक्षण की चिंता सता रही है।
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