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घंटे भर की मान-मनौव्वल के बाद किया मतदान
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Tue, 13 Oct 2015 11:21 PM IST
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रास्ता, पानी, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलने से खफा दूल्हापुर के ग्रामीणों ने मतदान बहिष्कार का ऐलान किया था। अपनी जिद पर वे मंगलवार को दूसरे चरण का मतदान शुरू होने के घंटे भर बाद तक अड़े रहे। घंटे भर की मान-मनौव्वल और चुनाव प्रक्रिया खत्म होते ही रास्ते की समस्या के समाधान का भरोसा मिलने पर गांववाले मतदान को राजी हुए। एसडीएम ने महीनेभर के भीतर सड़क दुरुस्त कराने का आश्वासन ग्रामीणों को दिलाया है।
नेवादा ब्लाक से दूल्हापुर गांव को मुख्यमार्ग से जोड़ने के लिए 15 साल पहले लोक निर्माण विभाग द्वारा 7 किलोमीटर पक्की सड़क बनवाई गई थी। गांव के अवधेश कुमार, भंवर सिंह, जयकरन सिंह, दिवाकर सिंह, पताली सिंह, लालबाबू , कुशल सिंह आदि ने बताया कि सड़क निर्माण के दौरान मानक की अनदेखी की गई थी।
वहीं अब तक इसकी एक बार भी मरम्मत नहीं कराई। इससे पूरी सड़क उखड़कर गड्ढों में तब्दील हो गई है। बारिश में सड़क तालाब बन जाती है। इसकी शिकायत क ई बार अफसरों और जनप्रतिनिधियों से की गई, लेकिन किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। इस अनदेखी से भड़के ग्रामीणों ने सोमवार को बैठक करके पंचायत चुनाव के बहिष्कार का ऐलान कर दिया। मंगलवार की सुबह भी ग्रामीण अपने इस ऐलान पर अड़े रहे। मतदान शुरू होने के घंटेभर बाद तक एक भी व्यक्ति जब वोट डालने नहीं आया, तो इसकी सूचना मतदानकर्मियों ने अफसरों को दी। सूचना लगते ही चायल एसडीएम और लोक निर्माण विभाग के अभियंता, सीओ गांव पहुंचे। अफसर ग्रामीणों की मान-मनौव्वल में जुटे। चुनाव प्रक्रिया खत्म होने के तत्काल रास्ते की समस्या के समाधान का भरोसा दिलाया गया। अफसरों क इस आश्वासन के बाद ग्रामीण वोट डालने को राजी हुए।
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नेवादा ब्लाक से दूल्हापुर गांव को मुख्यमार्ग से जोड़ने के लिए 15 साल पहले लोक निर्माण विभाग द्वारा 7 किलोमीटर पक्की सड़क बनवाई गई थी। गांव के अवधेश कुमार, भंवर सिंह, जयकरन सिंह, दिवाकर सिंह, पताली सिंह, लालबाबू , कुशल सिंह आदि ने बताया कि सड़क निर्माण के दौरान मानक की अनदेखी की गई थी।
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वहीं अब तक इसकी एक बार भी मरम्मत नहीं कराई। इससे पूरी सड़क उखड़कर गड्ढों में तब्दील हो गई है। बारिश में सड़क तालाब बन जाती है। इसकी शिकायत क ई बार अफसरों और जनप्रतिनिधियों से की गई, लेकिन किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। इस अनदेखी से भड़के ग्रामीणों ने सोमवार को बैठक करके पंचायत चुनाव के बहिष्कार का ऐलान कर दिया। मंगलवार की सुबह भी ग्रामीण अपने इस ऐलान पर अड़े रहे। मतदान शुरू होने के घंटेभर बाद तक एक भी व्यक्ति जब वोट डालने नहीं आया, तो इसकी सूचना मतदानकर्मियों ने अफसरों को दी। सूचना लगते ही चायल एसडीएम और लोक निर्माण विभाग के अभियंता, सीओ गांव पहुंचे। अफसर ग्रामीणों की मान-मनौव्वल में जुटे। चुनाव प्रक्रिया खत्म होने के तत्काल रास्ते की समस्या के समाधान का भरोसा दिलाया गया। अफसरों क इस आश्वासन के बाद ग्रामीण वोट डालने को राजी हुए।
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