{"_id":"cd4694f5195a3934a2f87daff89e65b0","slug":"now-seepet-viscera-will-be-sent-in-voyl-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":" अब सीपेट वॉयल में भेजे जाएंगे विसरा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब सीपेट वॉयल में भेजे जाएंगे विसरा
मनोज दूबे/अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Wed, 08 Jul 2015 01:43 AM IST
विज्ञापन
मंझनपुर (कौशाम्बी)। विसरा अब बड़े जार में नहीं बल्कि छोटे सीपेट वॉयल में रखकर प्रयोगशाला भेजे जाएंगे। ऐसा मौतों की गुत्थी नहीं सुलझने पर प्रयोशालाओं में विसरों से भरे जारों की अधिककता से आ रही समस्या से निपटने के लिए किया जा रहा है। अपर पुलिस महानिदेशक तकनीकी सेवाएं ने पुलिस अधीक्षक और रेलवे पुलिस अफसरों को पत्र भेजकर नई व्यवस्था को तत्काल अमल में लाने का आदेश दिया है।
बता दें कि रहस्यमय हालात में होने वाली मौतों की वजह पोस्टमार्टम के दौरान चिकित्सक नहीं पता कर पाते हैं, तो वे विसरा प्रिजर्व करके उसे परीक्षण के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेज देते हैं। यह विसरा अब तक कांच के बडे-बड़े जार में भेजा जाता था। पिछले कुछ बरसों में संदिग्ध हालात में मौत की संख्या में इजाफा हुआ है। इससे विसरा भरे कांच के बड़े-बड़े जार से विधि विज्ञान प्रयोगशाला भर गई है। पुलिस अफसरों की मानें तो हालात ऐसे हैं कि प्रयोगशाला में विसरा रखने की जगह कम पड़ने लगी है।
ऐसे में इन जारों के रख-रखाव में भी कठिनाई आ रही है। विज्ञान एवं तकनीकी इतनी विकसित हो चुकी है कि मौत की वजह का पता लगाने, विष की मात्रा और विष की पहचान करने में मामूली सैंपल की जरूरत पड़ती है। यही कारण है कि अब कांच के बड़े जार के स्थान पर जांच के लिए प्रिजर्व किया गया विसरा छोटे से सीपेट वॉयल में भी प्रयोगशाला भेजा जाएगा। अपर पुलिस महानिदेशक आरके विश्वकर्मा ने सभी पुलिस अधीक्षकों को फरमान जारी कर दिया है। पुलिस अधीक्षक रतनकांत पांडेय ने बताया कि एडीजी (तकनीकी सेवाएं) के निर्देश पर अमल के लिए सभी संबधित थानेदारों को कह दिया गया है। जिस थाना क्षेत्र में संदिग्ध मौत होगी। वहां की पुलिस ही पोस्टमार्टम हाउस में चिकित्सीय परीक्षण करने वाले चिकित्सक को सीपेट वॉयल उपलब्ध कराएगी।
विज्ञापन
इस प्रकार सुरक्षित किया जाएगा विसरा
स्टमक टिश्यू- 50 ग्राम
आंत का टुकड़ा - 50 ग्राम
लीवर का टुकड़ा- 50 ग्राम
किडनी - 50 ग्राम
स्पलीन - 50 ग्राम
अपर पुलिस महानिदेशक तकनीकी सेवाएं के मुताबिक जुलाई 2015 से विधि विज्ञान प्रयोगशाला में कांच के बड़े जार में विसरा नहीं लिया जाएगा। यदि किसी भी थाने की पुलिस जार में विसरा भेजती है, तो वहां के थानाध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
बता दें कि रहस्यमय हालात में होने वाली मौतों की वजह पोस्टमार्टम के दौरान चिकित्सक नहीं पता कर पाते हैं, तो वे विसरा प्रिजर्व करके उसे परीक्षण के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेज देते हैं। यह विसरा अब तक कांच के बडे-बड़े जार में भेजा जाता था। पिछले कुछ बरसों में संदिग्ध हालात में मौत की संख्या में इजाफा हुआ है। इससे विसरा भरे कांच के बड़े-बड़े जार से विधि विज्ञान प्रयोगशाला भर गई है। पुलिस अफसरों की मानें तो हालात ऐसे हैं कि प्रयोगशाला में विसरा रखने की जगह कम पड़ने लगी है।
विज्ञापन
ऐसे में इन जारों के रख-रखाव में भी कठिनाई आ रही है। विज्ञान एवं तकनीकी इतनी विकसित हो चुकी है कि मौत की वजह का पता लगाने, विष की मात्रा और विष की पहचान करने में मामूली सैंपल की जरूरत पड़ती है। यही कारण है कि अब कांच के बड़े जार के स्थान पर जांच के लिए प्रिजर्व किया गया विसरा छोटे से सीपेट वॉयल में भी प्रयोगशाला भेजा जाएगा। अपर पुलिस महानिदेशक आरके विश्वकर्मा ने सभी पुलिस अधीक्षकों को फरमान जारी कर दिया है। पुलिस अधीक्षक रतनकांत पांडेय ने बताया कि एडीजी (तकनीकी सेवाएं) के निर्देश पर अमल के लिए सभी संबधित थानेदारों को कह दिया गया है। जिस थाना क्षेत्र में संदिग्ध मौत होगी। वहां की पुलिस ही पोस्टमार्टम हाउस में चिकित्सीय परीक्षण करने वाले चिकित्सक को सीपेट वॉयल उपलब्ध कराएगी।
विज्ञापन
इस प्रकार सुरक्षित किया जाएगा विसरा
स्टमक टिश्यू- 50 ग्राम
आंत का टुकड़ा - 50 ग्राम
लीवर का टुकड़ा- 50 ग्राम
किडनी - 50 ग्राम
स्पलीन - 50 ग्राम
अपर पुलिस महानिदेशक तकनीकी सेवाएं के मुताबिक जुलाई 2015 से विधि विज्ञान प्रयोगशाला में कांच के बड़े जार में विसरा नहीं लिया जाएगा। यदि किसी भी थाने की पुलिस जार में विसरा भेजती है, तो वहां के थानाध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।