{"_id":"5cb0df1abdec2276d05c19be","slug":"network-dhadam-e-posh-machine-made-toy","type":"story","status":"publish","title_hn":"नेटवर्क धड़ाम, ई-पॉश मशीन बनी खिलौना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नेटवर्क धड़ाम, ई-पॉश मशीन बनी खिलौना
Sat, 13 Apr 2019 12:47 AM IST
shailendra Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Published by: shailendra Kumar
Updated Sat, 13 Apr 2019 12:47 AM IST
विज्ञापन
चावल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मंझनपुर। दोआबा में मोबाइल कंपनियों का इंटरनेट भी धड़ाम हो गया है। इससे ई-पॉश मशीन खिलौना बनकर रह गई है। इस वजह से खाद्यान्न नहीं मिलने के कारण उपभोक्ताओं और कोटेदारों में आएदिन कहासुनी हो रही है। इसे लेकर कोटेदार परेशान हैं।
राशन वितरण व्यवस्था पारदर्शी बनाने के लिए शासन ने कोटेदारों को ई-पॉश मशीन दे रखी है। नेटवर्क खराब होने के कारण करीब एक हफ्ते से यह मशीन खिलौना बनी हुई है। इससे उपभोक्ताओं को राशन नहीं मिल पा रहा है। उपभोक्ता सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान तक दिन में दो से चार बार जाते हैं और हर दफा बैरंग लौटते हैं। इसे लेकर उपभोक्ताओं की कोटेदारों से नोकझोंक भी होती है। कभी-कभी तो स्थिति हाथापाई तक की आ जाती है। कोटेदारों का कहना है कि उपभोक्ता उनकी परेशानी समझने को तैयार नहीं हैं। उन्हें लगता है कि कोटेदार जानबूझकर मनमानी कर रहे हैं। वहीं उपभोक्ताओं का कहना है कि अगर नेटवर्क खराब रहता है तो फिर राशन वितरण के लिए पहले जैसी व्यवस्था ही कर दी जाए। लगातार दो से तीन महीने तक राशन नहीं मिलने के कारण भूखों करने की नौबत आ जाती है। मामले में जिला पूर्ति अधिकारी कुमार निर्मलेन्दु का कहना है कि शासन को जल्द ही इस बाबत पत्र भेजकर समस्या से अवगत कराया जाएगा। फिलहाल कोटेदार चाहें तो मोबाइल से भी ई-पॉश मशीन को कनेक्ट करके राशन वितरण कर सकते हैं।
विज्ञापन
राशन वितरण व्यवस्था पारदर्शी बनाने के लिए शासन ने कोटेदारों को ई-पॉश मशीन दे रखी है। नेटवर्क खराब होने के कारण करीब एक हफ्ते से यह मशीन खिलौना बनी हुई है। इससे उपभोक्ताओं को राशन नहीं मिल पा रहा है। उपभोक्ता सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान तक दिन में दो से चार बार जाते हैं और हर दफा बैरंग लौटते हैं। इसे लेकर उपभोक्ताओं की कोटेदारों से नोकझोंक भी होती है। कभी-कभी तो स्थिति हाथापाई तक की आ जाती है। कोटेदारों का कहना है कि उपभोक्ता उनकी परेशानी समझने को तैयार नहीं हैं। उन्हें लगता है कि कोटेदार जानबूझकर मनमानी कर रहे हैं। वहीं उपभोक्ताओं का कहना है कि अगर नेटवर्क खराब रहता है तो फिर राशन वितरण के लिए पहले जैसी व्यवस्था ही कर दी जाए। लगातार दो से तीन महीने तक राशन नहीं मिलने के कारण भूखों करने की नौबत आ जाती है। मामले में जिला पूर्ति अधिकारी कुमार निर्मलेन्दु का कहना है कि शासन को जल्द ही इस बाबत पत्र भेजकर समस्या से अवगत कराया जाएगा। फिलहाल कोटेदार चाहें तो मोबाइल से भी ई-पॉश मशीन को कनेक्ट करके राशन वितरण कर सकते हैं।
विज्ञापन