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Kaushambi News: सूबे में दोआबा की पहचान बनेगी अलवारा झील
Thu, 02 Feb 2023 09:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Thu, 02 Feb 2023 09:40 AM IST
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सूबे में दोआबा की पहचान बनेगी अलवारा झील
विश्व वेटलैंड-डे पर विशेष
वन डिस्ट्रक्टि वन डेस्टिनेशन के तहत 25 लाख रुपये से कराया जाएगा सौंदर्यीकरण
पर्यटकों के लिए मूलभूत सुविधाओं के साथ अन्य व्यवस्थाओं का खींचा गया खाका
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर/बारा। विश्व वेट लैंड-डे मनाया जाए और दोआबा की अलवारा झील चर्चाओं में न आए, भला यह कैसे संभव है। सरसवां ब्लॉक स्थित यह झील हर साल सर्दियों में विदेशी पक्षियों की मेजबानी करती है। तमाम पर्यटक इन विदेशी मेहमानों का दीदार करने आते हैं, लेकिन उन्हें केवल जलकुंभी ही देखने को मिलती है। उम्मीद है कि आने वाले कुछ महीनों बाद यही बदहाल अलवारा झील सूबे में दोआबा की पहचान बनेगी।
वन डिस्ट्रक्टि वन प्रोडक्ट की तर्ज पर प्रदेश सरकार ने पर्यटन के क्षेत्र सूबे को आगे लाने के लिए वन डिस्ट्रक्टि वन डेस्टिनेशन (ओडीओडी) योजना चलाई है। इसके तहत हर जिले में एक पर्यटन स्थल विकसित किया जा रहा है। सरसवां ब्लॉक के पौर काशीरामपुर स्थित अलवारा झील को चुना गया है। करीब 405 हेक्टेयर में फैली यह झील अभी तक शासन, प्रशासन और जनप्रतिधियों की अनदेखी का शिकार रही। यहां हर साल सर्दी के मौसम में विदेशों से साइबेरियन पक्षी आते हैं। इनको देखने के लिए दूर-दराज से पर्यटक आते हैं। इसके बावजूद यहां पर उनके लिए कोई सुविधा नहीं है।
शासन के निर्देश पर करीब दो महीने पहले ओडीओडी के तहत 35 लाख रुपये का प्रस्ताव बनाकर भेजा था गया, जिसमें से 25 लाख रुपये की स्वीकृति मिल गई है। इससे झील के पास पर्यटकों के लिए शौचालय, पार्किंग, पेयजल, बैठने की व्यवस्था व वनकर्मियों के कक्ष आदि बनवाए जाएंगे। झील को आने वाली प्रमुख सड़क को दुरुस्त कराने के साथ आसपास आकर्षक पेंटिंग कराई जाएगी। पर्यटकों की सहूलियत के लिए जनपद की हर प्रमुख सड़कों पर अलवारा झील की राह बताने वाले साइन बोर्ड लगेंगे।
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सरकारी भूमि कम होने से आ रही समस्याएं
अलवारा झील को संवारने का अब तक कोई प्रयास नहीं हुआ है तो इसकी मुख्य वजह सरकारी भूमि का अभाव है। वैसे तो यह झील करीब 405 हेक्टेयर में फैली है, लेकिन इसमें से केवल 70 हेक्टेयर भूमि ही सरकारी है। शेष 335 हेक्टेयर भूमि आसपास के किसानों की है। गर्मी के दिनों में कुछ महीनों के लिए पानी कम होने पर किसान अपनी भूमि पर खेती करते हैं। बारिश के बाद फिर इसमें जलभराव हो जाता है।
अब तक इस झील की अनदेखी ही हुई है। इसे संवारने के वादे तो खूब किए गए, लेकिन धरातल पर ठोस कदम कभी नहीं उठाए गए। नतीजा, झील का अस्तित्व संकट में पड़ गया है। उम्मीद है कि अब इसकी दशा कुछ सुधर जाएगी।- विक्रम सिंह, पौर काशीरामपुर
पूरी झील जलकुंभी, कमलगट्टा और घास से पटी है। दूरदराज से हर साल लोग सर्दी में विदेशी पक्षियों को देखने आते हैं, लेकिन यहां के रोमांचक नजारे देख नहीं पाते। कभी इसकी सफाई कराने की तरफ ध्यान नहीं दिया गया।- विद्याधर दुबे, पौर काशीरामपुर
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ओडीओडी के तहत अलवारा झील के विकास के कार्य कराए जाने हैं। इसके लिए 25 लाख रुपये की स्वीकृत हो गए हैं। टेंडर और अन्य विभागीय प्रक्रियाएं शुरू कर दी गई हैं। इसी महीने काम चालू हो जाएगा।- दारा सिंह यादव, वन क्षेत्राधिकारी, मंझनपुर रेंज
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विश्व वेटलैंड-डे पर विशेष
वन डिस्ट्रक्टि वन डेस्टिनेशन के तहत 25 लाख रुपये से कराया जाएगा सौंदर्यीकरण
पर्यटकों के लिए मूलभूत सुविधाओं के साथ अन्य व्यवस्थाओं का खींचा गया खाका
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर/बारा। विश्व वेट लैंड-डे मनाया जाए और दोआबा की अलवारा झील चर्चाओं में न आए, भला यह कैसे संभव है। सरसवां ब्लॉक स्थित यह झील हर साल सर्दियों में विदेशी पक्षियों की मेजबानी करती है। तमाम पर्यटक इन विदेशी मेहमानों का दीदार करने आते हैं, लेकिन उन्हें केवल जलकुंभी ही देखने को मिलती है। उम्मीद है कि आने वाले कुछ महीनों बाद यही बदहाल अलवारा झील सूबे में दोआबा की पहचान बनेगी।
वन डिस्ट्रक्टि वन प्रोडक्ट की तर्ज पर प्रदेश सरकार ने पर्यटन के क्षेत्र सूबे को आगे लाने के लिए वन डिस्ट्रक्टि वन डेस्टिनेशन (ओडीओडी) योजना चलाई है। इसके तहत हर जिले में एक पर्यटन स्थल विकसित किया जा रहा है। सरसवां ब्लॉक के पौर काशीरामपुर स्थित अलवारा झील को चुना गया है। करीब 405 हेक्टेयर में फैली यह झील अभी तक शासन, प्रशासन और जनप्रतिधियों की अनदेखी का शिकार रही। यहां हर साल सर्दी के मौसम में विदेशों से साइबेरियन पक्षी आते हैं। इनको देखने के लिए दूर-दराज से पर्यटक आते हैं। इसके बावजूद यहां पर उनके लिए कोई सुविधा नहीं है।
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शासन के निर्देश पर करीब दो महीने पहले ओडीओडी के तहत 35 लाख रुपये का प्रस्ताव बनाकर भेजा था गया, जिसमें से 25 लाख रुपये की स्वीकृति मिल गई है। इससे झील के पास पर्यटकों के लिए शौचालय, पार्किंग, पेयजल, बैठने की व्यवस्था व वनकर्मियों के कक्ष आदि बनवाए जाएंगे। झील को आने वाली प्रमुख सड़क को दुरुस्त कराने के साथ आसपास आकर्षक पेंटिंग कराई जाएगी। पर्यटकों की सहूलियत के लिए जनपद की हर प्रमुख सड़कों पर अलवारा झील की राह बताने वाले साइन बोर्ड लगेंगे।
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सरकारी भूमि कम होने से आ रही समस्याएं
अलवारा झील को संवारने का अब तक कोई प्रयास नहीं हुआ है तो इसकी मुख्य वजह सरकारी भूमि का अभाव है। वैसे तो यह झील करीब 405 हेक्टेयर में फैली है, लेकिन इसमें से केवल 70 हेक्टेयर भूमि ही सरकारी है। शेष 335 हेक्टेयर भूमि आसपास के किसानों की है। गर्मी के दिनों में कुछ महीनों के लिए पानी कम होने पर किसान अपनी भूमि पर खेती करते हैं। बारिश के बाद फिर इसमें जलभराव हो जाता है।
अब तक इस झील की अनदेखी ही हुई है। इसे संवारने के वादे तो खूब किए गए, लेकिन धरातल पर ठोस कदम कभी नहीं उठाए गए। नतीजा, झील का अस्तित्व संकट में पड़ गया है। उम्मीद है कि अब इसकी दशा कुछ सुधर जाएगी।- विक्रम सिंह, पौर काशीरामपुर
पूरी झील जलकुंभी, कमलगट्टा और घास से पटी है। दूरदराज से हर साल लोग सर्दी में विदेशी पक्षियों को देखने आते हैं, लेकिन यहां के रोमांचक नजारे देख नहीं पाते। कभी इसकी सफाई कराने की तरफ ध्यान नहीं दिया गया।- विद्याधर दुबे, पौर काशीरामपुर
ओडीओडी के तहत अलवारा झील के विकास के कार्य कराए जाने हैं। इसके लिए 25 लाख रुपये की स्वीकृत हो गए हैं। टेंडर और अन्य विभागीय प्रक्रियाएं शुरू कर दी गई हैं। इसी महीने काम चालू हो जाएगा।- दारा सिंह यादव, वन क्षेत्राधिकारी, मंझनपुर रेंज