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10 माह से बोतलों में कैद 48 मौतों का रहस्य
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- विसरा संरक्षित रखने के बाद रिपोर्ट मंगाना भूल जाती है पुलिस
- घटना में नामजद लोग बिना कसूर चले जाते हैं जेल
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। जिले में 48 लोगों की मौत का राज दस माह से बोतलों में बंद है। ये ऐसे लोग थे, जिनकी संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी। इन लोगों का विसरा संरक्षित कर जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा गया था, लेकिन रिपोर्ट अभी तक नहीं आ सकी है। संरक्षित किए गए विसरा की रिपोर्ट लेने में पुलिस दिलचस्पी नहीं दिखाती है। ऐसे में तमाम बेगुनाह लोग पुलिस में दर्ज कराए गए मुकदमों में जेल जाने को मजबूर हो जाते हैं।
संदिग्ध हालत में हुई मौतों का पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी स्पष्ट कारण नहीं पता चलने पर विसरा सुरक्षित रख लिया जाता है। पोस्टमार्टम हाउस से विसरा परीक्षण के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जाता है। पुलिस की सक्रियता सिर्फ जांच के लिए विसरा भेजने तक ही रहती है। जांच रिपोर्ट मंगवाने में पुलिस तेजी नहीं दिखाती। ऐसे में संदिग्ध मौतों का रहस्य बोतल में ही कैद होकर रह जाता है।
जनवरी महीने से लेकर अक्तूबर माह तक जिले के पोस्टमार्टम हाउस में 54 मामलों का विसरा प्रिजर्व कर जांच के लिए भेजा जा चुका है। इनमें से करीब 48 मामलों की जांच रिपोर्ट पुलिस को नहीं मिल सकी। जांच रिपोर्ट के अभाव में यह मौतें रहस्यमय बनी हुई हैं। वहीं, दूसरी तरफ मुकदमे में नामजद आरोपी जेल की हवा खा रहे हैं।
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खुद पुलिस के आंकड़ों पर गौर करें तो बेगुनाह लोगों के जेल जाने के मामले सामने आते रहे हैं। पूरामुफ्ती के सल्लाहपुर में 24 नवंबर 2018 को तालाब में फरहान का शव मिला। मामले में गैर इरादतन हत्या (धारा 304) की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने आरोपी का चालान कर दिया। छह अप्रैल 2019 को फरहान की विसरा रिपोर्ट आई, जिसमें किसी तरह का विष अथवा दवा का रिएक्शन नहीं पाया गया। इसी प्रकार पूरामुफ्ती कोतवाली के ही विक्रमपुर में नौ सितंबर 2018 को आसाम सिंह की मौत डूबने से हुई। इस मामले में छह अप्रैल 2019 को जांच रिपोर्ट आई। रिपोर्ट में किसी तरह के विष का जिक्र नहीं किया गया। मंझनपुर कोतवाली के चक सहनपुर में 10 जुलाई 2017 को निशानी (40) की इलाज के दौरान मौत हुई थी। मामले में इलाज करने वाले चिकित्सक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। 28 दिसंबर 2018 को निशानी की विसरा रिपोर्ट में विष का जिक्र नहीं किया गया।
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अपराध समीक्षा में भी नहीं दिया जाता ध्यान
मंझनपुर। पुलिस के अफसर हर महीने अपराध समीक्षा करते हैं। हत्या, लूट, डकैती व चोरी के बड़े मामलों पर ही फोकस रहता है। विसरा की तरफ किसी का ध्यान नहीं जाता है। पुलिस भी काम की व्यस्तता के कारण रिपोर्ट मंगवाने में दिलचस्पी नहीं दिखाती। जब प्रयोगशाला से ही खुद ही रिपोर्ट भेजी जाती है तो पुलिस उसे विवेचना में शामिल कर लेती है।
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सिर्फ थानों के पास रहता है रिकार्ड
मंझनपुर। जिले से जितने भी विसरा सुरक्षित रखे जाते हैं, उनका रिकार्ड सिर्फ थाने के पास रहता है। पुलिस ऑफिस में रिकार्ड नहीं होने के कारण विसरा की मानीटरिंग नहीं हो पाती है। इसके कारण काफी दिक्कत होती है।
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एसआरएन से भी जांच को भेजे जाते हैं विसरा
मंझनपुर। अक्सर लोग जहर खाने के बाद बीमार पड़ जाते हैं। घरवाले इलाज के लिए जिला अस्पताल लाते हैं। यहां भी हालत में सुधार नहीं होने पर प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल इलाज के लिए रेफर किया जाता है। वहां इलाज के दौरान होने वाली मौतों का विसरा सीधे प्रयोगशाला भेजा जाता है। जिले के आठ लोगों की मौत एसआरएन में ही हुई है। उनका विसरा वहीं से भेजा गया, जिसकी रिपोर्ट नहीं आ सकी है।
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लैब में सुरक्षित रखा जाता है विसरा
मंझनपुर। पुलिस विभाग के जानकारों की मानें तो पोस्टमार्टम हाउस से विसरा को तत्काल केमिकल भरे जार में डाल दिया जाता है। इसके बाद उसे प्रयोगशाला भेजा जाता है। यह बिसरा तीन महीने तक भी अगर प्रयोगशाला के बाहर रहे तो खराब नहीं होता।
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इनका कहना है
विशेष मामलों में विसरा की रिपोर्ट पैरवी करके जल्द मंगवाई जाती है। पूरे प्रदेश में सिर्फ दो ही लैब होने के कारण रिपोर्ट आने में देरी होती है। यह बात सही है कि अक्सर आरोपी को जेल भेजना पड़ जाता है। यह विवेचक के खुद के विवेक पर निर्भर करता है।
एसपी अभिनंदन
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- घटना में नामजद लोग बिना कसूर चले जाते हैं जेल
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। जिले में 48 लोगों की मौत का राज दस माह से बोतलों में बंद है। ये ऐसे लोग थे, जिनकी संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी। इन लोगों का विसरा संरक्षित कर जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा गया था, लेकिन रिपोर्ट अभी तक नहीं आ सकी है। संरक्षित किए गए विसरा की रिपोर्ट लेने में पुलिस दिलचस्पी नहीं दिखाती है। ऐसे में तमाम बेगुनाह लोग पुलिस में दर्ज कराए गए मुकदमों में जेल जाने को मजबूर हो जाते हैं।
संदिग्ध हालत में हुई मौतों का पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी स्पष्ट कारण नहीं पता चलने पर विसरा सुरक्षित रख लिया जाता है। पोस्टमार्टम हाउस से विसरा परीक्षण के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जाता है। पुलिस की सक्रियता सिर्फ जांच के लिए विसरा भेजने तक ही रहती है। जांच रिपोर्ट मंगवाने में पुलिस तेजी नहीं दिखाती। ऐसे में संदिग्ध मौतों का रहस्य बोतल में ही कैद होकर रह जाता है।
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जनवरी महीने से लेकर अक्तूबर माह तक जिले के पोस्टमार्टम हाउस में 54 मामलों का विसरा प्रिजर्व कर जांच के लिए भेजा जा चुका है। इनमें से करीब 48 मामलों की जांच रिपोर्ट पुलिस को नहीं मिल सकी। जांच रिपोर्ट के अभाव में यह मौतें रहस्यमय बनी हुई हैं। वहीं, दूसरी तरफ मुकदमे में नामजद आरोपी जेल की हवा खा रहे हैं।
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खुद पुलिस के आंकड़ों पर गौर करें तो बेगुनाह लोगों के जेल जाने के मामले सामने आते रहे हैं। पूरामुफ्ती के सल्लाहपुर में 24 नवंबर 2018 को तालाब में फरहान का शव मिला। मामले में गैर इरादतन हत्या (धारा 304) की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने आरोपी का चालान कर दिया। छह अप्रैल 2019 को फरहान की विसरा रिपोर्ट आई, जिसमें किसी तरह का विष अथवा दवा का रिएक्शन नहीं पाया गया। इसी प्रकार पूरामुफ्ती कोतवाली के ही विक्रमपुर में नौ सितंबर 2018 को आसाम सिंह की मौत डूबने से हुई। इस मामले में छह अप्रैल 2019 को जांच रिपोर्ट आई। रिपोर्ट में किसी तरह के विष का जिक्र नहीं किया गया। मंझनपुर कोतवाली के चक सहनपुर में 10 जुलाई 2017 को निशानी (40) की इलाज के दौरान मौत हुई थी। मामले में इलाज करने वाले चिकित्सक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। 28 दिसंबर 2018 को निशानी की विसरा रिपोर्ट में विष का जिक्र नहीं किया गया।
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अपराध समीक्षा में भी नहीं दिया जाता ध्यान
मंझनपुर। पुलिस के अफसर हर महीने अपराध समीक्षा करते हैं। हत्या, लूट, डकैती व चोरी के बड़े मामलों पर ही फोकस रहता है। विसरा की तरफ किसी का ध्यान नहीं जाता है। पुलिस भी काम की व्यस्तता के कारण रिपोर्ट मंगवाने में दिलचस्पी नहीं दिखाती। जब प्रयोगशाला से ही खुद ही रिपोर्ट भेजी जाती है तो पुलिस उसे विवेचना में शामिल कर लेती है।
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सिर्फ थानों के पास रहता है रिकार्ड
मंझनपुर। जिले से जितने भी विसरा सुरक्षित रखे जाते हैं, उनका रिकार्ड सिर्फ थाने के पास रहता है। पुलिस ऑफिस में रिकार्ड नहीं होने के कारण विसरा की मानीटरिंग नहीं हो पाती है। इसके कारण काफी दिक्कत होती है।
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एसआरएन से भी जांच को भेजे जाते हैं विसरा
मंझनपुर। अक्सर लोग जहर खाने के बाद बीमार पड़ जाते हैं। घरवाले इलाज के लिए जिला अस्पताल लाते हैं। यहां भी हालत में सुधार नहीं होने पर प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल इलाज के लिए रेफर किया जाता है। वहां इलाज के दौरान होने वाली मौतों का विसरा सीधे प्रयोगशाला भेजा जाता है। जिले के आठ लोगों की मौत एसआरएन में ही हुई है। उनका विसरा वहीं से भेजा गया, जिसकी रिपोर्ट नहीं आ सकी है।
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लैब में सुरक्षित रखा जाता है विसरा
मंझनपुर। पुलिस विभाग के जानकारों की मानें तो पोस्टमार्टम हाउस से विसरा को तत्काल केमिकल भरे जार में डाल दिया जाता है। इसके बाद उसे प्रयोगशाला भेजा जाता है। यह बिसरा तीन महीने तक भी अगर प्रयोगशाला के बाहर रहे तो खराब नहीं होता।
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इनका कहना है
विशेष मामलों में विसरा की रिपोर्ट पैरवी करके जल्द मंगवाई जाती है। पूरे प्रदेश में सिर्फ दो ही लैब होने के कारण रिपोर्ट आने में देरी होती है। यह बात सही है कि अक्सर आरोपी को जेल भेजना पड़ जाता है। यह विवेचक के खुद के विवेक पर निर्भर करता है।
एसपी अभिनंदन