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फिरौती के लालच में ममेरे भाइयों ने किया था बालक को अगवा
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My brothers had kidnapped the child in the greed of ransom
- फोटो : KAUSHAMBI
सदर कोतवाली के भेलखा गांव से शुक्रवार शाम लापता दो वर्षीय बालक को पुलिस ने सकुशल बरामद कर लिया। बालक का अपहरण उसके दो ममेरे भाइयों ने अपने एक साथी के साथ मिलकर फिरौती के लिए किया था। पुलिस ने एक अपहरणकर्ता को गिरफ्तार भी किया है। शनिवार को आरोपी के खिलाफ लिखापढ़ी करके उसका चालान कर दिया।
शनिवार को पुलिस ऑफिस में पत्रकार वार्ता के दौरान एसपी हेमराज मीणा ने बताया कि भेलखा गांव निवासी ध्यान सिंह यादव एक दवा कंपनी में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) हैं। शुक्रवार शाम करीब 6.30 बजे ध्यान सिंह का दो वर्षीय बेटा आरुष लापता हो गया। काफी देर तक आरुष घर नहीं लौटा तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की। इसके बाद भी पता नहीं चला तो मामले की शिकायत पुलिस से की गई।
पुलिस ने घटना की रिपोर्ट दर्ज कर छानबीन शुरू की। भेलखा पहुंचे इंस्पेक्टर विनोद सिंह ने आरुष के घरवालों व पड़ोसियों से पूछताछ की तो मालूम चला कि अंतिम दफा वह अपने रिश्ते के ममेरे भाई आशीष यादव के साथ देखा गया था। मूलत: करारी कोतवाली के गौहानी निवासी आशीष अपने ननिहाल भेलखा में ही रहता था। पुलिस ने उसके मोबाइल को चेक किया तो उसमें एक ऐसा नंबर मिला जिसमें उसने कई बार बात की थी। पूछताछ के दौरान उसने बताया कि यह नंबर उसके छोटे भाई अजीत का है।
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आशीष ने बताया कि अजीत मुंबई की एक धागा मिल में काम करता है और मौजूदा समय वहीं पर है। शक होने पर पुलिस ने उस नंबर को सर्विलांस के जरिए ट्रेस किया तो उसकी लोकेशन सिराथू निकली। इस पर पुलिस ने आशीष के कड़ाई तो वह टूट गया। बताया कि फिरौती के लिए उसने अपने भाई अजीत के साथ मिलकर आरुष को अगवा करने का प्लान बनाया था।
इतनी जानकारी मिलने के बाद इंस्पेक्टर विनोद सिंह, एसआई प्रमेश यादव, कृष्ण कुमार यादव, अभिषेक गुप्ता व आरक्षी आकाश दुबे और बृजेश यादव के साथ सिराथू के लिए रवाना हुए। पुलिस को देखकर अजीत व उसका साथी बच्चे को सड़क पर छोड़कर भाग निकले। एसपी ने बताया कि आशीष आदि का इरादा खौफनाक था लेकिन समय रहते बालक को सकुशल बरामद कर लिया गया। इसके लिए सदर कोतवाली पुलिस की टीम को 10 हजार नकद पुरस्कार दिया गया है।
आशीष ने अपहरण में अपने मनोरोगी मामा का लिया था सहारा
आरुष का अपहरणकर्ता आशीष चार भाई है। आशीष की मां का पति से अलगाव हो गया था। इसके बाद उसकी मां चारों बेटों को लेकर अपने मायके भेलखा में रहने लगी थी। यहां पर आशीष को जायदाद मिली थी। आशीष का एक मामा मनोरोगी है। आशीष ने बताया कि आरुष को अगवा करने में उसने अपने मामा की मदद ली थी। मामा ही आरुष को उसके घर से बुलाकर लाया था। इसके बाद उसने आरुष को टॉफी दिलाई और फिर ले जाकर अपने भाई अजीत व उसके दोस्त सौंप दिया। शक ना हो, इसके लिए वह भी आरुष के घरवालों के साथ खोजबीन में जुटा रहा।
फिरौती में 20 लाख तक मांगने की थी योजना
आशीष ने बताया कि वे आरुष के पिता से 20 लाख रुपये फिरौती वसूल करना चाहते थे। इसी प्लान के तहत उसने मुंबई में रहने वाले अपने छोटे भाई अजीत को बुला लिया। अजीत गांव न जाकर कहीं और रुका का था। जब आशीष ने आरुष को अगवा कर लिया तब अपने भाई को उसने फोन करके बुलाया। अजीत ने इस प्लान में अपने एक दोस्त को भी शामिल किया था।
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शनिवार को पुलिस ऑफिस में पत्रकार वार्ता के दौरान एसपी हेमराज मीणा ने बताया कि भेलखा गांव निवासी ध्यान सिंह यादव एक दवा कंपनी में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) हैं। शुक्रवार शाम करीब 6.30 बजे ध्यान सिंह का दो वर्षीय बेटा आरुष लापता हो गया। काफी देर तक आरुष घर नहीं लौटा तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की। इसके बाद भी पता नहीं चला तो मामले की शिकायत पुलिस से की गई।
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पुलिस ने घटना की रिपोर्ट दर्ज कर छानबीन शुरू की। भेलखा पहुंचे इंस्पेक्टर विनोद सिंह ने आरुष के घरवालों व पड़ोसियों से पूछताछ की तो मालूम चला कि अंतिम दफा वह अपने रिश्ते के ममेरे भाई आशीष यादव के साथ देखा गया था। मूलत: करारी कोतवाली के गौहानी निवासी आशीष अपने ननिहाल भेलखा में ही रहता था। पुलिस ने उसके मोबाइल को चेक किया तो उसमें एक ऐसा नंबर मिला जिसमें उसने कई बार बात की थी। पूछताछ के दौरान उसने बताया कि यह नंबर उसके छोटे भाई अजीत का है।
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आशीष ने बताया कि अजीत मुंबई की एक धागा मिल में काम करता है और मौजूदा समय वहीं पर है। शक होने पर पुलिस ने उस नंबर को सर्विलांस के जरिए ट्रेस किया तो उसकी लोकेशन सिराथू निकली। इस पर पुलिस ने आशीष के कड़ाई तो वह टूट गया। बताया कि फिरौती के लिए उसने अपने भाई अजीत के साथ मिलकर आरुष को अगवा करने का प्लान बनाया था।
इतनी जानकारी मिलने के बाद इंस्पेक्टर विनोद सिंह, एसआई प्रमेश यादव, कृष्ण कुमार यादव, अभिषेक गुप्ता व आरक्षी आकाश दुबे और बृजेश यादव के साथ सिराथू के लिए रवाना हुए। पुलिस को देखकर अजीत व उसका साथी बच्चे को सड़क पर छोड़कर भाग निकले। एसपी ने बताया कि आशीष आदि का इरादा खौफनाक था लेकिन समय रहते बालक को सकुशल बरामद कर लिया गया। इसके लिए सदर कोतवाली पुलिस की टीम को 10 हजार नकद पुरस्कार दिया गया है।
आशीष ने अपहरण में अपने मनोरोगी मामा का लिया था सहारा
आरुष का अपहरणकर्ता आशीष चार भाई है। आशीष की मां का पति से अलगाव हो गया था। इसके बाद उसकी मां चारों बेटों को लेकर अपने मायके भेलखा में रहने लगी थी। यहां पर आशीष को जायदाद मिली थी। आशीष का एक मामा मनोरोगी है। आशीष ने बताया कि आरुष को अगवा करने में उसने अपने मामा की मदद ली थी। मामा ही आरुष को उसके घर से बुलाकर लाया था। इसके बाद उसने आरुष को टॉफी दिलाई और फिर ले जाकर अपने भाई अजीत व उसके दोस्त सौंप दिया। शक ना हो, इसके लिए वह भी आरुष के घरवालों के साथ खोजबीन में जुटा रहा।
फिरौती में 20 लाख तक मांगने की थी योजना
आशीष ने बताया कि वे आरुष के पिता से 20 लाख रुपये फिरौती वसूल करना चाहते थे। इसी प्लान के तहत उसने मुंबई में रहने वाले अपने छोटे भाई अजीत को बुला लिया। अजीत गांव न जाकर कहीं और रुका का था। जब आशीष ने आरुष को अगवा कर लिया तब अपने भाई को उसने फोन करके बुलाया। अजीत ने इस प्लान में अपने एक दोस्त को भी शामिल किया था।