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ग्राहकों की आजादी पर भारी पड़ रही बैंकर्स की सख्ती
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Thu, 08 Dec 2016 12:56 AM IST
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मंझनपुर जिले के बैंकों में कैश बंट रहा है, लेकिन जरूरत के हिसाब से नहीं। बैंकर्स ने सबको रुपया देने की एक मियाद तय कर रखी है। वह दो से पांच हजार रुपये ही दे रहे हैं। इससे ऊपर की रकम मांगने पर वह साफ इंकार कर दे रहे हैं।
बैंकों में रुपये के लिए मारामारी अभी भी मची है। नोटबंदी के बाद बैंकों की स्थिति खराब हो चुकी है। उन्हें पर्याप्त मात्रा में कैश नहीं मिल रहा है। यही कारण है कि वह ग्राहकों को दो से पांच हजार रुपये दे रहे हैं। इसका सबसे बड़ा नुकसान कारोबारी व सरकारी कर्मचारियों को हो रहा है। मंझनपुर के कारोबारी रमेश कुमार को 20 हजार रुपये की जरूरत थी। वह बीओबी में बुधवार को रुपया लेने गए थे, लेकिन उन्हें 20 हजार रुपया नहीं दिया गया। इसके अलावा उनके साथ कर्मचारी अनिल कुमार लगे थे। उन्हें भी 15 हजार की जरूरत थी, लेकिन छह हजार से ज्यादा की रकम नहीं दी गई। यही हाल जिले के तमाम लोगों का था।
बैंक बंद कर पड़ोस में बैठे रहे मैनेजर व कैशियर
बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की शाखा पुरखास में बुधवार को कैश नहीं आया था। बैंक के बाहर सैकड़ों लोगों की भीड़ थी। लोगों के गुस्से का सामना न करना पड़े। इसको देखते हुए मैनेजर व कैशियर ने बैंक खोलने के बजाय पड़ोस के एक घर में जाकर बैठ गए। इसके बाद वह वहां से नहीं निकले।
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बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक पुरखास ने गुरुवार को ग्राहकों को खूब परेशान किया। बैंक मैनेजर लालचंद्र व कैशियर ओमप्रकाश निर्धारित समय पर पहुंचे तो भीड़ देखकर उनके होश उड़ गए। इसकी वजह यह थी कि कैश उनके पास नहीं था और न ही आने की उम्मीद थी। रुपया न मिलने पर हंगामा होने की संभावना थी। इसको देखते हुए बैंक मैनेजर व कैशियर ने बैंक खोलने के बजाय पड़ोस के एक घर में जाकर बैठ गए। ग्राहकों ने फोन भी लगाया, लेकिन उन्होंने नहीं उठाया। इस दौरान बैंक मैनेजर ने कैश मंगवाने का प्रयास किया, लेकिन कोई जवाब अधिकारियाें की ओर से नहीं आया।
नौ करोड़ का हुआ कारोबार
जिले में बुधवार को बैंकर्स ने नौ करोड़ का कारोबार किया। दो करोड़ रुपया लोगों ने जमा किया, जबकि सात करोड़ रुपया बैंकर्स ने ग्राहकों को बांटे। इनमें से कई ऐसे बैंक रहे, जहां दो बजे के बाद कैश ही नहीं वितरित हुआ। इसको लेकर लोगों में नाराजगी भी दिखी।
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बैंकों में रुपये के लिए मारामारी अभी भी मची है। नोटबंदी के बाद बैंकों की स्थिति खराब हो चुकी है। उन्हें पर्याप्त मात्रा में कैश नहीं मिल रहा है। यही कारण है कि वह ग्राहकों को दो से पांच हजार रुपये दे रहे हैं। इसका सबसे बड़ा नुकसान कारोबारी व सरकारी कर्मचारियों को हो रहा है। मंझनपुर के कारोबारी रमेश कुमार को 20 हजार रुपये की जरूरत थी। वह बीओबी में बुधवार को रुपया लेने गए थे, लेकिन उन्हें 20 हजार रुपया नहीं दिया गया। इसके अलावा उनके साथ कर्मचारी अनिल कुमार लगे थे। उन्हें भी 15 हजार की जरूरत थी, लेकिन छह हजार से ज्यादा की रकम नहीं दी गई। यही हाल जिले के तमाम लोगों का था।
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बैंक बंद कर पड़ोस में बैठे रहे मैनेजर व कैशियर
बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की शाखा पुरखास में बुधवार को कैश नहीं आया था। बैंक के बाहर सैकड़ों लोगों की भीड़ थी। लोगों के गुस्से का सामना न करना पड़े। इसको देखते हुए मैनेजर व कैशियर ने बैंक खोलने के बजाय पड़ोस के एक घर में जाकर बैठ गए। इसके बाद वह वहां से नहीं निकले।
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बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक पुरखास ने गुरुवार को ग्राहकों को खूब परेशान किया। बैंक मैनेजर लालचंद्र व कैशियर ओमप्रकाश निर्धारित समय पर पहुंचे तो भीड़ देखकर उनके होश उड़ गए। इसकी वजह यह थी कि कैश उनके पास नहीं था और न ही आने की उम्मीद थी। रुपया न मिलने पर हंगामा होने की संभावना थी। इसको देखते हुए बैंक मैनेजर व कैशियर ने बैंक खोलने के बजाय पड़ोस के एक घर में जाकर बैठ गए। ग्राहकों ने फोन भी लगाया, लेकिन उन्होंने नहीं उठाया। इस दौरान बैंक मैनेजर ने कैश मंगवाने का प्रयास किया, लेकिन कोई जवाब अधिकारियाें की ओर से नहीं आया।
नौ करोड़ का हुआ कारोबार
जिले में बुधवार को बैंकर्स ने नौ करोड़ का कारोबार किया। दो करोड़ रुपया लोगों ने जमा किया, जबकि सात करोड़ रुपया बैंकर्स ने ग्राहकों को बांटे। इनमें से कई ऐसे बैंक रहे, जहां दो बजे के बाद कैश ही नहीं वितरित हुआ। इसको लेकर लोगों में नाराजगी भी दिखी।