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किसी की जिद पूरी, किसी की जरूरत अधूरी
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Mon, 05 Dec 2016 12:24 AM IST
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जमा निकासी की सीमा खत्म हो चुकी है। इसके बाद भी बैंकर्स ने अपनी मर्जी से गरीबों व किसानों को एक दायरे में बांध रखा है। बैंकों का कायदा कानून सेठों व असरदारों पर नहीं लागू होता है। इन्हें मुंहमांगी रकम दी जा रही है। जरूरतमंदों को दरकिनार कर यह खेल बैंककर्मी खेल रहे हैं। इससे लोगों में आक्रोश पनपने लगा है।
बैंकों से अपना रुपया निकालने के लिए लोगों को तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। लोग अपनी जरूरत के हिसाब से विदड्राल भर रहे हैं, लेकिन उन्हें दो से पांच हजार रुपये ही दिए जा रहे हैं। वहीं असरदार लोगों व सेठों को मुंहमांगी रकम दी जा रही है। इसके लिए बैंकों ने चोर दरवाजा भी खोल दिया है। दो-दो घंटे लाइन में खड़े होने वाले ग्राहकों को बैंककर्मी मजबूरी व अन्य कई कारण बताकर कैश कम दे रहे हैं। उनकी यह मजबूरी सेठों के लिए नहीं है।
वह कारोबारियों को 24 हजार दे रहे हैं। देर शाम इन्हें बुलाकर बैंक से कैश दिया जाता है। कई बैंकों से इसकी शिकायत आ रही है। लोग खुलकर अब बोलने भी लगे हैं। मूरतगंज के एक बैंक का वीडियो वायरल हुआ है। इस वीडियो में शनिवार की शाम करीब छह बजे एक बैंक से चेक पर भुगतान किया जाता है। इस दौरान वहां कारोबारी के अलावा ग्राहक नहीं होते हैं। इसके पहले इसी बैंक से ग्राहकों को यह कहकर दो से पांच हजार रुपया दिया गया था कि कैश कम है। सबको बांटना है। इस बैंक की लगातार लोग शिकायत कर रहे हैं। चपरासी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए लोगों ने मैनेजर के संज्ञान में मामला लाया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। न ही चपरासी पर लगाम लगाया गया।
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बीओबी मूरतगंज स्टाफ को बदलने की मांग
बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा मूरतगंज में बैंक कर्मियों की मनमानी बढ़ गई है। खाता धारकों को लगातार परेशान किया जा रहा है। कैश आने के बाद भी उनको विदड्राल के हिसाब से रुपया नहीं दिया जा रहा है। इससे व्यापारियों व आम उपभोक्ताओं में गुस्सा है। मूरतगंज के उद्योग व्यापार मंडल अध्यक्ष रविकांत केशरवानी, गुलाम मुर्तजा, बृज किशोर रस्तोगी आदि लोगों ने बीओबी मूरतगंज शाखा में तैनात स्टाफ को हटवाने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि ये स्टाफ बहुत पुराना है और मूरतगंज में ही रहता है, इसलिए लोगों के संपर्क में होने के कारण वह दूसरों के प्रभाव में है।
स्टाफ से यदि किसी तरह की दिक्कत है तो लोग उनसे शिकायत करें। वह जांच कराएंगे कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। व्यापारियों की शिकायत पर वह बैंक कर्मियों की भूमिका की जांच कराएंगे।
दिनेश मिश्र, एलडीएम
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बैंकों से अपना रुपया निकालने के लिए लोगों को तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। लोग अपनी जरूरत के हिसाब से विदड्राल भर रहे हैं, लेकिन उन्हें दो से पांच हजार रुपये ही दिए जा रहे हैं। वहीं असरदार लोगों व सेठों को मुंहमांगी रकम दी जा रही है। इसके लिए बैंकों ने चोर दरवाजा भी खोल दिया है। दो-दो घंटे लाइन में खड़े होने वाले ग्राहकों को बैंककर्मी मजबूरी व अन्य कई कारण बताकर कैश कम दे रहे हैं। उनकी यह मजबूरी सेठों के लिए नहीं है।
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वह कारोबारियों को 24 हजार दे रहे हैं। देर शाम इन्हें बुलाकर बैंक से कैश दिया जाता है। कई बैंकों से इसकी शिकायत आ रही है। लोग खुलकर अब बोलने भी लगे हैं। मूरतगंज के एक बैंक का वीडियो वायरल हुआ है। इस वीडियो में शनिवार की शाम करीब छह बजे एक बैंक से चेक पर भुगतान किया जाता है। इस दौरान वहां कारोबारी के अलावा ग्राहक नहीं होते हैं। इसके पहले इसी बैंक से ग्राहकों को यह कहकर दो से पांच हजार रुपया दिया गया था कि कैश कम है। सबको बांटना है। इस बैंक की लगातार लोग शिकायत कर रहे हैं। चपरासी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए लोगों ने मैनेजर के संज्ञान में मामला लाया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। न ही चपरासी पर लगाम लगाया गया।
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बीओबी मूरतगंज स्टाफ को बदलने की मांग
बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा मूरतगंज में बैंक कर्मियों की मनमानी बढ़ गई है। खाता धारकों को लगातार परेशान किया जा रहा है। कैश आने के बाद भी उनको विदड्राल के हिसाब से रुपया नहीं दिया जा रहा है। इससे व्यापारियों व आम उपभोक्ताओं में गुस्सा है। मूरतगंज के उद्योग व्यापार मंडल अध्यक्ष रविकांत केशरवानी, गुलाम मुर्तजा, बृज किशोर रस्तोगी आदि लोगों ने बीओबी मूरतगंज शाखा में तैनात स्टाफ को हटवाने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि ये स्टाफ बहुत पुराना है और मूरतगंज में ही रहता है, इसलिए लोगों के संपर्क में होने के कारण वह दूसरों के प्रभाव में है।
स्टाफ से यदि किसी तरह की दिक्कत है तो लोग उनसे शिकायत करें। वह जांच कराएंगे कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। व्यापारियों की शिकायत पर वह बैंक कर्मियों की भूमिका की जांच कराएंगे।
दिनेश मिश्र, एलडीएम