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बटाई पर खेत लेने के लिए प्रवासियों में मची होड़

Sun, 31 May 2020 12:10 AM IST
shailendra Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, कौशाम्बी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशाम्बी Published by: shailendra Kumar Updated Sun, 31 May 2020 12:10 AM IST
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मंझनपुर। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस को लेकर जारी लॉकडाउन के चलते दोआबा में तकरीबन 30 हजार प्रवासी घर लौट आए हैं। इससे खेती किसानी के दिन बहुरने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। परिवार का खर्च चलाने के लिए रोजगार की तलाश में जुटे प्रवासियों को खेती-किसानी में फिर से भविष्य दिखने लगा है। इसके चलते ठेका और बटाई पर खेती लेने के लिए गांवों में प्रवासियों के बीच होड़ लग रही है।
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यूं तो दोआबा के लोगों की जीविका का मुख्य साधन खेती है, लेकिन पिछले दो दशकों में आबादी बढ़ने के साथ ही छोटी हुई जोत के कारण जरूरत भर की आमदनी नहीं होने से यहां के युवाओं ने महानगरों का रुख कर लिया था। जिले के 50 हजार से ज्यादा कामगार दो वक्त की रोटी के लिए महानगरों की ओर पलायन कर गए थे। गांव में खेती-किसानी पर संकट मंडराने लगा। बड़े काश्तकार भी मजदूर नहीं मिलने के कारण खेती से विमुख होकर ठेका व बटाई पर काम कराना शुरू कर दिया था। औने-पौने दाम पर खेत ठेका और बटाई पर उठने लगे थे। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस ने ऐसा करवट बदला कि एक झटके में सबकुछ बदल गया। महामारी के चलते अब तक तकरीबन 30 हजार प्रवासी घर आ चुके हैं। बड़ी संख्या में घर आए प्रवासियों ने लॉक डाउन के दौरान महानगरों में जो दर्द झेला है उसकी वजह से वह फिलहाल वापस जाने के हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। लेकिन गांव में भी उनके सामने परिवार पालने की समस्या है। लिहाजा उनका रुख परंपरागत कार्य खेती-किसानी की ओर बढ़ रहा है। इससे खेती किसानी के दिन बहुरने की उम्मीदें पैदा हो गई हैं। परिवार का खर्च चलाने के लिए रोजगार तलाशने में जुटे प्रवासी बड़े काश्तकारों के दरवाजे पहुंचकर ठेका व बंटाई पर खेत को लेने के लिए मिन्नतें कर रहे हैं। इसके लिए प्रवासी आपस में होड़ मचाए हुए हैं। सिराथू ब्लॉक के टीकरडीह निवासी गुड्डू यादव, अभिषेक, उमेश, गांव अजरौली निवासी पप्पू, रमेश की मानें तो पहले खेत को पटौता (ठेका) या बंटाई पर देने के लिए लोगों को खोजना पड़ता था, लेकिन इस बार खेत मालिक के पास प्रवासी खुद चक्कर लगा रहे हैं। बड़े किसानों की बात मानें तो कम उपजाऊ खेत भी लोग ले रहे हैं। इससे पिछले वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष धान की फसल अधिक होने की उम्मीद है।
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