{"_id":"58b470a04f1c1bbd0e830bbc","slug":"medicine-kit","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिना बीमारी लाखों की दवा खा गई पोलिंग पार्टियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिना बीमारी लाखों की दवा खा गई पोलिंग पार्टियां
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Tue, 28 Feb 2017 12:07 AM IST
विज्ञापन
kaushambi
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मतदान कराने वाली पोलिंग पार्टियां लाखों की दवा खा गई हैं। मतदान कर्मियों ने बिना बीमारी के ही इस दवा का इस्तेमाल किया है। बूथों पर रवाना होने से पहले मंडी में इनको मेडिसिन किट दी गई थी। मतदान के बाद ईवीएम तो पोलिंग पार्टियों ने जमा किया, लेकिन उन्होंने किट वापस नहीं की। इससे विभाग को जबर्दस्त झटका लगा है। इससे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी परेशान हैं।
मतदान से एक दिन पूर्व मंडी समिति ओसा से रवाना की जा रही पोलिंग पार्टियों को सीएमओ के नेतृत्व में मेडिसिन किट मुहैया कराई गई थी। 1147 पोलिंग पार्टियों को यह मेडिसिन किट दी गई थी। किट को तैयार कराने में लाखों रुपये का खर्च आया था। आयोग की मंशा थी कि यदि बूथ पर कोई मतदान कर्मी बीमार पड़ जाए तो उसे तत्काल राहत के तौर पर दवा उपलब्ध हो सके। इसी उद्देश्य से किट का वितरण किया गया था। इस किट में पीठासीन सहित पोलिंग आफीसर प्रथम, द्वितीय व तृतीय कर्मी के लिए दवा थीं।
मतदान खत्म होने के बाद वापस आई पोलिंग पार्टियों ने ईवीएम तो जमा की, लेकिन किसी ने भी मेडिसिन किट नहीं जमा की, जबकि निर्देशित किया गया था कि यदि दवा प्रयोग में न आए तो मतदान के बाद किट को सीएमओ कार्यालय में जमा करा देंगे। मतदान हुए चार दिन का समय बीत गया पर एक भी पोलिंग पार्टी ने अपनी किट महकमे को वापस नहीं की। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि बगैर बीमारी के ही पोलिंग पार्टियों ने लाखों रुपये से तैयार कराई गई किट की दवाएं निगल लीं हैं। किट के वापस न होने को लेकर सीएमओ भी पसोपेश में हैं।
विज्ञापन
जुकाम, बुखार व बदन दर्द की थी दवाएं
बूथों के लिए रवाना हुईं 1147 पोलिंग पार्टियों को एक-एक मेडिसिन किट मुहैया कराई गई थी। सीएमओ की मानें तो प्रत्येक किट में जुकाम, बुखार व बदन दर्द की दवाओं के अलावा लोशन व मरहम पट्टी भी थी। किट वापस न किए जाने को लेकर अब विभाग मानने लगा है कि उपयोगी दवाओं के होने की वजह से पोलिंग पार्टियों की मंशा बदल गई है। बूथों पर भले ही दवाओं की जरूरत न पड़ी हो पर घर में जरूर काम आएगी। यही कारण है कि किट वापस नहीं की गई।
पीठासीन अधिकारी के हवाले थी मेडिसिन कीट
बूथ पर जाने से पहले मेडिसिन किट पीठासीन अधिकारियों को दी गई थी। किसी को जरूरत पड़ने पर पीठासीन अधिकारी इस किट में उपलब्ध दवाएं देते। मतदान के बाद इसे वापस करना था, लेकिन किसी भी पीठासीन अधिकारी ने किट वापस नहीं की। इससे स्वास्थ्य विभाग को भारी नुकसान हुआ है।
प्रत्येक पोलिंग पार्टी को एक-एक मेडिसिन किट मुहैया कराई गई थी। लाखों रुपये खर्च कर यह किट तैयार कराई थी। जरूरत न पड़ने पर किट वापस करने को कहा गया था। अभी तक एक भी किट वापस नहीं आ सकी है।
एसके उपाध्याय, सीएमओ
विज्ञापन
मतदान से एक दिन पूर्व मंडी समिति ओसा से रवाना की जा रही पोलिंग पार्टियों को सीएमओ के नेतृत्व में मेडिसिन किट मुहैया कराई गई थी। 1147 पोलिंग पार्टियों को यह मेडिसिन किट दी गई थी। किट को तैयार कराने में लाखों रुपये का खर्च आया था। आयोग की मंशा थी कि यदि बूथ पर कोई मतदान कर्मी बीमार पड़ जाए तो उसे तत्काल राहत के तौर पर दवा उपलब्ध हो सके। इसी उद्देश्य से किट का वितरण किया गया था। इस किट में पीठासीन सहित पोलिंग आफीसर प्रथम, द्वितीय व तृतीय कर्मी के लिए दवा थीं।
विज्ञापन
मतदान खत्म होने के बाद वापस आई पोलिंग पार्टियों ने ईवीएम तो जमा की, लेकिन किसी ने भी मेडिसिन किट नहीं जमा की, जबकि निर्देशित किया गया था कि यदि दवा प्रयोग में न आए तो मतदान के बाद किट को सीएमओ कार्यालय में जमा करा देंगे। मतदान हुए चार दिन का समय बीत गया पर एक भी पोलिंग पार्टी ने अपनी किट महकमे को वापस नहीं की। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि बगैर बीमारी के ही पोलिंग पार्टियों ने लाखों रुपये से तैयार कराई गई किट की दवाएं निगल लीं हैं। किट के वापस न होने को लेकर सीएमओ भी पसोपेश में हैं।
विज्ञापन
जुकाम, बुखार व बदन दर्द की थी दवाएं
बूथों के लिए रवाना हुईं 1147 पोलिंग पार्टियों को एक-एक मेडिसिन किट मुहैया कराई गई थी। सीएमओ की मानें तो प्रत्येक किट में जुकाम, बुखार व बदन दर्द की दवाओं के अलावा लोशन व मरहम पट्टी भी थी। किट वापस न किए जाने को लेकर अब विभाग मानने लगा है कि उपयोगी दवाओं के होने की वजह से पोलिंग पार्टियों की मंशा बदल गई है। बूथों पर भले ही दवाओं की जरूरत न पड़ी हो पर घर में जरूर काम आएगी। यही कारण है कि किट वापस नहीं की गई।
पीठासीन अधिकारी के हवाले थी मेडिसिन कीट
बूथ पर जाने से पहले मेडिसिन किट पीठासीन अधिकारियों को दी गई थी। किसी को जरूरत पड़ने पर पीठासीन अधिकारी इस किट में उपलब्ध दवाएं देते। मतदान के बाद इसे वापस करना था, लेकिन किसी भी पीठासीन अधिकारी ने किट वापस नहीं की। इससे स्वास्थ्य विभाग को भारी नुकसान हुआ है।
प्रत्येक पोलिंग पार्टी को एक-एक मेडिसिन किट मुहैया कराई गई थी। लाखों रुपये खर्च कर यह किट तैयार कराई थी। जरूरत न पड़ने पर किट वापस करने को कहा गया था। अभी तक एक भी किट वापस नहीं आ सकी है।
एसके उपाध्याय, सीएमओ