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फ्लाइट के इंतजार में हंगरी की राजधानी बुडापोस्ट में ठहरा मेडिकल छात्र प्रमोद
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सैनी। यूक्रेन के खारकीव शहर में फंसा कौशाम्बी का मेडिकल छात्र प्रमोद कुमार सिंह बृहस्पतिवार की सुबह आठ बजे बस से हंगरी बार्डर पर पहुंच गया। यहां उसे अपने 150 अन्य भारतीय छात्रों के साथ एयरपोर्ट के नजदीक एक होटल में ठहराया गया है। छात्रों को बताया गया है कि भारत से फ्लाइट आते ही उसे साथियों के साथ इंडिया सकुशल भेज दिया जाएगा।
सिराथू तसहील के चकमानिकुपर सैयदराजे निवासी वीरेंद्र सिंह का बेटा प्रमोद सिंह यूक्रेन मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए छह माह पूर्व गया था। वह खारकीव के मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष का छात्र है। यूक्रेन पर हमले के दौरान छात्र प्रमोद सिंह ने हॉस्टल के बंकर में किसी तरह पांच दिन बिस्किट और पानी के सहारे गुजारा। यूक्रेन के इस सबसे बड़े शहर पर खतरा अधिक होने पर वह भारतीय दूतावास के निर्देश पर अपने वतन के लिए चल पड़ा। प्रमोद ने अमर उजाला को बताया कि स्थानीय समयानुसार बृहस्पतिवार की सुबह आठ बजे वह हंगरी बार्डर अपने अन्य 150 भारतीय छात्रों के साथ पहुंच गया। हंगरी बार्डर पर अभिलेख चेक करने की लंबी लाइन लगी थी। तीन घंटे में कागजों की जांच हो जाने के बाद उसे दूतावास की ओर से ट्रेन द्वारा साथियों के साथ हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट भेजा गया।
यहां पहुंचने पर दूतावास की ओर से बस उपलब्ध कराई गई। बस सवार कर एयरपोर्ट के पास ही एक होटल में उसे साथियों के साथ ठहराया गया है। कहा गया है कि अब वे लोग खतरे से बाहर आ चुके हैं। भारत से फ्लाइट आते ही उन्हें उसमें बैठा कर भारत के लिए रवाना कर दिया जाएगा। मेडिकल छात्र प्रमोद ने बृहस्पतिवार को दो बार अपने परिजनों से बात कर कहा कि यह मोदी सरकार की देन है कि वह सकुशल घर वापस लौट रहा है। सरकार अपने देश के छात्रों का बहुत ख्याल रख रही है।
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भारत सरकार ने परिजनों पर किया उपकार
सैनी। मेडिकल छात्र प्रमोद के पिता वीरेंद्र सिंह का कहना है कि बृहस्पतिवार को परिजनों को यह जानकर सुकून मिला कि उनका बेटा सकुशल यूक्रेन से बाहर निकल हंगरी पहुंच गया है। पड़ोसी देश में किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। परिजनों का कहना है कि भारत सरकार ने उसके परिवार पर बहुत बड़ा अहसान किया है।
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सिराथू तसहील के चकमानिकुपर सैयदराजे निवासी वीरेंद्र सिंह का बेटा प्रमोद सिंह यूक्रेन मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए छह माह पूर्व गया था। वह खारकीव के मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष का छात्र है। यूक्रेन पर हमले के दौरान छात्र प्रमोद सिंह ने हॉस्टल के बंकर में किसी तरह पांच दिन बिस्किट और पानी के सहारे गुजारा। यूक्रेन के इस सबसे बड़े शहर पर खतरा अधिक होने पर वह भारतीय दूतावास के निर्देश पर अपने वतन के लिए चल पड़ा। प्रमोद ने अमर उजाला को बताया कि स्थानीय समयानुसार बृहस्पतिवार की सुबह आठ बजे वह हंगरी बार्डर अपने अन्य 150 भारतीय छात्रों के साथ पहुंच गया। हंगरी बार्डर पर अभिलेख चेक करने की लंबी लाइन लगी थी। तीन घंटे में कागजों की जांच हो जाने के बाद उसे दूतावास की ओर से ट्रेन द्वारा साथियों के साथ हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट भेजा गया।
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यहां पहुंचने पर दूतावास की ओर से बस उपलब्ध कराई गई। बस सवार कर एयरपोर्ट के पास ही एक होटल में उसे साथियों के साथ ठहराया गया है। कहा गया है कि अब वे लोग खतरे से बाहर आ चुके हैं। भारत से फ्लाइट आते ही उन्हें उसमें बैठा कर भारत के लिए रवाना कर दिया जाएगा। मेडिकल छात्र प्रमोद ने बृहस्पतिवार को दो बार अपने परिजनों से बात कर कहा कि यह मोदी सरकार की देन है कि वह सकुशल घर वापस लौट रहा है। सरकार अपने देश के छात्रों का बहुत ख्याल रख रही है।
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भारत सरकार ने परिजनों पर किया उपकार
सैनी। मेडिकल छात्र प्रमोद के पिता वीरेंद्र सिंह का कहना है कि बृहस्पतिवार को परिजनों को यह जानकर सुकून मिला कि उनका बेटा सकुशल यूक्रेन से बाहर निकल हंगरी पहुंच गया है। पड़ोसी देश में किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। परिजनों का कहना है कि भारत सरकार ने उसके परिवार पर बहुत बड़ा अहसान किया है।