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Kaushambi News: हौसलों से महेश ने दिव्यांगता को किया परास्त
Mon, 28 Aug 2023 12:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Mon, 28 Aug 2023 12:27 AM IST
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मेडल के साथ दिव्यांग खिलाड़ी महेश कुमार गौतम स्रोत- खिलाड़ी स्वयं
मंझनपुर। जोश वालों का परिस्थितियों से नहीं होता वास्ता, वह खुद ही बना लेते हैं अपना रास्ता। ऐसी ही सोच से एक दिव्यांग नौजवान ने सात साल पहले खेलकूद की राह पकड़ी। मजबूत इरादे के बल पर कई मेडल जीतकर राष्ट्रीय स्तर पर भी कौशाम्बी का नाम रोशन किया।
यह कहानी है जिले की नगर पंचायत अजुहा के वार्ड नंबर सात मौलाना आजाद नगर के दिव्यांग महेश कुमार गौतम की। महेश बताते हैं कि खेल में उनकी रुचि पहले से ही थी, लेकिन दिव्यांगता उनके लक्ष्य में आडे़ आ रही थी। इसी बीच वर्ष 2016 में पता चला कि दिव्यांगों की पैरा एथलीट प्रतियोगिताएं भी होती हैं। उसी समय प्रयागराज के कैंट में एक चैंपियनशिप होनी थी। एक महीने का वक्त था। आर्मी की तैयारी कर रहे एक साथी का सहयोग मिला और तैयारी शुरू कर दी। दिव्यांगता को हराने की ठान ली। परिणामस्वरूप पहली प्रतियोगिता में ही जब गोल्ड मेडल मिला तो उत्साह और बढ़ गया। फिर राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की तैयारी शुरू कर दी।
बचपन से ही पोलियो के शिकार महेश को एक पैर से चलने में परेशानी होती है। लेकिन हौसले में कोई कमी नहीं है। उन्होंने स्टेट लेबल की अलग-अलग पैरा एथलीट चैंपियनशिप में तीन गोल्ड, दो सिल्वर और एक ब्रांज मेडल झटक लिए। इसके अलावा आगरा, गाजियाबाद और नोएडा में प्रतियोगिताओं में न सिर्फ हिस्सा लिया, बल्कि एक गोल्ड, तीन सिल्वर और एक ब्रांज मेडल जीतकर जिले का मान बढ़ाया।
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खास बात यह है कि अजुहा में न तो कोई खेल का मैदान है और न ही स्टेडियम। 35 किमी दूर जिला मुख्यालय के स्टेडियम तक रोज पहुंचना संभव नहीं था। इसलिए सड़कों पर दौड़ लगाकर और खेतों में लंबीकूद का अभ्यास करके उन्होंने खेल जगत में यह कामयाबी हासिल की।
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यह कहानी है जिले की नगर पंचायत अजुहा के वार्ड नंबर सात मौलाना आजाद नगर के दिव्यांग महेश कुमार गौतम की। महेश बताते हैं कि खेल में उनकी रुचि पहले से ही थी, लेकिन दिव्यांगता उनके लक्ष्य में आडे़ आ रही थी। इसी बीच वर्ष 2016 में पता चला कि दिव्यांगों की पैरा एथलीट प्रतियोगिताएं भी होती हैं। उसी समय प्रयागराज के कैंट में एक चैंपियनशिप होनी थी। एक महीने का वक्त था। आर्मी की तैयारी कर रहे एक साथी का सहयोग मिला और तैयारी शुरू कर दी। दिव्यांगता को हराने की ठान ली। परिणामस्वरूप पहली प्रतियोगिता में ही जब गोल्ड मेडल मिला तो उत्साह और बढ़ गया। फिर राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की तैयारी शुरू कर दी।
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बचपन से ही पोलियो के शिकार महेश को एक पैर से चलने में परेशानी होती है। लेकिन हौसले में कोई कमी नहीं है। उन्होंने स्टेट लेबल की अलग-अलग पैरा एथलीट चैंपियनशिप में तीन गोल्ड, दो सिल्वर और एक ब्रांज मेडल झटक लिए। इसके अलावा आगरा, गाजियाबाद और नोएडा में प्रतियोगिताओं में न सिर्फ हिस्सा लिया, बल्कि एक गोल्ड, तीन सिल्वर और एक ब्रांज मेडल जीतकर जिले का मान बढ़ाया।
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खास बात यह है कि अजुहा में न तो कोई खेल का मैदान है और न ही स्टेडियम। 35 किमी दूर जिला मुख्यालय के स्टेडियम तक रोज पहुंचना संभव नहीं था। इसलिए सड़कों पर दौड़ लगाकर और खेतों में लंबीकूद का अभ्यास करके उन्होंने खेल जगत में यह कामयाबी हासिल की।